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Kannauj News: छह साल पहले अधिगृहीत जमीन पर बनी दुकानों पर गरजा बुलडोजर

Thu, 20 Jun 2024 02:01 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jun 2024 02:01 AM IST
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Bulldozers roared at shops built on land acquired six years ago
छिबरामऊ। नेशनल हाईवे चौड़ीकरण के लिए छह साल पहले पूर्वी बाईपास पर अधिगृहीत की गई जमीन पर बनी दुकानों को लेकर दुकान मालिकों ने एनएचएआई के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे का आदेश ले रखा था। नेशनल हाईवे के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए हाईकोर्ट ने स्टे खारिज कर दिया। बुधवार को प्रशासन ने इन सभी बहुमंजिला दुकानों को ध्वस्त कराकर खाली हुई जमीन एनएचएआई के सुपुर्द कर दी।
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नगर के पूर्वी बाईपास पर नेशनल हाईवे के किनारे लंबे अर्से से कई लोग दुकानें बनाकर कारोबार कर रहे थे। हाईवे चौड़ीकरण के दौरान पूर्वी बाईपास पर जंक्शन निर्माण के लिए एनएचएआई ने इन दुकानों की जमीन को अधिगृहीत कर लिया था। इनमें से कुछ लोगों ने मुआवजा ले लिया था और कुछ लोगों ने मुआवजा लेने से मना करते हुए पहले सिविल कोर्ट, उसके बाद हाईकोर्ट की शरण ले ली थी।
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हाईकोर्ट ने 31 मई को स्टे आर्डर को खारिज करते हुए नेशनल हाईवे के पक्ष में फैसला सुना दिया। इसके बाद पिछले कई सालों से शांत दिख रहे एनएचएआई के अफसर हरकत में आ गए और हाईकोर्ट के निर्णय की जानकारी देते हुए डीएम शुभ्रांत शुक्ला से मिलकर जमीन खाली कराए जाने की मांग की।
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डीएम के निर्देश पर बुधवार को सुबह करीब छह बजे एसडीएम उमाकांत तिवारी, सीओ ओमकार नाथ शर्मा, नायब तहसीलदार भरत मौर्या, एसडीओ रवींद्र कुमार समेत राजस्व, पुलिस, फायर ब्रिगेड व एनएचएआई के टेक्निकल मैनेजर अजय सिंह व साइड इंजीनियर आकाश विक्रम सिंह के साथ पूर्वी बाईपास पर पहुंच गए। इन दुकानों के बिजली कनेक्शन कटवाने के बाद जेसीबी ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। लगभग चार घंटे चली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में 16 दो मंजिला दुकानें जमींदोज की गईं। इस दौरान पूर्वी बाईपास पर तमाशबीनों की भीड़ लगी रही, जिन्हें खदेड़ने के लिए पुलिस कर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी।


पुलिस ने मंगलवार की देर शाम ही अतिक्रमणकारियों को अपने कब्जे हटा लेने की चेतावनी दे दी थी। पुलिस ने 18 लोगों के खिलाफ 107/116 की कार्रवाई भी कर दी थी। बुधवार को माहौल बिगड़ने की आशंका के चलते छिबरामऊ कोतवाली के सभी चौकी इंचार्ज समेत सौरिख, सकरावा, गुरसहायगंज, विशुनगढ़, एक प्लाटून पीएसी, फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां, हाईवे की तीन एंबुलेंस भी मौजूद रहीं। पुलिस बल की मौजूदगी में कोई भी विरोध की हिम्मत नहीं जुटा सका।



इनसेट

एटीएम से कैश निकलवाने के बाद ढहाई दुकान

पूर्वी बाईपास पर अमित दीक्षित उर्फ मोनू ने अपनी दुकान में एक निजी कंपनी का एटीएम लगवा रखा है। साथ ही वह यहां पर बैंक ऑफ इंडिया की मिनी बैंक व जन सेवा केंद्र भी चलाते हैं। दुकानों को ध्वस्त करती जब जेसीबी अमित दीक्षित की दुकान के सामने पहुंची तो अमित ने एसडीएम को बताया कि एटीएम में करीब छह से सात लाख रुपये हैं। एसडीएम ने मशीन रुकवा दी। कुछ देर निजी कंपनी के इंजीनियरों के आने के बाद एटीएम से कैश निकलवाया। इसके बाद क्रेन से भारी एटीएम को उठवाकर सुरक्षित स्थान पर रखवाया गया। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान प्रशासन ड्रोन कैमरे से आसपास के इलाके की हलचल का जायजा लेते रहे।


इनसेट

फोटो:27 कार्रवाई के दौरान दूसरी लेन पर लगा जाम। संवाद

एक लेन बंद होने से रही जाम की स्थिति

कार्रवाई शुरू करने से पहले ही तालग्राम तिराहे पर पीएसी की बस को मुख्य मार्ग की एक लेन पर तिरछा खड़ी कराकर आवागमन बंद करा दिया गया था। एक लेन से आने तथा जाने वाले वाहनों व सड़क पर मौजूद भीड़ के कारण लगभग चार घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही। जाम के चलते भीषण गर्मी में वाहन सवार परेशान रहे।


इनसेट

मुआवजे के लिए करें कार्यालय में संपर्क
एसडीएम उमाकांत तिवारी ने बताया कि नेशनल हाईवे चौड़ीकरण के लिए अधिगृहीत की गई दुकानों की जमीन के लिए एनएचएआई ने करीब पांच करोड़ रुपये मुआवजा स्वीकृत किया था। कुछ दुकानदार लगभग ढाई करोड़ रुपये का मुआवजा ले चुके हैं। जिन लोगों ने उस समय मुआवजा नहीं लिया था, वे सभी अपने अभिलेखों के साथ भू अध्याप्ति कार्यालय कानपुर में संपर्क कर मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं।




बिना नोटिस प्रशासन ने की एक पक्षीय कार्रवाई

अधिगृहण की जद में आलोक दुबे, सालोक दुबे व अविनाश दुबे की 21 दुकानें भी ध्वस्त कर दी गईं। आलोक ने बताया कि बिना मुआवजे के जमीन खाली कराने का नियम नहीं है। इसके बाद भी उनके खिलाफ प्रशासन ने एक पक्षीय कार्रवाई की। दुकानदारों को दुकानों के अंदर रखा सामान भी निकालने का मौका नहीं दिया गया था, जिस कारण लाखों रुपये का सामान मलबे में दबकर बर्बाद हो गया।
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