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अलाव के नाम सिर्फ कागजी कोरम
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज
Updated Wed, 24 Dec 2014 12:00 AM IST
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जिले में एक ओर जहां कोहरे का कहर जारी है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अफसर भी अलाव के नाम पर लोगों पर कम कहर नहीं बरपा रहे हैं। ठंड से ठिठुरते लोगों को राहत के नाम पर अलाव की व्यवस्था में सिर्फ कागजी कोरम पूरा किया जा रहा है।
कहीं अलाव में लकड़ी गीली होने से सिर्फ धुंआ निकल रहा है तो कहीं वह भी नहीं। लोग कूडा और प्लास्टिक की पन्नियां जलाकर तापने को मजबूर हैं। फिलहाल मंगलवार को न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 17.8 डिग्री सेल्सियस रहा।
शहर में अलाव जलवाने में नगर पालिका प्रशासन लापरवाही बरत रहा है। इसकी झलक मंगलवार रात देखने को मिली। भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित रोडवेज बस स्टेसन पर अलाव जलाने के लिए गीली लकड़ी डालकर नगर पालिका कर्मी रफूचक्कर हो गए।
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आसपास के लोगों ने टोका तो यह कहकर चले गए कि सूखी लकड़ी कहीं तलाशने पर भी पालिका को नहीं मिल रही है। जो मिल रही है उसी से काम चलाओ। इस कारण मजबूरी में गीली लकड़ी के सहारे अलाव जलाने की कोशिश की जाती रही। इससे आग की लपटें कम धुंआ ज्यादा निकलता रहा।
बस स्टाप पर मौजूद महेंद्र यादव ने कहा कि नगर पालिका अलाव जलवाने में लापरवाही बरत रहा है। कई बार कहे जाने पर भी गीली लकड़ी ही डाली जा रही है। यह लकड़ी लाख कोशिश करने पर भी नहीं जलती। इसी तरह रेलवे स्टेशन पर भी अलाव जलवाने के नाम पर रस्म निभाई जा रही है। कभी लकड़ी डाल दी जाती है तो कभी कोई लकड़ी लेकर पहुंचता ही नहीं है।
तिर्वा रोड पर औरैया व इटावा जाने वाले यात्रियों का पूरे दिन आवागमन होता है। यहां भारी भीड़ रहती है पर अलाव जलवाने की व्यवस्था बस-टेंपो स्टेंड पर नहीं की गई है। ठंड से बचने के लिए लोग कूड़ा करकट व पालीथीन जलाकर तापने को मजबूर हैं।
लोहिया चौराहे पर अलाव जलवाने के लिए लकड़ी तो डाल दी गईं, लेकिन उसे जलाया नहीं गया। बताया गया कि यहां पुलिस वाले लकड़ी डलवाते हैं। इसलिए जब पुलिस आती है तभी अलाव जलता है। मंगलवार को पुलिस कर्मी इधर-उधर होने के कारण अलाव नहीं जला।
वहीं जीटी रोड किनारे धर्मशाला के बाहर पुलिस के बैठने के कारण अलाव के लिए सूखी लकड़ी दी जाती है। उधर पालिका व तहसील प्रशासन यह कहकर बचाव कर रहा है कि अलाव के लिए सूखी लकड़ी भी डाली जाती है, लेकिन अराजकतत्व उसे उठाकर घर लेकर चले जाते हैं।
ठंड ज्यादा पड़ रही है। इससे बचाव के लिए अलाव जलवाने की व्यवस्था में सुधार कराएंगे। प्रयास किया जाएगा कि सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलवाने के लिए पर्याप्त सूखी लकड़ी भेजी जाए। रेलवे बस स्टेशन के पास अलाव के लिए जो लकड़ी डाली गई उसे लोग उठा ले गए होंगे। वे छानबीन कराकर अलाव जलवाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराएंगे।
-सुनील शुक्ला, एसडीएम सदर कन्नौज।
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राहत को आगे नहीं आए जनप्रतिनिधि
अलाव जलवाने के मुद्दे पर जनप्रतिनिधि उदासीन रवैया अपनाए हैं। यही वजह है कि अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने आगे आकर अलाव जलवाने की प्रशासन की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवाज नहीं उठाई है। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी के कारण प्रशासनिक अधिकारी भी निष्क्रियता अपनाए हैं। जनप्रतिनिधियों ने अपने स्तर से भी अलाव जलवाने की पहल नहीं की है।
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ठंड से बचाने को कब आएंगे समाजसेवी
जिला मुख्यालय पर अभी तक समाजसेवियों के स्तर से लोगों को ठंड से बचाने के लिए इस साल अभी तक कोई पहल नहीं शुरु की गई है। इस कारण गरीब तबके के लोग उनकी तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। बीते वर्ष कन्नौज शहर के तमाम समाजसेवियों ने अलाव जलवाए थे।
