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इंसान जैसी फितरत भी बनाएं- बाबा हरदेव
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Wed, 08 Apr 2015 12:30 AM IST
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सिर्फ इंसान के रूप मे पैदा होना ही काफी नहीं है, बल्कि फितरत भी इंसानी बनानी होगी। तभी इंसान मानवीय गुणों की कद्र करेगा और दिव्य गुणों से युक्त होगा। यह विचार निरंकारी सद्गुरु बाबा हरदेव महाराज ने व्यक्त किए। मंगलवार को वह केके इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित संत समागम में प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि धरती में इनसानी जिस्म तो बहुत हैं परंतु यदि इंसानियत भी होती तो यह धरती कब की स्वर्ग बन जाती। अपना मूल पहचानें व नेकियों से युक्त हो जाएं। जिस्मानी मृत्यु से पहले अहंकार को मारना होगा। खुदगर्जियों, लालसाओं को समाप्त करना होगा। सांसें कीमती हैं। इसलिए इनकी कदर करें और ईश्वर बोध करके अपना जीवन सार्थक करें।
उन्होंने कहा कि आजकल जिन में चलना भी दूभर हो गया है। व्यस्त मार्गों में भी दिन दहाड़े लूटें हो जाती हैं। क्योंकि लोग गफलत की गहरी नींद में सो रहा है। सत्य का पैगाम मनुष्य को ही दिया जाता है, पशु पक्षियों को नहीं। जब तक ईश्वर की अनुभूति नहीं होगी तब तक मानव जीवन में क्रांति घटित नहीं हो सकती। संसार को महत्व देने वाले का कल्याण नहीं हो सकता।
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बाबा जी ने कहा कि जब व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से जागरूक हो जाता है तो कृतज्ञता के भाव में जीने लगता है। मैं के स्थान पर तू अर्थात परमात्मा का ही यशोगान करने लगता है। दया, करुणा, विनम्रता के भाव से युक्त होकर आनंदमय जीवन व्यतीत करने लगता है।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय शाखा के मुखी राजाराम, जोनल इंचार्ज सुशील पुरी, कानपुर के सेवादल के क्षेत्रीय संचालक रमेश चंदर, संजय अरोड़ा, संचालक मोहन छाबड़ा, जेएस बिंद्रा, आनंद वाजपेयी, स्थानीय सेवादल इंचार्ज ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान किया। मंच का संचालन मीडिया प्रभारी गुलशन अरोड़ा ने किया।
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उन्होंने कहा कि धरती में इनसानी जिस्म तो बहुत हैं परंतु यदि इंसानियत भी होती तो यह धरती कब की स्वर्ग बन जाती। अपना मूल पहचानें व नेकियों से युक्त हो जाएं। जिस्मानी मृत्यु से पहले अहंकार को मारना होगा। खुदगर्जियों, लालसाओं को समाप्त करना होगा। सांसें कीमती हैं। इसलिए इनकी कदर करें और ईश्वर बोध करके अपना जीवन सार्थक करें।
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उन्होंने कहा कि आजकल जिन में चलना भी दूभर हो गया है। व्यस्त मार्गों में भी दिन दहाड़े लूटें हो जाती हैं। क्योंकि लोग गफलत की गहरी नींद में सो रहा है। सत्य का पैगाम मनुष्य को ही दिया जाता है, पशु पक्षियों को नहीं। जब तक ईश्वर की अनुभूति नहीं होगी तब तक मानव जीवन में क्रांति घटित नहीं हो सकती। संसार को महत्व देने वाले का कल्याण नहीं हो सकता।
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बाबा जी ने कहा कि जब व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से जागरूक हो जाता है तो कृतज्ञता के भाव में जीने लगता है। मैं के स्थान पर तू अर्थात परमात्मा का ही यशोगान करने लगता है। दया, करुणा, विनम्रता के भाव से युक्त होकर आनंदमय जीवन व्यतीत करने लगता है।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय शाखा के मुखी राजाराम, जोनल इंचार्ज सुशील पुरी, कानपुर के सेवादल के क्षेत्रीय संचालक रमेश चंदर, संजय अरोड़ा, संचालक मोहन छाबड़ा, जेएस बिंद्रा, आनंद वाजपेयी, स्थानीय सेवादल इंचार्ज ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान किया। मंच का संचालन मीडिया प्रभारी गुलशन अरोड़ा ने किया।