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मूंगफली मुनाफे की खेती, एक बीघे में 18 हजार की आमदनी
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तालग्राम। मूंगफली की फसल की बुआई के लिए फरवरी माह का उचित समय है। किसानों का कहना है कि इस फसल में लागत से छह गुने से अधिक फायदा मिलता है। एक बीघे में 18 से 19 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। इसी वजह से किसानों ने पिछले वर्ष काफी मात्रा में मूंगफली की खेती की थी।
गदोरा के किसान तेजराम, ताहपुर वीरेंद्र कुमार, सलेमपुर प्रमोद कुमार, पुखरांवा कुलदीप, गदनापुर के खुन्नूलाल का कहना है कि पिछली बार आलू कि खोदाई के बाद उन्होंने पहली बार मूंगफली की खेती शुरू की। 90 से 100 दिन में मूंगफली की फसल खेतों में तैयार हो गई। छह हजार रुपये क्विंटल तक बिक गई।
इस साल बार भी मूंगफली की पैदावार करेंगे। किसान बताते है कि प्रति बीघा तीन से साढ़े तीन हजार रुपये का खर्चा आता हैं। एक बीघा में साढे़ चार से पांच क्विंटल पैदावार हो जाती है। 18 से 19 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। एक बीघा में दस से 12 किलो बीज बोया जाता है। सिंचाई जमीन के ऊपर निर्भर रहती है। वैसे छह से सात सिंचाई की जरूरत पड़ती है।
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राजकीय बीज भंडार प्रभारी ब्लाक तालग्राम विनय कुमार शर्मा बताते हैं कि मूंगफली की खेती बीज पर निर्भर है। किसान मूंगफली का प्रमाणित बीज ही खरीदें। अंबर, चित्रा, कौशल, प्रकाश आदि वैरायटी के बीज बोआई कर अधिक पैदावार ले सकते हैं। साल में दो बार फरवरी-मार्च और जून-जुलाई में मूंगफली की बुआई की जा सकती है। इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी भूमि अच्छी है। अब किसानों का मूूंगफली की ओर रुझान बढ़ रहा है। कम लागत में अधिक मुनाफा की फसल है।
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गदोरा के किसान तेजराम, ताहपुर वीरेंद्र कुमार, सलेमपुर प्रमोद कुमार, पुखरांवा कुलदीप, गदनापुर के खुन्नूलाल का कहना है कि पिछली बार आलू कि खोदाई के बाद उन्होंने पहली बार मूंगफली की खेती शुरू की। 90 से 100 दिन में मूंगफली की फसल खेतों में तैयार हो गई। छह हजार रुपये क्विंटल तक बिक गई।
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इस साल बार भी मूंगफली की पैदावार करेंगे। किसान बताते है कि प्रति बीघा तीन से साढ़े तीन हजार रुपये का खर्चा आता हैं। एक बीघा में साढे़ चार से पांच क्विंटल पैदावार हो जाती है। 18 से 19 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। एक बीघा में दस से 12 किलो बीज बोया जाता है। सिंचाई जमीन के ऊपर निर्भर रहती है। वैसे छह से सात सिंचाई की जरूरत पड़ती है।
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राजकीय बीज भंडार प्रभारी ब्लाक तालग्राम विनय कुमार शर्मा बताते हैं कि मूंगफली की खेती बीज पर निर्भर है। किसान मूंगफली का प्रमाणित बीज ही खरीदें। अंबर, चित्रा, कौशल, प्रकाश आदि वैरायटी के बीज बोआई कर अधिक पैदावार ले सकते हैं। साल में दो बार फरवरी-मार्च और जून-जुलाई में मूंगफली की बुआई की जा सकती है। इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी भूमि अच्छी है। अब किसानों का मूूंगफली की ओर रुझान बढ़ रहा है। कम लागत में अधिक मुनाफा की फसल है।