{"_id":"5cf170b6bdec22073706de6e","slug":"1559326948841-kannauj-news163","type":"story","status":"publish","title_hn":"...तो क्या कागजों पर चल रही हैं 41 गोशालाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...तो क्या कागजों पर चल रही हैं 41 गोशालाएं
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कन्नौज। जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने गोशालाओं के संचालन में बड़ा हेरफेर पकड़ा है। 27 मई को विकास भवन के निरीक्षण में उन्होंने जिले में संचालित 138 गोशालाओं को जारी बजट की जानकारी की तो पता चला कि 41 गोशालाओं को आज तक एक भी रुपया जारी नहीं हुआ। डीएम यह सुनकर चौंक गए थे। उन्होंने बिना बजट के इन गोशालाओं के संचालन को लेकर सवाल किया तो किसी को जवाब नहीं आया। इससे इन गोशालाओं के कागजों पर चलने की आशंकाएं प्रबल हो गई हैं। जिलाधिकारी ने सीडीओ से कमेटी बनाकर मामले की जांच कर एक हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।
प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद गोवंशों को लेकर कई अहम फैसले हुए। इनमें अन्ना मवेशियों को अस्थायी गोशालाओं में रखने का फैसला भी है। शासन से आदेश जारी होने के बाद जनवरी माह से जिले में अस्थायी गोशालाएं बनाकर इनमें अन्ना मवेशियों को रखने का काम शुरू हुआ था। जिले के आठों ब्लाकों में 138 अस्थायी गोशालाएं बनाने की रिपोर्ट जिलाधिकारी रवींद्र कुमार को दी गई। इन गोशालाओं में चारा-पानी और छाया के लिए शासन से बजट जारी हुआ तो प्रत्येक गोशाला को मवेशियों की संख्या के हिसाब से धनराशि का वितरण किया गया। 27 मई को जिलाधिकारी ने विकास भवन का औचक निरीक्षण किया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एके त्रिवेदी के कार्यालय में गोशालाओं से जुड़े दस्तावेज चेक करने पर पाया गया कि 138 में से सिर्फ 97 गोशालाओं को 61 लाख का बजट जारी हुआ है। डीएम ने शेष गोशालाओं को बजट न देने के बारे में पूछा तो मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि इनकी ओर से बजट के लिए डिमांड ही नहीं भेजी गई। यह सुनकर डीएम चौंक गए। उन्होंने बिना बजट के गोशालाओं के संचालन की बाबत पूछा तो मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जवाब नहीं दे सके। इस पर डीएम ने सीडीओ एसके सिंह को मामले की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पता करें कि यह गोशालाएं संचालित भी हो रहीं या नहीं। उन्होंने कमेटी बनाकर जांच करने व एक हफ्ते में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
जांच में फंस सकते हैं अफसर और प्रधान
41 गोशालाओं की जांच के आदेश के बाद संबंधित अफसरों और प्रधानों के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आने लगी हैं। सूत्रों की मानें तो जांच में कई अफसरों और प्रधानों पर कार्रवाई हो सकती है। मामला शासन से जुड़ा होने के कारण जिलाधिकारी सख्त नजर आ रहे हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बड़ी कार्रवाई अमल में आ सकती है।
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जियो और कान में टैगिंग के आदेश
गोशालाओं के संचालन में लापरवाही की आशंका पर जिलाधिकारी ने प्रत्येक गोशाला में मौजूद गोवंशों की जियो और ईयर टैगिंग के निर्देश दिए हैं। अफसरों से कहा है कि हर गोवंश की फोटो खींचकर उसे अपलोड करें। गोशाला में जितने मवेशी हैं उन्हीं के हिसाब से बजट जारी किया जाए। इसमें लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
तीन और अन्ना मवेशियों की मौत
गोशालाओं में टैग लगे अन्ना मवेशियों को लापरवाही के चलते छोड़ दिया गया है। तीन दिनों में मझैइया गांव के तीन गोवंशों ने दम तोड़ दिया। क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेश कुमार ने बताया कि मवेशियों को तड़पता देखकर पुलिस को सूचना दी गई थी। यूपी 100 पुलिस मौके पर पहुंची थी। पशु चिकित्सा अधिकारी को जानकारी देने की बात कहकर पुलिस लौट गई। तीन दिन में तीन मवेशियों की मौत हो चुकी है। किसी अधिकारी ने कोई ध्यान नहीं दिया। मजबूरी में ग्रामीणों ने जेसीबी की मदद से इन्हें दफन करवा दिया।
41 गोशालाओं का संचालन हो रहा है या नहीं, यह जांच के बाद सामने आ सकेगा। संबंधित ब्लाक के बीडीओ और मुख्य पशुचिकित्साधिकारी के साथ मिलकर जांच की जा रही है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर बिना बजट के इन गोशालाओं का संचालन पांच महीनों से कैसे हो रहा था। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी।
- एसके सिंह, मुख्य विकास अधिकारी, कन्नौज।
...तो कागजों पर चल रही हैं 41 गोशालाएं!
