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Kannauj News: सात मिनट से कम के रिस्पांस टाइम से एंबुलेंस सेवा 11 सेकेंड पीछे
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कन्नौज। प्रदेश में एंबुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम सात मिनट से भी कम है। इत्रनगरी की एंबुलेंस सेवा का रिस्पॉन्स टाइम इससे महज 11 सेकेंड ही पीछे है। जनवरी में देखा जाए तो एंबुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम 7.19 मिनट था। विभाग का दावा है कि फरवरी में रिस्पॉन्स टाइम में आठ सेकंड की कमी आई और 7.11 सेकंड हो गया है। एंबुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम अगर और बेहतर हो जाए तो सड़क हादसों में दम तोड़ने वालों की संख्या में कमी लाई जा सकती है।
सड़क हादसों में घायल और अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को प्राथमिक इलाज उपलब्ध कराने के साथ सही समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए जिले में 108 की 24 एंबुलेंस हैं। एंबुलेंस के लिए जिले में 14 हॉट स्पॉट बनाए गए हैं। साथ ही अन्य एंबुलेंस सरकारी अस्पतालों में खड़ी रहती हैं, ताकि हादसे की जानकारी मिलते ही एंबुलेंस समय पर घटनास्थल पर पहुंच सकें। कई बार दूरी अधिक होने के चलते घटनास्थल पर एंबुलेंस के पहुंचने में समय लग जाता है। ऐसे में हादसे में घायल मरीज की जान जोखिम में पड़ जाती है।
इनसेट
14 माह 10 दिन में हुए हादसे और मौत
14 माह 10 दिनों में जिले में 599 सड़क हादसे हुए, जिसमें 645 लोग घायल हुए। 366 ने जान गंवाई। हादसों में दम तोड़ने वाले अधिकतर घायलों के सिर में चोट लगी थी। कई ऐसे घायल थे, जो समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके और उनकी जान चली गई।
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इनसेट
गोल्डन ऑवर में मिल जाए बेहतर इलाज
सीएमएस डॉ. शक्ति बसु ने बताया कि हादसे के बाद का एक घंटा सड़क हादसे में गंभीर घायल मरीज के लिए गोल्डन ऑवर होता है। इस दौरान अगर मरीज को बेहतर इलाज मिल जाता है तो उसकी जान बचाई जा सकती है। एंबुलेंस के समय पर पहुंचने और उसको अस्पताल पहुंचाने में अगर गोल्डन ऑवर निकल जाता है। इससे मरीज की जान जोखिम में पड़ जाती है। गुड सेमेरिटन पॉलिसी इसीलिए चलाई जा रही है कि अगर एंबुलेंस या पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने में देरी हो रही है तो वहां पर मौजूद व्यक्ति घायल को समय पर अस्पताल पहुंचा दे।
वर्जन
एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने के लिए 14 हॉट स्पॉट बनाए गए हैं, जहां पर एंबुलेंस उपलब्ध रहती है। सभी एंबुलेंस में जीपीएस सिस्टम लगा रहता है। एंबुलेंस के लिए कॉल आते ही घटनास्थल के आसपास जो भी एंबुलेंस होती है, उसे तुरंत मौके पर भेज दिया जाता है। कभी-कभी दूरी अधिक होने के कारण समय अधिक लग जाता है, जिस कारण रिस्पॉन्स टाइम बढ़ जाता है।
- विकास पटेल, प्रोग्राम मैनेजर, 102-108 एंबुलेंस
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सड़क हादसों में घायल और अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को प्राथमिक इलाज उपलब्ध कराने के साथ सही समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए जिले में 108 की 24 एंबुलेंस हैं। एंबुलेंस के लिए जिले में 14 हॉट स्पॉट बनाए गए हैं। साथ ही अन्य एंबुलेंस सरकारी अस्पतालों में खड़ी रहती हैं, ताकि हादसे की जानकारी मिलते ही एंबुलेंस समय पर घटनास्थल पर पहुंच सकें। कई बार दूरी अधिक होने के चलते घटनास्थल पर एंबुलेंस के पहुंचने में समय लग जाता है। ऐसे में हादसे में घायल मरीज की जान जोखिम में पड़ जाती है।
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14 माह 10 दिन में हुए हादसे और मौत
14 माह 10 दिनों में जिले में 599 सड़क हादसे हुए, जिसमें 645 लोग घायल हुए। 366 ने जान गंवाई। हादसों में दम तोड़ने वाले अधिकतर घायलों के सिर में चोट लगी थी। कई ऐसे घायल थे, जो समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके और उनकी जान चली गई।
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गोल्डन ऑवर में मिल जाए बेहतर इलाज
सीएमएस डॉ. शक्ति बसु ने बताया कि हादसे के बाद का एक घंटा सड़क हादसे में गंभीर घायल मरीज के लिए गोल्डन ऑवर होता है। इस दौरान अगर मरीज को बेहतर इलाज मिल जाता है तो उसकी जान बचाई जा सकती है। एंबुलेंस के समय पर पहुंचने और उसको अस्पताल पहुंचाने में अगर गोल्डन ऑवर निकल जाता है। इससे मरीज की जान जोखिम में पड़ जाती है। गुड सेमेरिटन पॉलिसी इसीलिए चलाई जा रही है कि अगर एंबुलेंस या पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने में देरी हो रही है तो वहां पर मौजूद व्यक्ति घायल को समय पर अस्पताल पहुंचा दे।
वर्जन
एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने के लिए 14 हॉट स्पॉट बनाए गए हैं, जहां पर एंबुलेंस उपलब्ध रहती है। सभी एंबुलेंस में जीपीएस सिस्टम लगा रहता है। एंबुलेंस के लिए कॉल आते ही घटनास्थल के आसपास जो भी एंबुलेंस होती है, उसे तुरंत मौके पर भेज दिया जाता है। कभी-कभी दूरी अधिक होने के कारण समय अधिक लग जाता है, जिस कारण रिस्पॉन्स टाइम बढ़ जाता है।
- विकास पटेल, प्रोग्राम मैनेजर, 102-108 एंबुलेंस