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आपका रक्तदान बचा सकता है किसी की जान
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झांसी। राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के अवसर पर शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर सुबह आठ बजे जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में शुरू होगा। किसी के जान बचाने के जज्बे के साथ आप भी रक्तदान के लिए आगे आइए। आपके रक्त की हर बूंद किसी के जीवन का स्रोत बन सकती है।
रक्तदान 18 से 60 वर्ष की आयु का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति कर सकता है। हालांकि, इसके लिए रक्तदाता का वजन का 45 किलोग्राम से अधिक होना जरूरी है। इसके अलावा कोरोना टीकाकरण के 14 दिन बाद रक्तदान किया जा सकता है। जबकि, कोरोना संक्रमण से ठीक होने के 28 दिन बार रक्तदान कर सकते हैं। डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड से ठीक होने के छह महीने बाद रक्तदान किया जा सकता है। रक्त की कमी से किसी मरीज की जान न जाए, इसके लिए अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हर साल की तरह इस बार भी रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर में आप भी रक्तदान कर महादानी बन सकते हैं। शिविर सुबह आठ बजे से शुरू होगा। ऑन स्पॉट पंजीकरण किए जाएंगे और इसके बाद रक्त दाताओं को प्रमाण पत्र भी भेंट किए जाएंगे।
रक्तदान के बाद होता है नई स्फूर्ति का अहसास
झांसी। सर्व नगर निवासी हैप्पी चावला पिछले 20 सालों से रक्तदान करते आ रहे हैं। सन 2001 में पहली बार उन्होंने रक्तदान किया था और अब तक वे 70 यूनिट रक्तदान कर चुके हैं। इसके अलावा चार बार प्लेटलेट्स व नौ बार प्लाज्मा भी दान कर चुके हैं। हैप्पी ने बताया कि रक्तदान के बाद हर बार नई स्फूूर्ति का अहसास होता है। इससे स्वास्थ्य दुरुस्त बना रहता है।
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अनजान की जान बचाकर मिलती है तसल्ली
झांसी। मेवातीपुरा निवासी हैदर अली पिछले 16 सालों से रक्तदान करते आ रहे हैं। अब तक वे 37 बार रक्तदान कर चुके हैं। हैदर अली ने बताया कि उन्हें नहीं मालूम कि उनका रक्त किसके काम आया है। हां, लेकिन ये जरूर पता है कि उनका खून किसी न किसी जरूरतमंद को चढ़ाया गया होगा। उनके रक्त की बूंदों ने किसी न किसी की जान जरूर बचाई होगी। ये सोचकर दिल को बढ़ी तसल्ली होती है।
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रक्तदान 18 से 60 वर्ष की आयु का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति कर सकता है। हालांकि, इसके लिए रक्तदाता का वजन का 45 किलोग्राम से अधिक होना जरूरी है। इसके अलावा कोरोना टीकाकरण के 14 दिन बाद रक्तदान किया जा सकता है। जबकि, कोरोना संक्रमण से ठीक होने के 28 दिन बार रक्तदान कर सकते हैं। डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड से ठीक होने के छह महीने बाद रक्तदान किया जा सकता है। रक्त की कमी से किसी मरीज की जान न जाए, इसके लिए अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हर साल की तरह इस बार भी रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर में आप भी रक्तदान कर महादानी बन सकते हैं। शिविर सुबह आठ बजे से शुरू होगा। ऑन स्पॉट पंजीकरण किए जाएंगे और इसके बाद रक्त दाताओं को प्रमाण पत्र भी भेंट किए जाएंगे।
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रक्तदान के बाद होता है नई स्फूर्ति का अहसास
झांसी। सर्व नगर निवासी हैप्पी चावला पिछले 20 सालों से रक्तदान करते आ रहे हैं। सन 2001 में पहली बार उन्होंने रक्तदान किया था और अब तक वे 70 यूनिट रक्तदान कर चुके हैं। इसके अलावा चार बार प्लेटलेट्स व नौ बार प्लाज्मा भी दान कर चुके हैं। हैप्पी ने बताया कि रक्तदान के बाद हर बार नई स्फूूर्ति का अहसास होता है। इससे स्वास्थ्य दुरुस्त बना रहता है।
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अनजान की जान बचाकर मिलती है तसल्ली
झांसी। मेवातीपुरा निवासी हैदर अली पिछले 16 सालों से रक्तदान करते आ रहे हैं। अब तक वे 37 बार रक्तदान कर चुके हैं। हैदर अली ने बताया कि उन्हें नहीं मालूम कि उनका रक्त किसके काम आया है। हां, लेकिन ये जरूर पता है कि उनका खून किसी न किसी जरूरतमंद को चढ़ाया गया होगा। उनके रक्त की बूंदों ने किसी न किसी की जान जरूर बचाई होगी। ये सोचकर दिल को बढ़ी तसल्ली होती है।