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मिट्टी की सेहत बिगड़ी, 3400 सैंपल फेल
Kannauj
Updated Thu, 17 Jul 2014 05:30 AM IST
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अमर उजाला खास
प्रमुख पोषक तत्व नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर 80 प्रतिशत तक कम, फास्फोरस, सल्फर, जिंक, पोटाश, बोरान भी बेहद कम
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय वैज्ञानिकों ने कानपुर नगर समेत 12 जिलों से लिए थे सैंपल
4382 मिट्टी के सैंपल की जांच में खुलासा, उपजाऊ जमीन के बंजर होने का खतरा मंडराया,
कृषि विज्ञानियों का कहना पैदावार भी हो रही है प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर/ कन्नौज। कानपुर नगर और देहात समेत प्रदेश के 12 जिलों से लिए गए मिट्टी के 4382 सैंपल में से 3400 सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें पोषक तत्वों की मात्रा अनुपात से बेहद कम पाई गई है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के मृदा विज्ञानियों की जांच में सैंपल में मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन की मात्रा 80 फीसदी तक कम पाई गई है वहीं फास्फोरस, सल्फर, जिंक, पोटाश और बोरान की मात्रा भी जरूरत से ज्याद कम है। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि फसल की अच्छी पैदावार बढ़ाने के लिए मिट्टी में 17 पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इनमें से किसी एक के भी कम होने पर पैदावार प्रभावित होती है। विज्ञानियों का कहना है कि मिट्टी की सेहत यूं ही बिगड़ती रही उपजाऊ जमीन बंजर में तब्दील होते देर नहीं लगेगी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) नई दिल्ली ने मिट्टी में पोषक तत्वों की गुणवत्ता जांचने का काम चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर को दिया। पांच साल (2009-2014) के प्रोजेक्ट का काम अब पूरा हुआ है। इस दौरान मृदा विज्ञानियों ने 12 जिलों की अलग-अलग तहसील, विकासखंड, ग्राम पंचायतों से मिट्टी के सैंपल लिए और उसका ग्लोबल पोजिशनिंग (जीपीएस) बेस्ट डाटा तैयार किया। फिर मिट्टी की उर्वरा शक्ति जांची तो चौंकाने वाली रिपोर्ट आई। मृदा विज्ञानी डॉ. डीडी तिवारी ने बताया कि प्रति हेक्टेयर में 280 किलो ग्राम नाइट्रोजन की मात्रा सामान्य के करीब मानी जाती है लेकिन सैंपल में यह 80 प्रतिशत तक कम पाया गया है। यदि नाइट्रोजन कम होने की यही स्थिति रही तो जमीन बंजर हो जाएगी। प्रति हेक्टेयर भूमि में 25 किलोग्राम फास्फोरस की मात्रा सामान्य होती है, लेकिन हकीकत में यह 9 किलोग्राम मिली है जो बेहद कम है। मिट्टी में उपलब्ध जिंक की मात्रा 49 फीसदी, पोटाश की मात्रा 20 फीसदी, सल्फर की 40 फीसदी और बोरान की मात्रा 27 फीसदी तक कम पाई गई है। कॉपर, मैगनीज और आयरन की मात्रा भी 4-5 फीसदी तक कम मिली है। यह रिपोर्ट आईसीएआर के एक मात्र इंस्टीट्यूट माइक्रो न्यूट्रीयंट के भारतीय मृदा विज्ञान एवं शोध संस्थान भोपाल भेज दी गई है। अब डाटा का अध्ययन होगा, फिर मिट्टी की सेहत सुधारने की कसरत की जाएगी।
यहां से भरे गए मिट्टी सैंपल
कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, फर्रुखाबाद, इटावा, उन्नाव, इलाहाबाद, गोरखपुर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रायबरेली और आगरा
प्रति हेक्टेयर मिट्टी में सही मात्रा में पोषक तत्व
