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करोड़ों रुपए के ओवरहेड टैंक सिस्टम फेल
Kannauj
Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में करीब चार वर्ष पहले करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए वाटर हेड टैंक सिस्टम पूरी तरह से फेल हो चुके हैं। देखरेख का अभाव होने से हजारों रुपये कीमती इस सिस्टम की टंकी व पाइप या तो चोर खोल ले गए या फिर ग्राम प्रधान व शिक्षा विभाग ने ही अपने कब्जे में कर लिया है। स्कूल भवनों के शौचालय गंदे ही पड़े रहते हैं।
स्कूलों के शौचालय को स्वच्छ बनाए रखने के लिए वाटर हेड टैंक जिले के लगभग सभी स्कूलों में स्थापित किया गया था। इस सिस्टम को चलाने में बहुत ही कम पानी की आवश्यकता पड़ती थी। हैंडपंप चलाने से भी उस टैंक में पानी पहुंच जाता था। बाद में यही एकत्र पानी शौचालय गंदगी साफ करने में इस्तेमाल होता था। अब यह सिस्टम पूरी तरह खराब हो चुके हैं।
जिले में 445 जूनियर विद्यालय हैं। इनमें 424 हैंडपंप लगे हुए हैं। इसी तरह 1044 प्राइमरी पाठशाला हैं। इनमें 1030 हैंडपंप लगे हैं। वर्ष 2009 के बाद निर्मित विद्यालयों में यह सिस्टम नहीं लगाया गया था। जबकि वर्ष 2006 से 2009 के बीच बने सभी विद्यालयों में यह सिस्टम कार्यदाई संस्था यूपी एग्रो व पंचायत विभाग द्वारा लगाए गए थे। 8 हजार रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक की लागत एक सिस्टम लगाने में आई थी। कुछ दिन ही सिस्टम चले। अब पूरी तरह से बंद हैं। शौचालयों में गंदगी व ईंट पत्थर भरे पड़े हैं। जिन्हें न तो ग्राम प्रधान देख रहा है और न ही विद्यालय के प्रधानाध्यापक। स्कूली बच्चे खेतों में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं।
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आंकड़ों की मानें तो 20 फीसदी टंकियां व पाइप खोलकर रख दिए गए हैं। 70 फीसदी पाइप व टंकियां चोरी हो चुकी हैं। ज्यादातर मामलों में शिक्षा विभाग व ग्राम पंचायत द्वारा टंकी व पाइप गायब होने की रिपोर्ट पुलिस में नहीं दर्ज कराई गई है। न ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान दिया है। नतीजतन सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना भी औंधे मुंह गिरी। ग्राम प्रधानों ने भी इसकी देखरेख नहीं की। न ही मरम्मत कराई। जिससे न ओवरहेड टैंक बचे और न ही हैंडपंप में सिस्टम।
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स्कूलों के शौचालय को स्वच्छ बनाए रखने के लिए वाटर हेड टैंक जिले के लगभग सभी स्कूलों में स्थापित किया गया था। इस सिस्टम को चलाने में बहुत ही कम पानी की आवश्यकता पड़ती थी। हैंडपंप चलाने से भी उस टैंक में पानी पहुंच जाता था। बाद में यही एकत्र पानी शौचालय गंदगी साफ करने में इस्तेमाल होता था। अब यह सिस्टम पूरी तरह खराब हो चुके हैं।
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जिले में 445 जूनियर विद्यालय हैं। इनमें 424 हैंडपंप लगे हुए हैं। इसी तरह 1044 प्राइमरी पाठशाला हैं। इनमें 1030 हैंडपंप लगे हैं। वर्ष 2009 के बाद निर्मित विद्यालयों में यह सिस्टम नहीं लगाया गया था। जबकि वर्ष 2006 से 2009 के बीच बने सभी विद्यालयों में यह सिस्टम कार्यदाई संस्था यूपी एग्रो व पंचायत विभाग द्वारा लगाए गए थे। 8 हजार रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक की लागत एक सिस्टम लगाने में आई थी। कुछ दिन ही सिस्टम चले। अब पूरी तरह से बंद हैं। शौचालयों में गंदगी व ईंट पत्थर भरे पड़े हैं। जिन्हें न तो ग्राम प्रधान देख रहा है और न ही विद्यालय के प्रधानाध्यापक। स्कूली बच्चे खेतों में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं।
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आंकड़ों की मानें तो 20 फीसदी टंकियां व पाइप खोलकर रख दिए गए हैं। 70 फीसदी पाइप व टंकियां चोरी हो चुकी हैं। ज्यादातर मामलों में शिक्षा विभाग व ग्राम पंचायत द्वारा टंकी व पाइप गायब होने की रिपोर्ट पुलिस में नहीं दर्ज कराई गई है। न ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान दिया है। नतीजतन सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना भी औंधे मुंह गिरी। ग्राम प्रधानों ने भी इसकी देखरेख नहीं की। न ही मरम्मत कराई। जिससे न ओवरहेड टैंक बचे और न ही हैंडपंप में सिस्टम।