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‘मित्र बहुत होते पर सखा होता है एक’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Thu, 04 Feb 2016 11:59 PM IST
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श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से आए बाल व्यास आचार्य माधव दीक्षित ने
गुरुवार को सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा न ही निर्धन था
और न ही वह ब्रह्मण था।
कहा कि भागवत महापुराण में सुदामा का कहीं भी नाम नहीं है, बल्कि सखा नाम आया है। मित्र बहुत होते हैं, पर सखा एक ही होता है। कहा कि भगवान कृष्ण ही सुदामा के द्वार पर भिक्षा मांगने गए थे, पर सुदामा कृष्ण द्वारिका में कोई कामना लेकर नहीं गए थे। उनके मन में केवल एक ही भाव था कि उन्हें मित्र से मिलना है।
सुदामा निष्काम थे इसलिए प्रभु श्रीकृष्ण ने अपने समान धन संपत्ति उन्हें दी। कहा कि सुदामा निर्धन नहीं था और न ही वह ब्रह्मण था। निर्धन वह होता है जिसको संतोष नहीं होता है। कहा कि गोधन, गजधन, वाजिधन और रतन धन खान, जब आवै संतोष धन, सब धन धूरि समान। श्रीकृष्ण ने सुदामा को इसलिए मित्र बनाया। कहा कि भगवान सदा उसी पर कृपा करते हैं, जो धन परमात्मा को मानता है। कथा के दौरान कई संगीतमयी भजन भी पेश किए गए।
कहा कि भागवत महापुराण में सुदामा का कहीं भी नाम नहीं है, बल्कि सखा नाम आया है। मित्र बहुत होते हैं, पर सखा एक ही होता है। कहा कि भगवान कृष्ण ही सुदामा के द्वार पर भिक्षा मांगने गए थे, पर सुदामा कृष्ण द्वारिका में कोई कामना लेकर नहीं गए थे। उनके मन में केवल एक ही भाव था कि उन्हें मित्र से मिलना है।
सुदामा निष्काम थे इसलिए प्रभु श्रीकृष्ण ने अपने समान धन संपत्ति उन्हें दी। कहा कि सुदामा निर्धन नहीं था और न ही वह ब्रह्मण था। निर्धन वह होता है जिसको संतोष नहीं होता है। कहा कि गोधन, गजधन, वाजिधन और रतन धन खान, जब आवै संतोष धन, सब धन धूरि समान। श्रीकृष्ण ने सुदामा को इसलिए मित्र बनाया। कहा कि भगवान सदा उसी पर कृपा करते हैं, जो धन परमात्मा को मानता है। कथा के दौरान कई संगीतमयी भजन भी पेश किए गए।