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तेरी यादों को भी रुसवा नहीं होने देते...
Kannauj
Updated Wed, 14 May 2014 05:30 AM IST
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कन्नौज। शहर में चल रहे हाजी शरीफ जिंदनी रह. अलैह के तीन दिवसीय सालाना उर्स के दूसरे दिन महफिले शमां का प्रोग्राम आयोजित हुआ। इस दौरान लोगों ने पूरी रात जबाबी कव्वाली का लुत्फ उठाया। फनकारों ने अपने कलाम पेश कर लोगों को वाहवाही करने पर मजबूर कर दिया।
सोमवार की देरशाम करीब 10 बजे शुरू हुए कव्वाली के जबाबी मुकाबले में मुंबई से आए कव्वाल जाहिद नाजां ने सबसे पहले हम्द अल्लाहु अकबर व नात शरीफ नबी के हुक्म को अपनाओ ये मेरी तमन्ना है सुनाकर सामईन को वाहवाही करने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद इक नजरे करम मुझ पे भी मेरी झोली है खाली, ऐ हिंद के वाली.. को सुनकर लोग झूमने लगे। वहीं मुंबई से आयी कव्वाला परवीन सुल्ताना ने नात शरीफ जिनके शैदा ये शम्सों-क़मर हैं, सारे नबियों के ताजवर हैं, वो मुहम्मद है खैरूल बसर हैं व मन्कबत किस्मत चमकेगी कभी तो मेरी, इश्क मेरा रंग लाए, ख्वाजा मोइनुद्दीन तेरे दर पर मुझे मौत आए सुनाकर ख्वाजा के दीवानों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद गजलों का दौर शुरू हुआ। जाहिद नाजां ने आंखों में इंतजार की शिद्दत कहां गयी, क्या हो गया, वो पिछली मोहब्बत कहां गयी को काफी पसंद किया गया। वहीं चढ़ता सूरज धीरे-धीरे, ढलता है ढल जाएगा। कव्वाली सुनकर लोग झूम उठे। जबाब में कव्वाला परवीन सुल्ताना ने हम गजल में तेरा चर्चा नहीं होने देते, तेरी यादों को भी रुसवा नहीं होने देते को काफी तारीफ मिली। मै कतरा हूं मगर औकात में हूं, समुंदर क्या मुझे रुसवा करेगा। पूरी रात जबाबी मुकाबले का लोगों ने लुत्फ उठाया। सुबह करीब 4 बजे कुल शरीफ का आयोजन हुआ। इसमें दरगाह पर पहुंचकर अकीदतमंदों ने फातिहा पढ़ी। इस मौके पर कमेटी के सदर हाजी शमशुल खान, उबैदुल हसन खलीफा, अबुल हसन मंगल, मास्टर निजाम, मास्टर वसीउद्दीन के अलावा कमेटी के सभी ओहदेदारान व मेंबर सहित हजारों लोग मौजूद रहे।
कम पड़ गई कुर्सियां
कव्वाली कार्यक्रम में उम्मीद से अधिक भीड़ जुटी। इसके चलते कुर्सियां कम पड़ गईं। कुर्सियों पर बैठने के लिए लोग मशक्कत करते नजर आए। वहीं काफी लोगों को इधर-उधर खड़े होकर कव्वाली का लुत्फ उठाना पड़ा। वहीं महिलाओं को भी भीड़ के चलते बैठने की जगह तलाशने में दिक्कतें आईं। वहीं कार्यक्रम में सामईन का उत्साह देखते ही बना। बेहतर कलाम पेश करने पर कव्वालों पर नोटों की बारिश की जा रही थी। वहीं तरह-तरह के तोहफों की झड़ी से दोनों कव्वाल पार्टियां गदगद हुईं।
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पेयजल किल्लत का करना पड़ा सामना
बेतहाशा भीड़ के चलते पेयजल के इंतजाम नाकाफी साबित हुए। पालिका की ओर से उपलब्ध कराया गया टैंकर कुछ ही देर में खाली हो गया। दरगाह के निकट लगे फ्रीजर का गला भी सूख गया। एक हैंडपंप भी दगा दे गया। परिसर में लगे हैंडपंपों पर पानी को लेकर लोगों को धक्का-मुक्की करनी पड़ी। इसके अलावा गला तर करने के लिए बर्फ व आइसक्रीम की दुकानों पर लोगों की भीड़ रही।
जायरीनों ने मांगी अमन-चैन की दुआ
सोमवार देरशाम दरगाह पर हाजिरी देने वालों का तांता लगा रहा। लोगों ने दरगाह पहुंचकर अकीदत पेश की और मजार शरीफ पर चादर चढ़ाई। इस दौरान फातिहा पढ़ी गई और देश में अमन-चैन की दुआ मांगी गई। वहीं उर्स के अंतिम दिन मंगलवार को हाजी शरीफ दरगाह पर जायरीनों का जमावड़ा रहा। सुबह से ही दरगाह परिसर में काफी चहल-पहल रही। महिलाओं ने मेले में लगे मीना बाजार में दिनभर खरीददारी की। बच्चों ने तरह-तरह के खेल व झूलों का आनंद लिया। दोपहर बाद शहर के कई मोहल्लों से अकीदतमंद गागर व चादर लेकर दरगाह पहुंचे। चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी।
