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शीतगृहों में फेंकने की नौबत पर आलू
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज।
Updated Sun, 20 Nov 2016 11:50 PM IST
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कन्नौज के बर्तन बाजार में पसरा सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
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सेंट्रल यूपी में जिले में सबसे अधिक आलू की पैदावार है। नोट बंदी का असर सबसे अधिक आलू की फसल पर है। दूसरी मंडियों के व्यापारियों के शीतगृहों से गायब हो जाने व पुराने नोट चलन से बाहर होने से बाहरी मंडियों में भी डिमांड कम हो गई है। जिस कारण किसान शीतगृहों से आलू निकासी के लिए नहीं पहुंच रहा है। जिले के कुछ शीतगृहों से आलू के बीज फेंकने की भी खबर है। मौजूदा समय में करीब 10 से 15 फीसदी आलू अब भी भंडारित है। उद्यान विभाग ने कहा कि किसानों को निकासी के लिए नोटिस भेजा जाएगा।
मालूम हो कि पिछले दिनों आलू की मंडी में सफेद (चिप्सोना), पुखराज, पुष्कर, 3797 की प्रजातियों का आलू तीन सौ से साढ़े तीन सौ के आसपास बिका। नोट बंदी के फरमान के बाद आलू का भाव औंधे मुंह गिरा है। शीतगृह स्वामी आफ सीजन का लाभ लेने के लिए विद्युत विभाग को आवेदन भी कर चुके है। ऐसी स्थित में आलू को शीतगृह में अधिक दिनों तक भंडारित भी नहीं रखा जा सकता है। कुछ दिनों के बाद आलू सड़ने की कगार पर पहुंच जाएगा।
कुछ शीतगृहों ने बीज का आलू खराब होने के डर से बाहर भी निकलवा दिया है। शीतगृह मालिक आशीष कपूर का कहना है कि किसानों से लगातार संपर्क किया जा रहा है कि वह अपना आलू निकाल लें। यदि मंडी के भाव नहीं बढ़े तो आलू को गड्ढे खुदवाकर दबवाना पड़ेगा। जिसमें करीब प्रति पैकेट 20 से 22 रुपये तक खर्चा आएगा। इसके अलावा किराया भी डूबेगा। शीतगृह मालिक सोनी मिश्रा का कहना है मंडियों की स्थित डामाडोल है। व्यापारी भी आलू की खरीद के लिए नहीं आ रहे है।
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किसानों के नहीं आने की स्थित में पल्लेदारी व गड्ढा खुदवाने में भी खर्चा आएगा। जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने कहा कि जिन किसानों का शीतगृह में आलू रखा है। उनको चेतावनी नोटिस जारी की जाएगी। भवानीपुर अनौगी के आलू व्यापारी भानू पाठक, रमाकांत तिवारी का कहना है कि दिवाली पर आलू महंगा हुआ था। अब दूसरी मंडियों में आढ़ती आलू उतारने को तैयार नहीं हैं।
मालूम हो कि पिछले दिनों आलू की मंडी में सफेद (चिप्सोना), पुखराज, पुष्कर, 3797 की प्रजातियों का आलू तीन सौ से साढ़े तीन सौ के आसपास बिका। नोट बंदी के फरमान के बाद आलू का भाव औंधे मुंह गिरा है। शीतगृह स्वामी आफ सीजन का लाभ लेने के लिए विद्युत विभाग को आवेदन भी कर चुके है। ऐसी स्थित में आलू को शीतगृह में अधिक दिनों तक भंडारित भी नहीं रखा जा सकता है। कुछ दिनों के बाद आलू सड़ने की कगार पर पहुंच जाएगा।
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कुछ शीतगृहों ने बीज का आलू खराब होने के डर से बाहर भी निकलवा दिया है। शीतगृह मालिक आशीष कपूर का कहना है कि किसानों से लगातार संपर्क किया जा रहा है कि वह अपना आलू निकाल लें। यदि मंडी के भाव नहीं बढ़े तो आलू को गड्ढे खुदवाकर दबवाना पड़ेगा। जिसमें करीब प्रति पैकेट 20 से 22 रुपये तक खर्चा आएगा। इसके अलावा किराया भी डूबेगा। शीतगृह मालिक सोनी मिश्रा का कहना है मंडियों की स्थित डामाडोल है। व्यापारी भी आलू की खरीद के लिए नहीं आ रहे है।
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किसानों के नहीं आने की स्थित में पल्लेदारी व गड्ढा खुदवाने में भी खर्चा आएगा। जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने कहा कि जिन किसानों का शीतगृह में आलू रखा है। उनको चेतावनी नोटिस जारी की जाएगी। भवानीपुर अनौगी के आलू व्यापारी भानू पाठक, रमाकांत तिवारी का कहना है कि दिवाली पर आलू महंगा हुआ था। अब दूसरी मंडियों में आढ़ती आलू उतारने को तैयार नहीं हैं।