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Jhansi News: जल संस्थान में एक दिन में 38 वर्कआर्डर से करा लिए 27 लाख के काम
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जल संस्थान में बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जल संस्थान अफसरों ने रंगाई-पोताई समेत अन्य काम बिना टेंडर के कराकर 27 लाख का भुगतान कर डाला। हैरानी की बात यह कि इसके वर्कआर्डर एक दिन में बनाकर इसे एक फर्म को ही थमा दिए गए। कुछ दिनों पहले एक जनसूचना से इसका खुलासा हुआ। पोल खुलने के बाद अब यह शिकायत शासन तक जा पहुंची है। इससे जल संस्थान के गलियारों में भी खलबली मची है।
जल संस्थान कर्मचारी संघ के पूर्व महामंत्री संजीव साहू ने मार्च महीने में जल संस्थान महाप्रबंधक कार्यालय से जोन के अंतर्गत आने वाले तीनों जनपदों (झांसी, ललितपुर एवं जालौन) में बिना टेंडर कराए जाने वाले कार्यों की सूची मांगी थी। 21 मई को जब उनके हाथ सूचना आई, तब उससे कई चौंकाने वाली बात मालूम चली। जल संस्थान महाप्रबंधक कार्यालय से दी जानकारी के मुताबिक अधिशासी अभियंता, उरई शाखा ने 12 मार्च 2025 को एक दिन में कोटेशन से 38 काम जारी किए। इनमें 15 कार्य आवास मरम्मत एवं रंगाई पोताई एवं अन्य कार्य पाइप लाइन मरम्मत के थे। आवास की रंगाई-पोताई जैसे कार्य पर करीब 11.14 लाख रुपये खर्च हुए जबकि पाइप लाइन मरम्मत पर 14.73 लाख का खर्च दर्शाया गया। हैरानी की बात यह कि सभी 38 कार्य के वर्कआर्डर मेसर्स महाराजा कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स तिलक नगर, उरई के नाम से बनाए गए। जल संस्थान सूत्रों का कहना है कि उस दौरान तत्कालीन महाप्रबंधक के पास ही उरई शाखा के एक्सईएन का भी कार्यभार था। इस मामले की शिकायत अब शासन तक जा पहुंची है।
इनसेट
वर्कआर्डर से काम कराने का नियम
आकस्मिक सेवा से जुड़े कार्य ही वर्क आर्डर के जरिये कराए जा सकते हैं। इसके अलावा, अन्य सभी कार्य कराने से पहले उनका टेंडर कराया जाना अनिवार्य होता है, लेकिन जल संस्थान अफसरों ने रंगाई पोताई, फर्श निर्माण जैसे तमाम कार्य बिना टेंडर वर्कआर्डर के ही करा डाले।
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वित्तीय अनियमितता की किसी भी अधिकारी को छूट नहीं दी जा सकती। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने वाले के खिलाफ निश्चित तौर पर कठोर कार्रवाई होगी। - बिमल कुमार दुबे, मंडलायुक्त
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झांसी। जल संस्थान में बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जल संस्थान अफसरों ने रंगाई-पोताई समेत अन्य काम बिना टेंडर के कराकर 27 लाख का भुगतान कर डाला। हैरानी की बात यह कि इसके वर्कआर्डर एक दिन में बनाकर इसे एक फर्म को ही थमा दिए गए। कुछ दिनों पहले एक जनसूचना से इसका खुलासा हुआ। पोल खुलने के बाद अब यह शिकायत शासन तक जा पहुंची है। इससे जल संस्थान के गलियारों में भी खलबली मची है।
जल संस्थान कर्मचारी संघ के पूर्व महामंत्री संजीव साहू ने मार्च महीने में जल संस्थान महाप्रबंधक कार्यालय से जोन के अंतर्गत आने वाले तीनों जनपदों (झांसी, ललितपुर एवं जालौन) में बिना टेंडर कराए जाने वाले कार्यों की सूची मांगी थी। 21 मई को जब उनके हाथ सूचना आई, तब उससे कई चौंकाने वाली बात मालूम चली। जल संस्थान महाप्रबंधक कार्यालय से दी जानकारी के मुताबिक अधिशासी अभियंता, उरई शाखा ने 12 मार्च 2025 को एक दिन में कोटेशन से 38 काम जारी किए। इनमें 15 कार्य आवास मरम्मत एवं रंगाई पोताई एवं अन्य कार्य पाइप लाइन मरम्मत के थे। आवास की रंगाई-पोताई जैसे कार्य पर करीब 11.14 लाख रुपये खर्च हुए जबकि पाइप लाइन मरम्मत पर 14.73 लाख का खर्च दर्शाया गया। हैरानी की बात यह कि सभी 38 कार्य के वर्कआर्डर मेसर्स महाराजा कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स तिलक नगर, उरई के नाम से बनाए गए। जल संस्थान सूत्रों का कहना है कि उस दौरान तत्कालीन महाप्रबंधक के पास ही उरई शाखा के एक्सईएन का भी कार्यभार था। इस मामले की शिकायत अब शासन तक जा पहुंची है।
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वर्कआर्डर से काम कराने का नियम
आकस्मिक सेवा से जुड़े कार्य ही वर्क आर्डर के जरिये कराए जा सकते हैं। इसके अलावा, अन्य सभी कार्य कराने से पहले उनका टेंडर कराया जाना अनिवार्य होता है, लेकिन जल संस्थान अफसरों ने रंगाई पोताई, फर्श निर्माण जैसे तमाम कार्य बिना टेंडर वर्कआर्डर के ही करा डाले।
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वित्तीय अनियमितता की किसी भी अधिकारी को छूट नहीं दी जा सकती। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने वाले के खिलाफ निश्चित तौर पर कठोर कार्रवाई होगी। - बिमल कुमार दुबे, मंडलायुक्त