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बालू खनन पट्टे आवंटन में पांच दिन का समय रह गया शेष
Updated Mon, 26 Jun 2017 12:03 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज। बालू खनन के पट्टे के लिए दो माह से शासन-प्रशासन लगा हुआ है, लेकिन नाकाम रहा। अब प्रशासन को बालू की नई खनन नीति का इंतजार है, वहीं पुरानी खनन नीति के मुताबिक एक जुलाई से तीस सितंबर तक घाटों से बालू का खनन नहीं किया जा सकता है। सिर्फ पांच दिन बचे हैं, इतने कम समय में बालू खनन के पट्टे आवंटित हो पाना नामुमकिन दिख रहा है।
नई सरकार के गठन के बाद से बालू के पट्टे आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। जिले में खनन विभाग ने गंगा, काली व ईशन नदी के नौ घाटों को बालू खनन के लिए चिह्नित किया। इन सभी घाटों में पट्टा लेने वालों से ई-टेंडरिंग के माध्यम से आवेदन मांगे गए। पहली बार टेंडर प्रक्रिया में कम रेट व सिंगल घाट के लिए आवेदन आने के कारण जिला प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी।
दूसरी बार टेंडर प्रक्रिया बवाल की भेंट चढ़ गई। प्रशासन को टेंडर प्रक्रिया निरस्त करते हुए दूसरी बार ई-टेंडरिंग के माध्यम से आवेदन मांगने पड़े, लेकिन तीसरी बार शासन ने खनन की नई नीतू लागू करने के चलते प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। जून में पांच दिन का समय शेष रह गया है। इस अवधि में किसी भी हाल में टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती, जबकि खनन नीति के मुताबिक एक जुलाई से 30 सितंबर तक घाटों से खनन करना प्रतिबंधित है। ऐसी सूरत में तीन माह घाटों से खनन बंद होने से सरकारी व गैर सरकारी कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा। इसके अलावा तमाम लोग इस रोजगार से जुड़े हुए हैं, वह परिवार बेरोजगार हो जाएंगे।
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गैर सरकारी निर्माण कार्य तो पूरी तरह ठप दिखेंगे। प्रशासन का कहना है कि इसमें चाहकर भी कुछ नहीं किया जा सकता है। सरकार की गाइड लाइन के अनुसार कार्य करना है।
वर्जन
खनन नीति के मुताबिक एक जुलाई से तीस सितंबर तक घाटों से बालू का खनन नहीं किया जा सकता है। प्रशासन को शासन की नई गाइड लाइन का इंतजार है। अब बालू खनन के पट्टे तीस सितंबर के बाद ही हो सकेंगे। प्रशासन ने पट्टों के आवंटन के लिए पूरा प्रयास किया, लेकिन कुछ दिक्कतों की वजह से ऐसा नहीं हो सका।- हवलदार यादव, जिला खनन अधिकारी
- बालू खनन पट्टे आवंटन में पांच दिन शेष
- शासन ने रणनीति न बनाई तो बेरोजगार हो जाएंगे श्रमिक
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कन्नौज। बालू खनन के पट्टे के लिए दो माह से शासन-प्रशासन लगा हुआ है, लेकिन नाकाम रहा। अब प्रशासन को बालू की नई खनन नीति का इंतजार है, वहीं पुरानी खनन नीति के मुताबिक एक जुलाई से तीस सितंबर तक घाटों से बालू का खनन नहीं किया जा सकता है। सिर्फ पांच दिन बचे हैं, इतने कम समय में बालू खनन के पट्टे आवंटित हो पाना नामुमकिन दिख रहा है।
नई सरकार के गठन के बाद से बालू के पट्टे आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। जिले में खनन विभाग ने गंगा, काली व ईशन नदी के नौ घाटों को बालू खनन के लिए चिह्नित किया। इन सभी घाटों में पट्टा लेने वालों से ई-टेंडरिंग के माध्यम से आवेदन मांगे गए। पहली बार टेंडर प्रक्रिया में कम रेट व सिंगल घाट के लिए आवेदन आने के कारण जिला प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी।
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दूसरी बार टेंडर प्रक्रिया बवाल की भेंट चढ़ गई। प्रशासन को टेंडर प्रक्रिया निरस्त करते हुए दूसरी बार ई-टेंडरिंग के माध्यम से आवेदन मांगने पड़े, लेकिन तीसरी बार शासन ने खनन की नई नीतू लागू करने के चलते प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। जून में पांच दिन का समय शेष रह गया है। इस अवधि में किसी भी हाल में टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती, जबकि खनन नीति के मुताबिक एक जुलाई से 30 सितंबर तक घाटों से खनन करना प्रतिबंधित है। ऐसी सूरत में तीन माह घाटों से खनन बंद होने से सरकारी व गैर सरकारी कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा। इसके अलावा तमाम लोग इस रोजगार से जुड़े हुए हैं, वह परिवार बेरोजगार हो जाएंगे।
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गैर सरकारी निर्माण कार्य तो पूरी तरह ठप दिखेंगे। प्रशासन का कहना है कि इसमें चाहकर भी कुछ नहीं किया जा सकता है। सरकार की गाइड लाइन के अनुसार कार्य करना है।
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खनन नीति के मुताबिक एक जुलाई से तीस सितंबर तक घाटों से बालू का खनन नहीं किया जा सकता है। प्रशासन को शासन की नई गाइड लाइन का इंतजार है। अब बालू खनन के पट्टे तीस सितंबर के बाद ही हो सकेंगे। प्रशासन ने पट्टों के आवंटन के लिए पूरा प्रयास किया, लेकिन कुछ दिक्कतों की वजह से ऐसा नहीं हो सका।- हवलदार यादव, जिला खनन अधिकारी
- बालू खनन पट्टे आवंटन में पांच दिन शेष
- शासन ने रणनीति न बनाई तो बेरोजगार हो जाएंगे श्रमिक