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दूध श्रद्धा में न बहाएं, गरीब बच्चों को पिलाएं
Kannauj
Updated Sun, 28 Jul 2013 05:33 AM IST
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कन्नौज। सावन के महीने में शिवालयों में श्रद्धालुआें की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के फूल, पत्ती, जल, सुगंध और भोग से शिवलिंग को पाटकर लबालब मानसिक सुकून महसूस कर हैं। शिवालियों में भक्तों द्वारा अर्पण दूध, दही, शर्बत, ठंडई आदि नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है। मंदिरों के पुजारियों का भी मानना है कि यदि भक्त सावन में ऐसे गरीबों में दूध बांटे, जो खरीदने में असमर्थ हैं तो भगवान शिव ज्यादा प्रसन्न होंगे।
जिले के गौरी शंकर मंदिर, चौधरियापुर शिवमंदिर, फूलमती, शिवाला आदि मंदिरों में भक्त हजारों लीटर दूध शिवलिंगों पर अर्पित करते हैं। सावन के महीने में ही करोड़ों रुपये का दूध नालियों में बह जाता है। मां काली दुर्गा देवी मंदिर सरायमीरा के प्रबंधक व सर्वराकार स्वामी अखंडानंद जी महाराज की मानें तो देवों के देव भगवान महादेव के रुद्राभिषेक में पंचतत्व की सभी चीजें अनिवार्य हैं लेकिन यदि कोई गरीब, भूखा, अबोध शिशु दूध या खाद्य चीजों के लिए व्याकुल है तो भक्त उक्त चीजों को उन्हें देकर दुनिया का सबसे बड़ा पुण्य कमा सकता है। सावन में दूध की बर्बादी पर उन्होंने कहा की सनातन धर्म में अनंतकाल से शिवलिंग पर दूध अर्पण की परंपरा चली आ रही है लेकिन भक्त परिवेश और जरूरत को ध्यान में रखकर पुण्य कमाएं। प्रतीक के तौर पर भोले पर दूध चढ़ाएं, बाकी दूध गरीबों और कुपोषित बच्चों को बांट दे, इससे शिव ज्यादा प्रसन्न होंगे। उन्होंने बताया वे श्रद्धालुओं को इस बार जागरूक करेंगे। मंदिर में आरती के दौरान श्रद्धालुओं से अपील करेंगे।
चौधरियापुर स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर के महंत भोलागिरि जी महाराज ने बताया हर वर्ष लगभग 50 हजार शिव भक्त आश्रम में दर्शन के लिए आते हैं। दूध-दही का अर्पण करते हैं। यदि शिवलिंग पर चढ़ाए गए दूध को किसी पात्र में एकत्र कर भक्तों को प्रसाद के रूप में या गरीब बच्चों को खाने-पीने के लिए दे दिया जाए तो दूध की बर्बादी नहीं होगी। वे इस मुद्दे पर लोगों को जागरूक करेंगे।
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हर्षकालीन गौरी शंकर मंदिर के पुजारी पं दिनेश चंद तिवारी बताया कि शिव के दर्शन को अपार भीड़ आती है। यदि भक्त कलश में गंगाजल के साथ दो बूंद दूध डालकर कर शिवलिंग पर चढ़ाए तो भी भगवान शिव प्रसन्न होंगे। जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण खाद्य वस्तुएं है, उन्हें दिखावे में आकर बर्बाद नहीं करना चाहिए। पुजारी मथुरा प्रसार तिवारी ने बताया शिव पर कुछ मात्रा में अभिषेक करने के बाद बचे हुए दूध को गरीबों के मध्य बांटने से भगवान प्रसन्न होंगे।
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पशु व पालक दूध चढ़ाने से तरते
कन्नौज। एक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को दूध चढ़ाने का चलन सहिष्णु और सहृदय मानव ने इसलिए आरंभ किया कि सावन मास में दुधारूजानवर हरी घास के साथ कई कीड़े व जीव जंतु खा जाते हैं और वो अज्ञानतावश पापी बन जाते हैं। पाप से बचने के लिए पशुओं की क्षमा व दूध शुद्धता के लिए शिवलिंगों पर संपूर्ण मास में दूध चढ़ाया जाता है। आदि ग्रंथों में भगवान शंकर को सभी कष्टों से कल्याण करने वाला बताया गया है। इसी कारण अनंतकाल से शिवलिंग पर दूध व उससे निर्मित चीजों का अर्पण किया जा रहा है।
जल से करें रुद्राभिषेक