27 मई को जिलाधिकारी के विकास भवन के निरीक्षण में सामने आई हकीकत, 138 गोशालाएं संचालित होने की अफसरों ने दी थी सूची, 41 गोशालाओं को आज तक एक भी रुपया नहीं हुआ जारी, डीएम ने उठाया सवाल , बिना बजट कैसे संचालित हो रहीं गोशालाएं
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प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद गोवंशों को लेकर कई अहम फैसले हुए। इनमें अन्ना मवेशियों को अस्थायी गोशालाओं में रखने का फैसला भी है। शासन से आदेश जारी होने के बाद जनवरी माह से जिले में अस्थायी गोशालाएं बनाकर इनमें अन्ना मवेशियों को रखने का काम शुरू हुआ था। जिले के आठों ब्लाकों में 138 अस्थायी गोशालाएं बनाने की रिपोर्ट जिलाधिकारी रवींद्र कुमार को दी गई। इन गोशालाओं में चारा-पानी और छाया के लिए शासन से बजट जारी हुआ तो प्रत्येक गोशाला को मवेशियों की संख्या के हिसाब से धनराशि का वितरण किया गया। 27 मई को जिलाधिकारी ने विकास भवन का औचक निरीक्षण किया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एके त्रिवेदी के कार्यालय में गोशालाओं से जुड़े दस्तावेज चेक करने पर पाया गया कि 138 में से सिर्फ 97 गोशालाओं को 61 लाख का बजट जारी हुआ है। डीएम ने शेष गोशालाओं को बजट न देने के बारे में पूछा तो मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि इनकी ओर से बजट के लिए डिमांड ही नहीं भेजी गई। यह सुनकर डीएम चौंक गए। उन्होंने बिना बजट के गोशालाओं के संचालन की बाबत पूछा तो मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जवाब नहीं दे सके। इस पर डीएम ने सीडीओ एसके सिंह को मामले की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पता करें कि यह गोशालाएं संचालित भी हो रहीं या नहीं। उन्होंने कमेटी बनाकर जांच करने व एक हफ्ते में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
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जांच में फंस सकते हैं अफसर और प्रधान
41 गोशालाओं की जांच के आदेश के बाद संबंधित अफसरों और प्रधानों के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आने लगी हैं। सूत्रों की मानें तो जांच में कई अफसरों और प्रधानों पर कार्रवाई हो सकती है। मामला शासन से जुड़ा होने के कारण जिलाधिकारी सख्त नजर आ रहे हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बड़ी कार्रवाई अमल में आ सकती है।
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जियो और कान में टैगिंग के आदेश
गोशालाओं के संचालन में लापरवाही की आशंका पर जिलाधिकारी ने प्रत्येक गोशाला में मौजूद गोवंशों की जियो और ईयर टैगिंग के निर्देश दिए हैं। अफसरों से कहा है कि हर गोवंश की फोटो खींचकर उसे अपलोड करें। गोशाला में जितने मवेशी हैं उन्हीं के हिसाब से बजट जारी किया जाए। इसमें लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
तीन और अन्ना मवेशियों की मौत
गोशालाओं में टैग लगे अन्ना मवेशियों को लापरवाही के चलते छोड़ दिया गया है। तीन दिनों में मझैइया गांव के तीन गोवंशों ने दम तोड़ दिया। क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेश कुमार ने बताया कि मवेशियों को तड़पता देखकर पुलिस को सूचना दी गई थी। यूपी 100 पुलिस मौके पर पहुंची थी। पशु चिकित्सा अधिकारी को जानकारी देने की बात कहकर पुलिस लौट गई। तीन दिन में तीन मवेशियों की मौत हो चुकी है। किसी अधिकारी ने कोई ध्यान नहीं दिया। मजबूरी में ग्रामीणों ने जेसीबी की मदद से इन्हें दफन करवा दिया।
41 गोशालाओं का संचालन हो रहा है या नहीं, यह जांच के बाद सामने आ सकेगा। संबंधित ब्लाक के बीडीओ और मुख्य पशुचिकित्साधिकारी के साथ मिलकर जांच की जा रही है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर बिना बजट के इन गोशालाओं का संचालन पांच महीनों से कैसे हो रहा था। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी।
- एसके सिंह, मुख्य विकास अधिकारी, कन्नौज।
...तो कागजों पर चल रही हैं 41 गोशालाएं!
27 मई को जिलाधिकारी के विकास भवन के निरीक्षण में सामने आई हकीकत, 138 गोशालाएं संचालित होने की अफसरों ने दी थी सूची, 41 गोशालाओं को आज तक एक भी रुपया नहीं हुआ जारी, डीएम ने उठाया सवाल , बिना बजट कैसे संचालित हो रहीं गोशालाएं