जगह-जगह चाय बटवाई थी। कंबल व कपड़े बंटवाए थे, पर इस बार पता नहीं क्यों अभी तक किसी समाजसेवी व्यक्ति या सामाजिक संस्था ने गरीबों को ठंड से बचाने में मदद करने की शुरुआत नहीं की है।
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कहीं अलाव में लकड़ी गीली होने से सिर्फ धुंआ निकल रहा है तो कहीं वह भी नहीं। लोग कूडा और प्लास्टिक की पन्नियां जलाकर तापने को मजबूर हैं। फिलहाल मंगलवार को न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 17.8 डिग्री सेल्सियस रहा।
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शहर में अलाव जलवाने में नगर पालिका प्रशासन लापरवाही बरत रहा है। इसकी झलक मंगलवार रात देखने को मिली। भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित रोडवेज बस स्टेसन पर अलाव जलाने के लिए गीली लकड़ी डालकर नगर पालिका कर्मी रफूचक्कर हो गए।
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आसपास के लोगों ने टोका तो यह कहकर चले गए कि सूखी लकड़ी कहीं तलाशने पर भी पालिका को नहीं मिल रही है। जो मिल रही है उसी से काम चलाओ। इस कारण मजबूरी में गीली लकड़ी के सहारे अलाव जलाने की कोशिश की जाती रही। इससे आग की लपटें कम धुंआ ज्यादा निकलता रहा।
बस स्टाप पर मौजूद महेंद्र यादव ने कहा कि नगर पालिका अलाव जलवाने में लापरवाही बरत रहा है। कई बार कहे जाने पर भी गीली लकड़ी ही डाली जा रही है। यह लकड़ी लाख कोशिश करने पर भी नहीं जलती। इसी तरह रेलवे स्टेशन पर भी अलाव जलवाने के नाम पर रस्म निभाई जा रही है। कभी लकड़ी डाल दी जाती है तो कभी कोई लकड़ी लेकर पहुंचता ही नहीं है।
तिर्वा रोड पर औरैया व इटावा जाने वाले यात्रियों का पूरे दिन आवागमन होता है। यहां भारी भीड़ रहती है पर अलाव जलवाने की व्यवस्था बस-टेंपो स्टेंड पर नहीं की गई है। ठंड से बचने के लिए लोग कूड़ा करकट व पालीथीन जलाकर तापने को मजबूर हैं।
लोहिया चौराहे पर अलाव जलवाने के लिए लकड़ी तो डाल दी गईं, लेकिन उसे जलाया नहीं गया। बताया गया कि यहां पुलिस वाले लकड़ी डलवाते हैं। इसलिए जब पुलिस आती है तभी अलाव जलता है। मंगलवार को पुलिस कर्मी इधर-उधर होने के कारण अलाव नहीं जला।
वहीं जीटी रोड किनारे धर्मशाला के बाहर पुलिस के बैठने के कारण अलाव के लिए सूखी लकड़ी दी जाती है। उधर पालिका व तहसील प्रशासन यह कहकर बचाव कर रहा है कि अलाव के लिए सूखी लकड़ी भी डाली जाती है, लेकिन अराजकतत्व उसे उठाकर घर लेकर चले जाते हैं।
ठंड ज्यादा पड़ रही है। इससे बचाव के लिए अलाव जलवाने की व्यवस्था में सुधार कराएंगे। प्रयास किया जाएगा कि सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलवाने के लिए पर्याप्त सूखी लकड़ी भेजी जाए। रेलवे बस स्टेशन के पास अलाव के लिए जो लकड़ी डाली गई उसे लोग उठा ले गए होंगे। वे छानबीन कराकर अलाव जलवाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराएंगे।
-सुनील शुक्ला, एसडीएम सदर कन्नौज।
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राहत को आगे नहीं आए जनप्रतिनिधि
अलाव जलवाने के मुद्दे पर जनप्रतिनिधि उदासीन रवैया अपनाए हैं। यही वजह है कि अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने आगे आकर अलाव जलवाने की प्रशासन की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवाज नहीं उठाई है। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी के कारण प्रशासनिक अधिकारी भी निष्क्रियता अपनाए हैं। जनप्रतिनिधियों ने अपने स्तर से भी अलाव जलवाने की पहल नहीं की है।
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ठंड से बचाने को कब आएंगे समाजसेवी
जिला मुख्यालय पर अभी तक समाजसेवियों के स्तर से लोगों को ठंड से बचाने के लिए इस साल अभी तक कोई पहल नहीं शुरु की गई है। इस कारण गरीब तबके के लोग उनकी तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। बीते वर्ष कन्नौज शहर के तमाम समाजसेवियों ने अलाव जलवाए थे।
जगह-जगह चाय बटवाई थी। कंबल व कपड़े बंटवाए थे, पर इस बार पता नहीं क्यों अभी तक किसी समाजसेवी व्यक्ति या सामाजिक संस्था ने गरीबों को ठंड से बचाने में मदद करने की शुरुआत नहीं की है।