कन्नौज। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक करने के दौरान दूध से अधिक जल का इस्तेमाल करें। मंत्रोच्चार के बीच रुद्राभिषेक होने के बाद बचे दूध को ले जाकर जहां पर भी ऐसे लोग मिलें जो उससे वंचित हों उन्हे दूध दें। इसमें भगवान के प्रसाद के तौर पर दूध का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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जिले के गौरी शंकर मंदिर, चौधरियापुर शिवमंदिर, फूलमती, शिवाला आदि मंदिरों में भक्त हजारों लीटर दूध शिवलिंगों पर अर्पित करते हैं। सावन के महीने में ही करोड़ों रुपये का दूध नालियों में बह जाता है। मां काली दुर्गा देवी मंदिर सरायमीरा के प्रबंधक व सर्वराकार स्वामी अखंडानंद जी महाराज की मानें तो देवों के देव भगवान महादेव के रुद्राभिषेक में पंचतत्व की सभी चीजें अनिवार्य हैं लेकिन यदि कोई गरीब, भूखा, अबोध शिशु दूध या खाद्य चीजों के लिए व्याकुल है तो भक्त उक्त चीजों को उन्हें देकर दुनिया का सबसे बड़ा पुण्य कमा सकता है। सावन में दूध की बर्बादी पर उन्होंने कहा की सनातन धर्म में अनंतकाल से शिवलिंग पर दूध अर्पण की परंपरा चली आ रही है लेकिन भक्त परिवेश और जरूरत को ध्यान में रखकर पुण्य कमाएं। प्रतीक के तौर पर भोले पर दूध चढ़ाएं, बाकी दूध गरीबों और कुपोषित बच्चों को बांट दे, इससे शिव ज्यादा प्रसन्न होंगे। उन्होंने बताया वे श्रद्धालुओं को इस बार जागरूक करेंगे। मंदिर में आरती के दौरान श्रद्धालुओं से अपील करेंगे।
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चौधरियापुर स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर के महंत भोलागिरि जी महाराज ने बताया हर वर्ष लगभग 50 हजार शिव भक्त आश्रम में दर्शन के लिए आते हैं। दूध-दही का अर्पण करते हैं। यदि शिवलिंग पर चढ़ाए गए दूध को किसी पात्र में एकत्र कर भक्तों को प्रसाद के रूप में या गरीब बच्चों को खाने-पीने के लिए दे दिया जाए तो दूध की बर्बादी नहीं होगी। वे इस मुद्दे पर लोगों को जागरूक करेंगे।
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हर्षकालीन गौरी शंकर मंदिर के पुजारी पं दिनेश चंद तिवारी बताया कि शिव के दर्शन को अपार भीड़ आती है। यदि भक्त कलश में गंगाजल के साथ दो बूंद दूध डालकर कर शिवलिंग पर चढ़ाए तो भी भगवान शिव प्रसन्न होंगे। जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण खाद्य वस्तुएं है, उन्हें दिखावे में आकर बर्बाद नहीं करना चाहिए। पुजारी मथुरा प्रसार तिवारी ने बताया शिव पर कुछ मात्रा में अभिषेक करने के बाद बचे हुए दूध को गरीबों के मध्य बांटने से भगवान प्रसन्न होंगे।
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पशु व पालक दूध चढ़ाने से तरते
कन्नौज। एक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को दूध चढ़ाने का चलन सहिष्णु और सहृदय मानव ने इसलिए आरंभ किया कि सावन मास में दुधारूजानवर हरी घास के साथ कई कीड़े व जीव जंतु खा जाते हैं और वो अज्ञानतावश पापी बन जाते हैं। पाप से बचने के लिए पशुओं की क्षमा व दूध शुद्धता के लिए शिवलिंगों पर संपूर्ण मास में दूध चढ़ाया जाता है। आदि ग्रंथों में भगवान शंकर को सभी कष्टों से कल्याण करने वाला बताया गया है। इसी कारण अनंतकाल से शिवलिंग पर दूध व उससे निर्मित चीजों का अर्पण किया जा रहा है।
जल से करें रुद्राभिषेक
कन्नौज। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक करने के दौरान दूध से अधिक जल का इस्तेमाल करें। मंत्रोच्चार के बीच रुद्राभिषेक होने के बाद बचे दूध को ले जाकर जहां पर भी ऐसे लोग मिलें जो उससे वंचित हों उन्हे दूध दें। इसमें भगवान के प्रसाद के तौर पर दूध का इस्तेमाल कर सकते हैं।