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मंदिर परिसर में शव रखने के बाद शुरू होती शवयात्रा
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Tue, 20 Oct 2015 11:40 PM IST
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क्षेत्र के गांव ताहपुर में बने मां गमा देवी मंदिर
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में पहुंचने वालों के गम मां दूर करती हैं। सच्चे मन से पूजा पाठ करने व
मन्नत मांगने पर भक्तों की हर मुराद इस दरबार में पूरी होती है।
एक ओर जहां गांव के युवा यहां शादी के लिए बारात रवाना होने से पहले यहां माथा टेकते हैं, वहीं शादी के बाद खुशहाल जिंदगी के लिए मां के चरणों में पहुंचकर दंपति माथा टेकते हैं। वहीं मरने के बाद शव यात्रा ले जाते वक्त यहां कुछ देर रुकने की परंपरा है। मान्यता है कि शवयात्रा शुरू करने से पहले शव को देवी दरबार में रखने से उसकी आत्मा को शांति मिलती है।
सालों से ऐसा होता चला आ रहा है। नवरात्रि में मंदिर में पूजन करने का विशेष महत्व है। नौ दिन तक तमाम धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं। पूर्व प्रधान शिवराज सिंह ने बताया कि गांव के उत्तरी छोर पर सैकड़ों साल पहले एक चबूतरा बना था। इस पर मां गमा देवी की मूर्ति रखी थी।
कई दशक पहले प्रधान बने रामप्रसाद पटेल ने यहां मंदिर बनवाया था। पुजारी के रूप में रामप्रकाश पाल ने लंबे समय तक पूजा-अर्चना की। प्रदीप मिश्रा, देवेश शुक्ला, धीरेंद्र, रजनेश आदि नियमित रूप से मंदिर के आसपास सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के शाम ही सुबह व शाम को आरती करते हैं।
इन लोगों ने बताया कि शारदीय और चैत्र नवरात्र पर सुबह चार से शाम आठ बजे तक भजन कीर्तन व संध्या पूजन होता है। गांव के लोग मिलकर यहां भागवत कथा व जागरण कार्यक्रम भी संपन्न कराते हैं। होली पर्व के बाद दूज के दिन मंदिर परिसर में विशाल मेला लगाया जाता है।
सुरेश चंद्र, अंशुला मिश्रा, बलराम, वीरेंद्र, नवीन ने बताया कि मां गमा देवी के दरबार में आने वालों के गम दूर होते हैं। दूल्हा दुल्हन को विदा कराने से पहले यहां मां के दरबार में माथा टेकते हैं। मान्यता है कि इससे बारात के दौरान आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
शादी के बाद नव दंपति मंदिर पहुंचकर पूजन कर सुखमय जीवन की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं। हरिश्चंद्र ने बताया कि उन्होंने बेटे की नौकरी की प्रार्थना की। कई साल तक पूजा की।
मां की कृपा से बेटे की सरकारी नौकरी लग गई। इसी तरह गांव के तमाम अन्य लोगों के जीवन में आ संकट मां की कृपा के बाद दूर हो गए। कन्नौज ही नहीं आसपास के जिलों से श्रद्धालु यहां मनौती मांगने आते हैं।
एक ओर जहां गांव के युवा यहां शादी के लिए बारात रवाना होने से पहले यहां माथा टेकते हैं, वहीं शादी के बाद खुशहाल जिंदगी के लिए मां के चरणों में पहुंचकर दंपति माथा टेकते हैं। वहीं मरने के बाद शव यात्रा ले जाते वक्त यहां कुछ देर रुकने की परंपरा है। मान्यता है कि शवयात्रा शुरू करने से पहले शव को देवी दरबार में रखने से उसकी आत्मा को शांति मिलती है।
सालों से ऐसा होता चला आ रहा है। नवरात्रि में मंदिर में पूजन करने का विशेष महत्व है। नौ दिन तक तमाम धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं। पूर्व प्रधान शिवराज सिंह ने बताया कि गांव के उत्तरी छोर पर सैकड़ों साल पहले एक चबूतरा बना था। इस पर मां गमा देवी की मूर्ति रखी थी।
कई दशक पहले प्रधान बने रामप्रसाद पटेल ने यहां मंदिर बनवाया था। पुजारी के रूप में रामप्रकाश पाल ने लंबे समय तक पूजा-अर्चना की। प्रदीप मिश्रा, देवेश शुक्ला, धीरेंद्र, रजनेश आदि नियमित रूप से मंदिर के आसपास सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के शाम ही सुबह व शाम को आरती करते हैं।
इन लोगों ने बताया कि शारदीय और चैत्र नवरात्र पर सुबह चार से शाम आठ बजे तक भजन कीर्तन व संध्या पूजन होता है। गांव के लोग मिलकर यहां भागवत कथा व जागरण कार्यक्रम भी संपन्न कराते हैं। होली पर्व के बाद दूज के दिन मंदिर परिसर में विशाल मेला लगाया जाता है।
सुरेश चंद्र, अंशुला मिश्रा, बलराम, वीरेंद्र, नवीन ने बताया कि मां गमा देवी के दरबार में आने वालों के गम दूर होते हैं। दूल्हा दुल्हन को विदा कराने से पहले यहां मां के दरबार में माथा टेकते हैं। मान्यता है कि इससे बारात के दौरान आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
शादी के बाद नव दंपति मंदिर पहुंचकर पूजन कर सुखमय जीवन की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं। हरिश्चंद्र ने बताया कि उन्होंने बेटे की नौकरी की प्रार्थना की। कई साल तक पूजा की।
मां की कृपा से बेटे की सरकारी नौकरी लग गई। इसी तरह गांव के तमाम अन्य लोगों के जीवन में आ संकट मां की कृपा के बाद दूर हो गए। कन्नौज ही नहीं आसपास के जिलों से श्रद्धालु यहां मनौती मांगने आते हैं।