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डीएम ने ली एबीएसए की क्लास
Kannauj
Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे ने जिले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त बनाने के लिए कड़े तेवर अपनाने शुरू कर दिए हैं। शनिवार को उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर तगड़ी क्लास लगाई। चेतावनी दी कि रवैया बदल दें। छात्र-छात्राओं के हितों से खिलवाड़ बरदाश्त नहीं होगा। लापरवाही बरतने वाले कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
डीएम ने कहा कि समीक्षा के दौरान पता चला है कि समस्त खंड शिक्षा अधिकारी शिक्षा कार्यक्रमों में रुचि नहीं ले रहे हैं। एबीएसए उमर्दा केेएल वर्मा से उन्होंने पूछा कि ब्लाक में कितने शिक्षामित्र हैं तो वह नहीं बता पाए। इस पर डीएम ने कहा कि जब एबीएसए को अपने ब्लाक के शिक्षामित्रों की संख्या नहीं मालूम तो वह काम क्या कर रहे हैं? उन्होंने सारे एबीएसए से कहा कि काम न करने की आदत बदल दें। अब बहानेबाजी नहीं चलेगी। जमीनी स्तर पर कमियां मिलीं तो निलंबन से लेकर अन्य कार्रवाई तक के लिए शासन स्तर पर डीओ लेटर लिख दिया जाएगा।
डीएम ने कहा कि विद्यालयों में मिडडेमील मानक के अनुसार बनना चाहिए। छात्रवृत्ति हर पात्र बच्चे को मिलनी चाहिए। अतिरिक्त कक्षा कक्ष, प्राइमरी स्कूलों व जूनियर हाईस्कूल भवनों के निर्माण में गुणवत्ता कायम रखें, वरना जेल जाने व विभागीय कार्रवाई को तैयार रहें। उन्होंने कहा कि एबीएसए तत्काल सूची दें कि कितने अतिरिक्त कक्षा कक्षों के लिए जमीन नहीं है, कितने बन चुके हैं, कितनों का निर्माण चल रहा है। उन्होंने बीएसए को हिदायत दी कि शिक्षक जिस स्कूल में तैनात हैं, उन्हे उसी स्कूल का भवन निर्माण प्रभारी बनाया जाए। जहां जमीन की दिक्कत हो वहां के एसडीएम से संपर्क कर समस्या हल कराएं।
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जिलाधिकारी ने कहा कि स्कूलों में हैंडपंप, शौचालय (बालक, बालिका) की व्यवस्था की जाए। एबीएसए विद्युतीकृत स्कूलों की सूची दें बीएसए व डिप्टी बीएसए को निर्देश दिए कि ऐसा नोट तैयार करें जिसमें बच्चों को हिंदी, अंगरेजी, विज्ञान के ज्ञान का मानक हो। इससे निरीक्षण के समय बच्चों से पूछताछ में पता चले कि जो शिक्षा दी जा रही है वह पर्याप्त है कि नहीं ?
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डीएम ने कहा कि समीक्षा के दौरान पता चला है कि समस्त खंड शिक्षा अधिकारी शिक्षा कार्यक्रमों में रुचि नहीं ले रहे हैं। एबीएसए उमर्दा केेएल वर्मा से उन्होंने पूछा कि ब्लाक में कितने शिक्षामित्र हैं तो वह नहीं बता पाए। इस पर डीएम ने कहा कि जब एबीएसए को अपने ब्लाक के शिक्षामित्रों की संख्या नहीं मालूम तो वह काम क्या कर रहे हैं? उन्होंने सारे एबीएसए से कहा कि काम न करने की आदत बदल दें। अब बहानेबाजी नहीं चलेगी। जमीनी स्तर पर कमियां मिलीं तो निलंबन से लेकर अन्य कार्रवाई तक के लिए शासन स्तर पर डीओ लेटर लिख दिया जाएगा।
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डीएम ने कहा कि विद्यालयों में मिडडेमील मानक के अनुसार बनना चाहिए। छात्रवृत्ति हर पात्र बच्चे को मिलनी चाहिए। अतिरिक्त कक्षा कक्ष, प्राइमरी स्कूलों व जूनियर हाईस्कूल भवनों के निर्माण में गुणवत्ता कायम रखें, वरना जेल जाने व विभागीय कार्रवाई को तैयार रहें। उन्होंने कहा कि एबीएसए तत्काल सूची दें कि कितने अतिरिक्त कक्षा कक्षों के लिए जमीन नहीं है, कितने बन चुके हैं, कितनों का निर्माण चल रहा है। उन्होंने बीएसए को हिदायत दी कि शिक्षक जिस स्कूल में तैनात हैं, उन्हे उसी स्कूल का भवन निर्माण प्रभारी बनाया जाए। जहां जमीन की दिक्कत हो वहां के एसडीएम से संपर्क कर समस्या हल कराएं।
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जिलाधिकारी ने कहा कि स्कूलों में हैंडपंप, शौचालय (बालक, बालिका) की व्यवस्था की जाए। एबीएसए विद्युतीकृत स्कूलों की सूची दें बीएसए व डिप्टी बीएसए को निर्देश दिए कि ऐसा नोट तैयार करें जिसमें बच्चों को हिंदी, अंगरेजी, विज्ञान के ज्ञान का मानक हो। इससे निरीक्षण के समय बच्चों से पूछताछ में पता चले कि जो शिक्षा दी जा रही है वह पर्याप्त है कि नहीं ?
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