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Kannauj News: बारिश से 70 फीसदी धान की फसल बर्बाद, ड्रोन से सर्वे
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फोटो :38: ठठिया क्षेत्र में बारिश और जलभराव से नष्ट हुई धान की फसल। संवाद
कन्नौज। जिले में हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। रिकॉर्ड 224 मिलीमीटर वर्षा के कारण धान की करीब 70 फीसदी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। राजस्व और कृषि विभाग के प्रारंभिक सर्वे में इस भारी नुकसान की पुष्टि हुई है। जिलाधिकारी ने सभी प्रभावित क्षेत्रों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए ड्रोन से भी सर्वे कराया जा रहा है। जिले में 51,449 हेक्टेयर में करीब 36 हजार हेक्टेयर धान की फसल बारिश और जलभराव में प्रभावित हुई है।
जिले के अन्नदाताओं को इस प्राकृतिक आपदा से भारी क्षति हुई है। प्रारंभिक आकलन में ही बड़े पैमाने पर फसल बर्बादी सामने आई है। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कदम उठाए हैं। किसानों को इस संकट से उबारने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। अपर जिलाधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि नुकसान के सटीक आकलन के लिए व्यापक सर्वे अभियान जारी है। राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त सोलह टीमें धरातल पर उतरकर सर्वे कर रही हैं। जिले के सभी लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्रों में रहकर क्षति का विवरण जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। फसलों के नुकसान का जायजा लेने के लिए पहली बार ड्रोन कैमरे की मदद ली जा रही है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी प्रभावित खेत सर्वे से न छूटे।
इनसेट-- -
विधायक ने भेजा मुख्यमंत्री को पत्र, आज जाएंगे जनप्रतिनिधि
राज्य मंत्री असीम अरुण ने प्रभावित गांवों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने जलमग्न फसलों और बारिश से गिरे कच्चे मकानों का जायजा लिया। मंत्री ने किसानों को जल्द राहत दिलाने का आश्वासन दिया। छिबरामऊ विधायक अर्चना पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। उन्होंने कन्नौज के किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है। मंगलवार को जिले के सभी आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि संयुक्त रूप से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेंगे।
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इनसेट-- -
महज 8500 हेक्टेयर खेती का हुआ बीमा
धान के सीजन में 20111 किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया है। इसके लिए किसानों ने 165.82 लाख रुपये प्रीमियम अंश के रूप में जमा किया है। धान में 8500 हेक्टेयर क्षेत्रफल की फसलों का बीमा हुआ है, जबकि जिले में 51,449 हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती हो रही है। जिला कृषि अधिकारी संतलाल गुप्ता ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में इजाफा हुआ है। समय से बीमा होने से नुकसान की स्थिति में सर्वे कराकर क्षतिपूर्ति दी जा सकेगी। उन्होंने बताया कि बीमा कराने के लिए किसानों को जागरूक कराया जाएगा।
वर्जन
नुकसान की अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यह रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेजी जाएगी। आपदा राहत कोष के तहत नियमानुसार क्षतिपूर्ति की राशि प्रभावित किसानों के खातों में भेजी जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मुआवजा प्रक्रिया में कोई देरी न हो। किसानों को हुए भारी नुकसान को देखते हुए प्रशासन पूरी संवेदनशीलता से काम कर रहा है। -आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी
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जिले के अन्नदाताओं को इस प्राकृतिक आपदा से भारी क्षति हुई है। प्रारंभिक आकलन में ही बड़े पैमाने पर फसल बर्बादी सामने आई है। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कदम उठाए हैं। किसानों को इस संकट से उबारने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। अपर जिलाधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि नुकसान के सटीक आकलन के लिए व्यापक सर्वे अभियान जारी है। राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त सोलह टीमें धरातल पर उतरकर सर्वे कर रही हैं। जिले के सभी लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्रों में रहकर क्षति का विवरण जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। फसलों के नुकसान का जायजा लेने के लिए पहली बार ड्रोन कैमरे की मदद ली जा रही है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी प्रभावित खेत सर्वे से न छूटे।
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विधायक ने भेजा मुख्यमंत्री को पत्र, आज जाएंगे जनप्रतिनिधि
राज्य मंत्री असीम अरुण ने प्रभावित गांवों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने जलमग्न फसलों और बारिश से गिरे कच्चे मकानों का जायजा लिया। मंत्री ने किसानों को जल्द राहत दिलाने का आश्वासन दिया। छिबरामऊ विधायक अर्चना पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। उन्होंने कन्नौज के किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है। मंगलवार को जिले के सभी आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि संयुक्त रूप से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेंगे।
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महज 8500 हेक्टेयर खेती का हुआ बीमा
धान के सीजन में 20111 किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया है। इसके लिए किसानों ने 165.82 लाख रुपये प्रीमियम अंश के रूप में जमा किया है। धान में 8500 हेक्टेयर क्षेत्रफल की फसलों का बीमा हुआ है, जबकि जिले में 51,449 हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती हो रही है। जिला कृषि अधिकारी संतलाल गुप्ता ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में इजाफा हुआ है। समय से बीमा होने से नुकसान की स्थिति में सर्वे कराकर क्षतिपूर्ति दी जा सकेगी। उन्होंने बताया कि बीमा कराने के लिए किसानों को जागरूक कराया जाएगा।
वर्जन
नुकसान की अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यह रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेजी जाएगी। आपदा राहत कोष के तहत नियमानुसार क्षतिपूर्ति की राशि प्रभावित किसानों के खातों में भेजी जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मुआवजा प्रक्रिया में कोई देरी न हो। किसानों को हुए भारी नुकसान को देखते हुए प्रशासन पूरी संवेदनशीलता से काम कर रहा है। -आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी

फोटो :38: ठठिया क्षेत्र में बारिश और जलभराव से नष्ट हुई धान की फसल। संवाद