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कन्नौज: सहपाठी का अपहरण कर उतारा मौत के घाट

Fri, 14 Feb 2020 11:00 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 14 Feb 2020 11:00 PM IST
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कन्नौज। शौक पूरे करने के लिए गए कर्ज ने आखिरकार एक छात्र को अपराध के रास्ते पर पहुंचा दिया। कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ने पर उसने सहपाठी का अपहरण कर हत्या कर दी। इस वारदात में शातिर ने अपने मामा, चचेरे भाई और चार दोस्तों को शामिल किया था। आरोपियों ने 15 दिन पहले छात्र के अपहरण की योजना बनाई थी। घटनास्थल की रेकी के बाद आरोपियों ने हत्या कर जंगल में गड्ढा खोदकर शव दबा दिया था।
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एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने शुक्रवार को तिर्वा कस्बा के अन्नपूर्णा नगर निवासी गोपाल राजपूत के बेटे अभिषेेक की हत्या का खुलासा किया। अपहरण के बाद फिरौती में आठ लाख रुपये के मिलने लालच में अभिषेक के साथ पढ़ने वाले मुख्य आरोपी शिवम राजपूत उर्फ दरोगा ने साजिश रची थी। दौलीखाती निवासी जीतू के बेटे शिवम ने फिरौती में मिलने वाली रकम आपस में बांटने का लालच देकर अपने चचेरे भाई रोशन पुत्र संजय राजपूत, श्यामनगर फर्रुखाबाद निवासी मामा ध्रुव , दोस्त झबरा गांव निवासी रामसेवक के बेटे श्याम सुंदर, सुक्खापुरवा के रामकुमार के बेटे रामजी, जयसिंह पुरवा निवासी बालक के बेटे लल्ली और कमलेपुर्वा निवासी देवपाल के बेटे आशीष वर्मा को शामिल किया था। पुलिस ने गुरुवार देर रात शिवम, श्याम सुंदर, रामजी और आशीष को गिरफ्तार कर लिया। इनके कब्जे से हत्या में प्रयुक्त चाकू, टूटी हॉकी, फिरौती मांगने में प्रयुक्त मोबाइल फोन, एक तमंचा और तीन मोबाइल फोन बरामद किए।
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एसपी ने बताया कि मुख्य आरोपी शिवम, आशीष और रोशन अभिषेक के साथ इंटर की पढ़ाई करते थे। पिता की मौत के बाद शिवम की संगत बिगड़ गई थी। कई लोगाें से उधार रुपये लेकर उसने अय्याशी में खर्च कर दिए थे। कर्ज चुकाने के लिए उसने अभिषेक के अपहरण की साजिश रची थी। एसपी ने बताया कि चार फरवरी को आरोपी शिवम ने अपनी प्रेमिका से मिलवाने की बात कहकर अभिषेक को आशीष के साथ तेरारब्बू गुरसहायगंज के जंगल में ले गया था। वहां पहले से उसके अन्य साथी मौजूद थे। वहां पर सभी ने अभिषेक की हत्या कर शव गड्ढे में गाड़ दिया था। 10 फरवरी के बाद आरोपियों ने गोपाल को फोन कर आठ लाख की फिरौती मांगने की बात कही थी। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। फिर उनकी निशानदेही पर शव बरामद किया था। एसपी ने गुडवर्क करने वाले सर्विलांस टीम प्रभारी शैलेंद्र सिंह और तिर्वा थाना प्रभारी टीपी वर्मा की टीम को 25 हजार रुपये से पुरस्कृत किया। वहीं, शिवम के भाई रोशन, मामा ध्रुव और लल्ली की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
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छात्र अभिषेक को शिवम और आशीष बाइक से सबसे पहले जंगल ले गए। वहां साजिश के तहत आरोपी पहले से ही शव दबाने के लिए गड्ढा खोदकर कर खड़े थे। इसके बाद शिवम ने अभिषेक को अपहरण करने बात कहीं। रामजी सबसे पहले तमंचे की बट मारकर अभिषेक को घायल कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने घायल अभिषेक की आवाज मोबाइल में रिकार्ड करने के लिए उससे कहा कि वह बोले कि मेरा अपहरण हो गया है, ये लोग उसे मार रहे हैं, इनको आठ लाख रुपये दे दो, नहीं तो ये जान से मार देंगे। अभिषेक ने जब यह बोलने से मना किया, तो लल्ली ने चाकू से उसका गला काटकर अलग कर दिया। इसके बाद गड्ढे में शव दबा दिया।
आरोपी रामजी तिर्वा कस्बा में एक फोटोकॉपी की दुकान पर नौकरी करता है। अक्सर सभी आरोपी उसकी दुकान पर इकट्टा होते थे। यहां बैठकर सभी ने अपहरण की साजिश रची। मुख्य आरोपी शिवम अक्सर अभिषेक के घर जाता था। अभिषेक के पापा लोगों का इलाज करते थे। इससे शिवम को जानकारी थी कि अभिषेक के पापा गोपाल के पास काफी पैसा है। इसलिए उसने फिरौती के लिए अभिषेक के अपहरण की साजिश रची थी। साजिश रचने के बाद श्यामजी रिश्तेदारी चला गया था, लेकिन वह फोन कर घटना की पूरी जानकारी करता रहा।
आरोपियों ने बड़ी चालाकी से अपहरण की साजिश रची थी। जल्द से जल्द फिरौती की रकम मिल सके। इसलिए खून से लथपथ अभिषेक का वीडियो बनाने का आरोपी प्रयास कर रहे थे। तैयारी यह थी कि फर्जी सिम के व्हाट्सएप से वीडियो रिकॉडिंग भेजकर फिरौती मांगी जाएगी। वीडियो न बनने के बाद सभी आरोपी शांत बैठकर पुलिस और अभिषेक के परिजनों की गतिविधियों पर नजर बनाए थे। सभी ने आपस में तय कर लिया था कि अगर कोई अभिषेक के बारे पूछे, तो बता देना नोएडा जाने की बात कह रहा था। इसके बाद आरोपियों ने 10 फरवरी को गोपाल को फोन कर बताया कि अभिषेक नोएडा में फंसा है। आठ लाख रुपये दे दो। वह नोएडा जाकर अभिषेक को रुपये देकर साथ ले आएंगे।
अपहरण के बाद हत्या के छठे दिन अगर आरोपी फोन कर फिरौती की मांग न करते, तो उनकी गिरफ्तारी मुश्किल थी। लापता के होने के बाद पुलिस मामले को हल्के में ले रही थी, लेकिन फिरौती की कॉल आने के बाद ही पुलिस हरकत में आई और आरोपियों तक पहुंच गई।

चार फरवरी को आरोपियों ने अभिषेक का अपहरण कर लिया था। इसके बाद उसकी हत्या कर दी थी। हत्या के बाद आरोपियों में पुलिस कार्रवाई का खौफ पैदा हो गया था। आरोपी श्याम सुंदर और रामजी ने मामले की चर्चा न करने और फिरौती न मांगने की बात कही। ताकि किसी को कुछ पता न चल सके, लेकिन पुलिस की ओर से कार्रवाई न होने पर 10 फरवरी की दोपहर एक बार फिर सभी आरोपियों ने आपस में मीटिंग की। इसमें शिवम ने फिर से फिरौती की रकम को बांटने का लालच दिया। इस पर सभी सहमत हो गए और गोपाल को फोन कर फिरौती मांग बैठे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर फिरौती की बात सामने न आती, तो आरोपियों की गिरफ्तारी मुश्किल थी।
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