मिट्टी में 17 पोषक तत्व पाए जाते हैं। कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन पौधे हवा और पानी से ले लेते हैं। नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम को पौधे मिट्टी से अधिक मात्रा में प्राप्त करते हैं। बेहतर उपजाऊ मिट्टी के लिए प्रति हेक्टेयर आर्गेनिक कार्बन 0.75 फीसदी, नाइट्रोजन, 560 किलोग्राम, फास्फोरस 25 किलोग्राम, पोटाश 280 किलोग्राम और जिंक 0.6, आयरन 4.5, मैगनीज 3.5, कॉपर 0.2, बोरान 0.5, सल्फर 10.0 (पार्ट्स पर मिलियन यानी पीपीएम) है। मिट्टी में निकिल, कैल्शियम, मैग्नीशियम और क्लोरीन की मात्रा सामान्य मिली है।
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ऐसे सुधारें प्रति हेक्टेयर मिट्टी की सेहत
केमिकल फर्टिलाइजर के ज्यादा इस्तेमाल से बचें।
आर्गेनिक फर्टिलाइजर जैसे गोबर की खाद, कंपोस्ट, बर्मी कंपोस्ट, नैडप कंपोस्ट, हरी खाद का ज्यादा प्रयोग करें। बायो फर्टिलाइजर जैसे राइजोबियम, एजेटो बैक्टर, पीएसबी, पीएमबी के इस्तेमाल से भी पोषक तत्व की मात्रा सुधरेगी।
जिंक का प्रयोग हर साल न करें। एक बार डालने के बाद तीन साल की फुर्सत हो जाती है।
आर्गेनिक, बायो फर्टिलाइजर के इस्तेमाल से मिट्टी के साथ पर्यावरण की सेहत भी सुधरेगी।
एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी देगी स्वायल हेल्थ कार्ड
एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड दिए जाएंगे। इसका खाका तैयार किया जा रहा है। इसी कड़ी में जिस मिट्टी की जांच की गई है, उसका जीपीएस डाटा तैयार किया गया है। ताकि संबंधित जगह (जहां से पहले मिट्टी का सैंपल लिया गया) पर जाकर मिट्टी सुधार और दोबारा सैंपल भरकर उसकी जांच की जा सके। जैसे ही केंद्र सरकार से दिशा-निर्देश मिलेगा, वैसे ही स्वायल हेल्थ कार्ड बनाकर दिए जाने का काम शुरू हो जाएगा।
किसान 20 रुपये में कराएं मिट्टी की जांच
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान इकाई ने किसानों के लिए मिट्टी जांचने की कीमत 20 रुपये (प्रति सैंपल) है। यदि कोई उद्यमी या प्राइवेट व्यक्ति मिट्टी की जांच कराता है तो उससे कम से कम 10 पोषक तत्वों की फीस अलग-अलग दर से वसूली जाती है।
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प्रमुख पोषक तत्व नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर 80 प्रतिशत तक कम, फास्फोरस, सल्फर, जिंक, पोटाश, बोरान भी बेहद कम
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय वैज्ञानिकों ने कानपुर नगर समेत 12 जिलों से लिए थे सैंपल
4382 मिट्टी के सैंपल की जांच में खुलासा, उपजाऊ जमीन के बंजर होने का खतरा मंडराया,
कृषि विज्ञानियों का कहना पैदावार भी हो रही है प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर/ कन्नौज। कानपुर नगर और देहात समेत प्रदेश के 12 जिलों से लिए गए मिट्टी के 4382 सैंपल में से 3400 सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें पोषक तत्वों की मात्रा अनुपात से बेहद कम पाई गई है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के मृदा विज्ञानियों की जांच में सैंपल में मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन की मात्रा 80 फीसदी तक कम पाई गई है वहीं फास्फोरस, सल्फर, जिंक, पोटाश और बोरान की मात्रा भी जरूरत से ज्याद कम है। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि फसल की अच्छी पैदावार बढ़ाने के लिए मिट्टी में 17 पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इनमें से किसी एक के भी कम होने पर पैदावार प्रभावित होती है। विज्ञानियों का कहना है कि मिट्टी की सेहत यूं ही बिगड़ती रही उपजाऊ जमीन बंजर में तब्दील होते देर नहीं लगेगी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) नई दिल्ली ने मिट्टी में पोषक तत्वों की गुणवत्ता जांचने का काम चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर को दिया। पांच साल (2009-2014) के प्रोजेक्ट का काम अब पूरा हुआ है। इस दौरान मृदा विज्ञानियों ने 12 जिलों की अलग-अलग तहसील, विकासखंड, ग्राम पंचायतों से मिट्टी के सैंपल लिए और उसका ग्लोबल पोजिशनिंग (जीपीएस) बेस्ट डाटा तैयार किया। फिर मिट्टी की उर्वरा शक्ति जांची तो चौंकाने वाली रिपोर्ट आई। मृदा विज्ञानी डॉ. डीडी तिवारी ने बताया कि प्रति हेक्टेयर में 280 किलो ग्राम नाइट्रोजन की मात्रा सामान्य के करीब मानी जाती है लेकिन सैंपल में यह 80 प्रतिशत तक कम पाया गया है। यदि नाइट्रोजन कम होने की यही स्थिति रही तो जमीन बंजर हो जाएगी। प्रति हेक्टेयर भूमि में 25 किलोग्राम फास्फोरस की मात्रा सामान्य होती है, लेकिन हकीकत में यह 9 किलोग्राम मिली है जो बेहद कम है। मिट्टी में उपलब्ध जिंक की मात्रा 49 फीसदी, पोटाश की मात्रा 20 फीसदी, सल्फर की 40 फीसदी और बोरान की मात्रा 27 फीसदी तक कम पाई गई है। कॉपर, मैगनीज और आयरन की मात्रा भी 4-5 फीसदी तक कम मिली है। यह रिपोर्ट आईसीएआर के एक मात्र इंस्टीट्यूट माइक्रो न्यूट्रीयंट के भारतीय मृदा विज्ञान एवं शोध संस्थान भोपाल भेज दी गई है। अब डाटा का अध्ययन होगा, फिर मिट्टी की सेहत सुधारने की कसरत की जाएगी।
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यहां से भरे गए मिट्टी सैंपल
कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, फर्रुखाबाद, इटावा, उन्नाव, इलाहाबाद, गोरखपुर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रायबरेली और आगरा
प्रति हेक्टेयर मिट्टी में सही मात्रा में पोषक तत्व
मिट्टी में 17 पोषक तत्व पाए जाते हैं। कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन पौधे हवा और पानी से ले लेते हैं। नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम को पौधे मिट्टी से अधिक मात्रा में प्राप्त करते हैं। बेहतर उपजाऊ मिट्टी के लिए प्रति हेक्टेयर आर्गेनिक कार्बन 0.75 फीसदी, नाइट्रोजन, 560 किलोग्राम, फास्फोरस 25 किलोग्राम, पोटाश 280 किलोग्राम और जिंक 0.6, आयरन 4.5, मैगनीज 3.5, कॉपर 0.2, बोरान 0.5, सल्फर 10.0 (पार्ट्स पर मिलियन यानी पीपीएम) है। मिट्टी में निकिल, कैल्शियम, मैग्नीशियम और क्लोरीन की मात्रा सामान्य मिली है।
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ऐसे सुधारें प्रति हेक्टेयर मिट्टी की सेहत
केमिकल फर्टिलाइजर के ज्यादा इस्तेमाल से बचें।
आर्गेनिक फर्टिलाइजर जैसे गोबर की खाद, कंपोस्ट, बर्मी कंपोस्ट, नैडप कंपोस्ट, हरी खाद का ज्यादा प्रयोग करें। बायो फर्टिलाइजर जैसे राइजोबियम, एजेटो बैक्टर, पीएसबी, पीएमबी के इस्तेमाल से भी पोषक तत्व की मात्रा सुधरेगी।
जिंक का प्रयोग हर साल न करें। एक बार डालने के बाद तीन साल की फुर्सत हो जाती है।
आर्गेनिक, बायो फर्टिलाइजर के इस्तेमाल से मिट्टी के साथ पर्यावरण की सेहत भी सुधरेगी।
एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी देगी स्वायल हेल्थ कार्ड
एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड दिए जाएंगे। इसका खाका तैयार किया जा रहा है। इसी कड़ी में जिस मिट्टी की जांच की गई है, उसका जीपीएस डाटा तैयार किया गया है। ताकि संबंधित जगह (जहां से पहले मिट्टी का सैंपल लिया गया) पर जाकर मिट्टी सुधार और दोबारा सैंपल भरकर उसकी जांच की जा सके। जैसे ही केंद्र सरकार से दिशा-निर्देश मिलेगा, वैसे ही स्वायल हेल्थ कार्ड बनाकर दिए जाने का काम शुरू हो जाएगा।
किसान 20 रुपये में कराएं मिट्टी की जांच
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान इकाई ने किसानों के लिए मिट्टी जांचने की कीमत 20 रुपये (प्रति सैंपल) है। यदि कोई उद्यमी या प्राइवेट व्यक्ति मिट्टी की जांच कराता है तो उससे कम से कम 10 पोषक तत्वों की फीस अलग-अलग दर से वसूली जाती है।