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Kannauj News: साधारण प्रसव के लिए चार से पांच हजार की वसूली
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कन्नौज। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निशुल्क सुविधाएं देने के दावों के बावजूद शोषण हो रहा है। विनोद दीक्षित अस्पताल के महिला विंग में गर्भवतियों के परिजनों से प्रसव कराने के नाम पर वसूली की जा रही है। सामान्य प्रसव के लिए चार से पांच हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं।
शिशु जननी सुरक्षा कार्यक्रम के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जाता है। इसके लिए हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं और प्रसूताओं को प्रोत्साहन राशि मिलती है। हालांकि, सरकारी अस्पताल में सामान्य प्रसव होने पर भी रुपये लिए जाते हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर ऑपरेशन नहीं होते, फिर भी इतनी बड़ी धनराशि ली जाती है। तीमारदार अक्सर इस वसूली से नाराज होते हैं। कई बार शिकायतें की गईं लेकिन जिम्मेदार अधिकारी रुपये लिए जाने से इन्कार करते हैं।
केस एक :
11 अक्तूबर 2025 को अलाउद्दीनपुर निवासी मोनी का विनोद दीक्षित अस्पताल में साधारण प्रसव हुआ था। प्रसव के नाम पर तीमारदारों से पांच हजार रुपये लिए गए। इसके बाद मोनी की हालत बिगड़ गई थी। अस्पताल में डॉक्टर न होने के कारण उन्हें जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और फिर कानपुर रेफर किया गया।
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केस दो :
12 जुलाई को चौधरियापुर निवासी अंशिका को प्रसव पीड़ा होने पर विनोद दीक्षित के महिला विंग लाया गया। वहां प्रसव के लिए पांच हजार रुपये की मांग की गई। अंशिका ने साधारण प्रसव से बेटे को जन्म दिया। परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों को 2500 रुपये दिए, पर वे नहीं माने। आखिर में 100 रुपये भर्ती शुल्क के नाम पर लिए गए।
वर्जन
सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को निशुल्क सुविधाएं दी जाती हैं। अगर मरीजों या उनके तीमारदारों से धनराशि ली जाती है तो कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. विकास चंद्रा, सीएमओ
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शिशु जननी सुरक्षा कार्यक्रम के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जाता है। इसके लिए हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं और प्रसूताओं को प्रोत्साहन राशि मिलती है। हालांकि, सरकारी अस्पताल में सामान्य प्रसव होने पर भी रुपये लिए जाते हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर ऑपरेशन नहीं होते, फिर भी इतनी बड़ी धनराशि ली जाती है। तीमारदार अक्सर इस वसूली से नाराज होते हैं। कई बार शिकायतें की गईं लेकिन जिम्मेदार अधिकारी रुपये लिए जाने से इन्कार करते हैं।
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केस एक :
11 अक्तूबर 2025 को अलाउद्दीनपुर निवासी मोनी का विनोद दीक्षित अस्पताल में साधारण प्रसव हुआ था। प्रसव के नाम पर तीमारदारों से पांच हजार रुपये लिए गए। इसके बाद मोनी की हालत बिगड़ गई थी। अस्पताल में डॉक्टर न होने के कारण उन्हें जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और फिर कानपुर रेफर किया गया।
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केस दो :
12 जुलाई को चौधरियापुर निवासी अंशिका को प्रसव पीड़ा होने पर विनोद दीक्षित के महिला विंग लाया गया। वहां प्रसव के लिए पांच हजार रुपये की मांग की गई। अंशिका ने साधारण प्रसव से बेटे को जन्म दिया। परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों को 2500 रुपये दिए, पर वे नहीं माने। आखिर में 100 रुपये भर्ती शुल्क के नाम पर लिए गए।
वर्जन
सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को निशुल्क सुविधाएं दी जाती हैं। अगर मरीजों या उनके तीमारदारों से धनराशि ली जाती है तो कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. विकास चंद्रा, सीएमओ