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सोमवार की देरशाम करीब 10 बजे शुरू हुए कव्वाली के जबाबी मुकाबले में मुंबई से आए कव्वाल जाहिद नाजां ने सबसे पहले हम्द अल्लाहु अकबर व नात शरीफ नबी के हुक्म को अपनाओ ये मेरी तमन्ना है सुनाकर सामईन को वाहवाही करने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद इक नजरे करम मुझ पे भी मेरी झोली है खाली, ऐ हिंद के वाली.. को सुनकर लोग झूमने लगे। वहीं मुंबई से आयी कव्वाला परवीन सुल्ताना ने नात शरीफ जिनके शैदा ये शम्सों-क़मर हैं, सारे नबियों के ताजवर हैं, वो मुहम्मद है खैरूल बसर हैं व मन्कबत किस्मत चमकेगी कभी तो मेरी, इश्क मेरा रंग लाए, ख्वाजा मोइनुद्दीन तेरे दर पर मुझे मौत आए सुनाकर ख्वाजा के दीवानों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद गजलों का दौर शुरू हुआ। जाहिद नाजां ने आंखों में इंतजार की शिद्दत कहां गयी, क्या हो गया, वो पिछली मोहब्बत कहां गयी को काफी पसंद किया गया। वहीं चढ़ता सूरज धीरे-धीरे, ढलता है ढल जाएगा। कव्वाली सुनकर लोग झूम उठे। जबाब में कव्वाला परवीन सुल्ताना ने हम गजल में तेरा चर्चा नहीं होने देते, तेरी यादों को भी रुसवा नहीं होने देते को काफी तारीफ मिली। मै कतरा हूं मगर औकात में हूं, समुंदर क्या मुझे रुसवा करेगा। पूरी रात जबाबी मुकाबले का लोगों ने लुत्फ उठाया। सुबह करीब 4 बजे कुल शरीफ का आयोजन हुआ। इसमें दरगाह पर पहुंचकर अकीदतमंदों ने फातिहा पढ़ी। इस मौके पर कमेटी के सदर हाजी शमशुल खान, उबैदुल हसन खलीफा, अबुल हसन मंगल, मास्टर निजाम, मास्टर वसीउद्दीन के अलावा कमेटी के सभी ओहदेदारान व मेंबर सहित हजारों लोग मौजूद रहे।
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कम पड़ गई कुर्सियां
कव्वाली कार्यक्रम में उम्मीद से अधिक भीड़ जुटी। इसके चलते कुर्सियां कम पड़ गईं। कुर्सियों पर बैठने के लिए लोग मशक्कत करते नजर आए। वहीं काफी लोगों को इधर-उधर खड़े होकर कव्वाली का लुत्फ उठाना पड़ा। वहीं महिलाओं को भी भीड़ के चलते बैठने की जगह तलाशने में दिक्कतें आईं। वहीं कार्यक्रम में सामईन का उत्साह देखते ही बना। बेहतर कलाम पेश करने पर कव्वालों पर नोटों की बारिश की जा रही थी। वहीं तरह-तरह के तोहफों की झड़ी से दोनों कव्वाल पार्टियां गदगद हुईं।
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पेयजल किल्लत का करना पड़ा सामना
बेतहाशा भीड़ के चलते पेयजल के इंतजाम नाकाफी साबित हुए। पालिका की ओर से उपलब्ध कराया गया टैंकर कुछ ही देर में खाली हो गया। दरगाह के निकट लगे फ्रीजर का गला भी सूख गया। एक हैंडपंप भी दगा दे गया। परिसर में लगे हैंडपंपों पर पानी को लेकर लोगों को धक्का-मुक्की करनी पड़ी। इसके अलावा गला तर करने के लिए बर्फ व आइसक्रीम की दुकानों पर लोगों की भीड़ रही।
जायरीनों ने मांगी अमन-चैन की दुआ
सोमवार देरशाम दरगाह पर हाजिरी देने वालों का तांता लगा रहा। लोगों ने दरगाह पहुंचकर अकीदत पेश की और मजार शरीफ पर चादर चढ़ाई। इस दौरान फातिहा पढ़ी गई और देश में अमन-चैन की दुआ मांगी गई। वहीं उर्स के अंतिम दिन मंगलवार को हाजी शरीफ दरगाह पर जायरीनों का जमावड़ा रहा। सुबह से ही दरगाह परिसर में काफी चहल-पहल रही। महिलाओं ने मेले में लगे मीना बाजार में दिनभर खरीददारी की। बच्चों ने तरह-तरह के खेल व झूलों का आनंद लिया। दोपहर बाद शहर के कई मोहल्लों से अकीदतमंद गागर व चादर लेकर दरगाह पहुंचे। चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी।