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तत्कालीन एसडीएम व दो तहसीलदारों सहित आठ पर रिपोर्ट
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छिबरामऊ। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे में अधिग्रहित की गई जमीन में सर्किल रेट के चार गुना के बजाय 25 लाख प्रति हेक्टेयर का चार गुना मुआवजा दिया गया। एसडीएम छिबरामऊ और अधिशासी अभियंता लोक निर्माण की संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार अभिमन्यु कुमार ने घोटाले के समय के तत्कालीन एसडीएम, दो तत्कालीन तहसीलदार, तत्कालीन नायब तहसीलदार, तत्कालीन उप निबंधक, लेखपाल सहित आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। एक्सप्रेस वे के लिए जमीन अधिग्रहण 2014 में हुआ था। 2017 में शिकायतों के बाद मामले की जांच शुरू हुई। फरवरी 2021 में जांच रिपोर्ट आने के बाद अब रिपोर्ट दर्ज हुई है।
छिबरामऊ के तहसीलदार अभिमन्यु कुमार ने बताया कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए ग्राम बहादुर मझिगवां निवासी राजेश कुमार पुत्र रामेश्वर दयाल की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उन्हें सर्किल रेट 19 लाख प्रति हेक्टेयर के चार गुने की जगह 25 लाख प्रति हेक्टेयर के चार गुने की दर से 24,30000 का भुगतान किया है। राजेश को पांच लाख 73 हजार 73 हजार 600 रुपये का अधिक भुगतान हुआ।
वहीं इसी तरह एक दूसरे मामले में इसी तरह ग्राम बहादुर मझिगवां की एक भूमि पर सह खातेदार केसर देवी पत्नी देवकीनंदन निवासी गढ़िया मौजा बहादुरपुर मझिगवां को भी 19 लाख प्रति हेक्टयर के चार गुने की जगह 90 लाख प्रति हेक्टेयर के चार गुने की दर से 3312000 रुपये का भुगतान किया गया। केसर देवी को 26 लाख 12 हजार आठ रुपये रुपये का अधिक भुगतान हुआ।
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मामले में तत्कालीन लेखपाल अरुण कुमार, तत्कालीन नायब तहसीलदार अवनीश कुमार, तत्कालीन तहसीलदार शिवनरायन पांडेय व ऋषिकांत राजवंशी, तत्कालीन उप निबंधक प्रद्युम्न सिंह, विक्त्रस्ेता राजेश कुमार व केसर देवी के खिलाफ धारा 420, 406, 467, 468, 471 व 120बी के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा इस तरह के करीब 61 मामलों की जांच कर रही है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे में जमीन अधिग्रहण घोटाले के आरोपी तत्कालीन तहसीलदार ऋषिकांत राजवंशी पदोन्नति पाकर एसडीएम बन चुके हैं और नायब तहसीलदार अवनीश कुमार पदोन्नत होकर तहसीलदार बन चुके हैं और वर्तमान में रामपुर में तैनात हैं। इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम उदयवीर सिंह की कोरोना काल में मौत हो चुकी है। जबकि तत्कालीन तहसीलदार शिवनरायन पांडेय सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस मामले की जांच अब प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार मिश्रा को सौंपी गई है।
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छिबरामऊ के तहसीलदार अभिमन्यु कुमार ने बताया कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए ग्राम बहादुर मझिगवां निवासी राजेश कुमार पुत्र रामेश्वर दयाल की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उन्हें सर्किल रेट 19 लाख प्रति हेक्टेयर के चार गुने की जगह 25 लाख प्रति हेक्टेयर के चार गुने की दर से 24,30000 का भुगतान किया है। राजेश को पांच लाख 73 हजार 73 हजार 600 रुपये का अधिक भुगतान हुआ।
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वहीं इसी तरह एक दूसरे मामले में इसी तरह ग्राम बहादुर मझिगवां की एक भूमि पर सह खातेदार केसर देवी पत्नी देवकीनंदन निवासी गढ़िया मौजा बहादुरपुर मझिगवां को भी 19 लाख प्रति हेक्टयर के चार गुने की जगह 90 लाख प्रति हेक्टेयर के चार गुने की दर से 3312000 रुपये का भुगतान किया गया। केसर देवी को 26 लाख 12 हजार आठ रुपये रुपये का अधिक भुगतान हुआ।
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मामले में तत्कालीन लेखपाल अरुण कुमार, तत्कालीन नायब तहसीलदार अवनीश कुमार, तत्कालीन तहसीलदार शिवनरायन पांडेय व ऋषिकांत राजवंशी, तत्कालीन उप निबंधक प्रद्युम्न सिंह, विक्त्रस्ेता राजेश कुमार व केसर देवी के खिलाफ धारा 420, 406, 467, 468, 471 व 120बी के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा इस तरह के करीब 61 मामलों की जांच कर रही है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे में जमीन अधिग्रहण घोटाले के आरोपी तत्कालीन तहसीलदार ऋषिकांत राजवंशी पदोन्नति पाकर एसडीएम बन चुके हैं और नायब तहसीलदार अवनीश कुमार पदोन्नत होकर तहसीलदार बन चुके हैं और वर्तमान में रामपुर में तैनात हैं। इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम उदयवीर सिंह की कोरोना काल में मौत हो चुकी है। जबकि तत्कालीन तहसीलदार शिवनरायन पांडेय सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस मामले की जांच अब प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार मिश्रा को सौंपी गई है।