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पत्नी उत्पीड़न पर तीन साल की सजा
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अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज। दहेज हत्या के मामले में वादी पिता गवाही देने नहीं पहुंचा, इस पर कोर्ट ने उस पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। साक्ष्यों के अभाव में पति दहेज हत्या दहेज हत्या के आरोप से बरी हो गया लेकिन पत्नी के उत्पीड़न में उसे तीन साल की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने दोषी पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र के रतनपुर गांव निवासी राजपाल पुत्र अहिवरन की बेटी रचना की शादी वर्ष 2015 में सौरिख थाना क्षेत्र के गढ़िया गांव निवासी रंजीत उर्फ श्यामू पुत्र सुरेंद्र के साथ हुई थी। सात अगस्त 2017 को राजपाल ने सौरिख थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें दहेज उत्पीड़ने और दहेज की मांग पूरी न होने पर रंजीत ने रचना को जिंदा जला कर हत्या करने का आरोप था। रंजीत की बहन रमा और भाई सुरजीत पर हत्या में सहयोग का आरोप लगाया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने रमा व सुरजीत को आरोप से मुक्त कर दिया था और रंजीत के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार तिवारी की अदालत में हुई। वादी राजपाल और उसकी पत्नी कीर्ति गवाही देने नहीं पहुंचे। साक्ष्य न होने के चलते कोर्ट ने रंजीत को दहेज हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया। मामले की सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि पति के उत्पीड़न के चलते रचना ने आग लगाकर खुदकुशी की थी। उत्पीड़न के दोष में रंजीत को तीन साल की सजा और पांच हजार का अर्थदंड की सजा सुनाई गई। शासकीय अधिवक्ता छेदीलाल गौतम ने बताया कि कोर्ट ने गवाही न देने पर वादी राजपाल के खिलाफ धारा 344 के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
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दहेज हत्या में गवाही न देने पर मुकदमे का आदेश
पति दहेज हत्या के आरोप से बरी लेकिन उत्पीड़न में सजा
क्रासर
मुकदमे में वादी पिता और मां गवाह थी
कन्नौज। दहेज हत्या के मामले में वादी पिता गवाही देने नहीं पहुंचा, इस पर कोर्ट ने उस पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। साक्ष्यों के अभाव में पति दहेज हत्या दहेज हत्या के आरोप से बरी हो गया लेकिन पत्नी के उत्पीड़न में उसे तीन साल की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने दोषी पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र के रतनपुर गांव निवासी राजपाल पुत्र अहिवरन की बेटी रचना की शादी वर्ष 2015 में सौरिख थाना क्षेत्र के गढ़िया गांव निवासी रंजीत उर्फ श्यामू पुत्र सुरेंद्र के साथ हुई थी। सात अगस्त 2017 को राजपाल ने सौरिख थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें दहेज उत्पीड़ने और दहेज की मांग पूरी न होने पर रंजीत ने रचना को जिंदा जला कर हत्या करने का आरोप था। रंजीत की बहन रमा और भाई सुरजीत पर हत्या में सहयोग का आरोप लगाया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने रमा व सुरजीत को आरोप से मुक्त कर दिया था और रंजीत के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार तिवारी की अदालत में हुई। वादी राजपाल और उसकी पत्नी कीर्ति गवाही देने नहीं पहुंचे। साक्ष्य न होने के चलते कोर्ट ने रंजीत को दहेज हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया। मामले की सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि पति के उत्पीड़न के चलते रचना ने आग लगाकर खुदकुशी की थी। उत्पीड़न के दोष में रंजीत को तीन साल की सजा और पांच हजार का अर्थदंड की सजा सुनाई गई। शासकीय अधिवक्ता छेदीलाल गौतम ने बताया कि कोर्ट ने गवाही न देने पर वादी राजपाल के खिलाफ धारा 344 के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
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दहेज हत्या में गवाही न देने पर मुकदमे का आदेश
पति दहेज हत्या के आरोप से बरी लेकिन उत्पीड़न में सजा
क्रासर
मुकदमे में वादी पिता और मां गवाह थी