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फसलों को पाला और रोगों से बचाएं
Updated Sun, 16 Dec 2018 11:20 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज। सर्दी बढ़ने के साथ कोहरा और पाला पड़ने लगा है। इससे फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। इससे आलू, मटर व सरसों की फसलें खराब हो सकती हैं, इसलिए किसान सतर्क हो जाएं और समय पर दवाओं का छिड़काव करें।
कृषि वैज्ञानिक डा. वीके कनौजिया ने बताया कि दिसंबर से ही आसमान में कोहरा छाने लगा है। रात में पाला तेज पड़ने लगा है। इससे मौसम में नमी बनी रहेगी। ऐसे में आलू फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका रहती है। ब्लाइट नामक रोग भी लग सकता है। इससे झुलस जाते हैं और उपज बहुत कम हो जाती है।
मटर और सरसों के लिए भी कोहरा हानिकारक है। नमी के कारण इन फसलों में चेंपा रोग लग जाता है। झुलसा से बचाने के लिए फसल में पांच सौ लीटर पानी में 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर मेटाक्सल 80 प्रतिशत और मोकोजेब 64 प्रतिशत का छिड़काव करें। सरसों और मटर की फसल में डाईक्लोरोफोस 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें। किसी भी फसल में जरूरत से अधिक कीटनाशक का उपयोग न करें।
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कृषि वैज्ञानिक ने बताय कि दोपहर में दवाओं का छिड़काव न करें। जब हवा चल रही तब भी छिड़काव नहीं करना चहिए। पाला पड़ने पर फसल में हल्की सिंचाई कर दें। इससे फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है। कीटनाशक छिड़काव करते समय देख लें की मशीन में लीकेज तो नहीं है। तरल कीटनाशकों को सावधानी पूर्वक उपकरण में डालना चाहिए और यह ध्यान रखना चाहिए कि यह शरीर के किसी अंग में न जाए। अगर ऐसा हो तो तुरंत साफ पानी हाथ धो लें। बचे कीटनाशक को बच्चों, बूढ़ों और पशुओं की पहुंच से दूर रखें। खाली डिब्बों को तोड़कर मिट्टी में दबा देना चाहिए।
खेत में धुआं करके भी बचा सकते हैं
फसल अपनी फसल को पाले से बचाने के लिए आप अपने खेत में धुआं पैदा कर दें, जिससे तापमान जमाव बिंदु तक नहीं गिर पाता और पाले से होने वाली हानि से बचा जा सकता है। दवा छिड़काव शुरू होते ही फसलों में दवा छिड़काव की मशीनों की बिक्री में भी तेजी आई है। ब्लाक रोड स्थित क्वालिटी बीज एजेंसी संचालक दिनेश सिंह कटियार बताते हैं कि बाजार में 800 रुपये से 9000 तक की मशीने उपलब्ध हैं। बैट्री व पेट्रोल से चलने वाली मशीनें भी हैं।
अगर किसी ने कीटनाशक खा लिया है या गलती से मुंह में चला गया है, तो एक गिलास में गुनगुने पानी में दो चम्मच नमक मिलाकर उल्टी करानी चाहिए अथवा गुनगुने पानी में साबुन घोलकर देना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति ने कीटनाशक सूंघ लिया हो, तो जल्दी ही उसे खुले स्थान पर ले जाना चाहिए और शरीर के कपड़े ढीले कर देना चाहिए। अगर सांस लेने में समस्या हो रही हो तो पेट के सहारे लिटाकर उसकी बाहों को सामने की और फैला दें और व्यक्ति की पीठ को हल्के-हल्के सहलाते हुए दबाएं और कृत्रिम श्वांस भी देनी चाहिए।
फसलों को पाला और रोगों से बचाएं
कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को समय छिड़काव व सिंचाई की सलाह दी
फोटो 16 केएनजेपी 01- खेत में दवा का छिड़काव करता किसान।
कन्नौज। सर्दी बढ़ने के साथ कोहरा और पाला पड़ने लगा है। इससे फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। इससे आलू, मटर व सरसों की फसलें खराब हो सकती हैं, इसलिए किसान सतर्क हो जाएं और समय पर दवाओं का छिड़काव करें।
कृषि वैज्ञानिक डा. वीके कनौजिया ने बताया कि दिसंबर से ही आसमान में कोहरा छाने लगा है। रात में पाला तेज पड़ने लगा है। इससे मौसम में नमी बनी रहेगी। ऐसे में आलू फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका रहती है। ब्लाइट नामक रोग भी लग सकता है। इससे झुलस जाते हैं और उपज बहुत कम हो जाती है।
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मटर और सरसों के लिए भी कोहरा हानिकारक है। नमी के कारण इन फसलों में चेंपा रोग लग जाता है। झुलसा से बचाने के लिए फसल में पांच सौ लीटर पानी में 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर मेटाक्सल 80 प्रतिशत और मोकोजेब 64 प्रतिशत का छिड़काव करें। सरसों और मटर की फसल में डाईक्लोरोफोस 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें। किसी भी फसल में जरूरत से अधिक कीटनाशक का उपयोग न करें।
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कृषि वैज्ञानिक ने बताय कि दोपहर में दवाओं का छिड़काव न करें। जब हवा चल रही तब भी छिड़काव नहीं करना चहिए। पाला पड़ने पर फसल में हल्की सिंचाई कर दें। इससे फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है। कीटनाशक छिड़काव करते समय देख लें की मशीन में लीकेज तो नहीं है। तरल कीटनाशकों को सावधानी पूर्वक उपकरण में डालना चाहिए और यह ध्यान रखना चाहिए कि यह शरीर के किसी अंग में न जाए। अगर ऐसा हो तो तुरंत साफ पानी हाथ धो लें। बचे कीटनाशक को बच्चों, बूढ़ों और पशुओं की पहुंच से दूर रखें। खाली डिब्बों को तोड़कर मिट्टी में दबा देना चाहिए।
खेत में धुआं करके भी बचा सकते हैं
फसल अपनी फसल को पाले से बचाने के लिए आप अपने खेत में धुआं पैदा कर दें, जिससे तापमान जमाव बिंदु तक नहीं गिर पाता और पाले से होने वाली हानि से बचा जा सकता है। दवा छिड़काव शुरू होते ही फसलों में दवा छिड़काव की मशीनों की बिक्री में भी तेजी आई है। ब्लाक रोड स्थित क्वालिटी बीज एजेंसी संचालक दिनेश सिंह कटियार बताते हैं कि बाजार में 800 रुपये से 9000 तक की मशीने उपलब्ध हैं। बैट्री व पेट्रोल से चलने वाली मशीनें भी हैं।
अगर किसी ने कीटनाशक खा लिया है या गलती से मुंह में चला गया है, तो एक गिलास में गुनगुने पानी में दो चम्मच नमक मिलाकर उल्टी करानी चाहिए अथवा गुनगुने पानी में साबुन घोलकर देना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति ने कीटनाशक सूंघ लिया हो, तो जल्दी ही उसे खुले स्थान पर ले जाना चाहिए और शरीर के कपड़े ढीले कर देना चाहिए। अगर सांस लेने में समस्या हो रही हो तो पेट के सहारे लिटाकर उसकी बाहों को सामने की और फैला दें और व्यक्ति की पीठ को हल्के-हल्के सहलाते हुए दबाएं और कृत्रिम श्वांस भी देनी चाहिए।
फसलों को पाला और रोगों से बचाएं
कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को समय छिड़काव व सिंचाई की सलाह दी
फोटो 16 केएनजेपी 01- खेत में दवा का छिड़काव करता किसान।