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चुनौतियों को दी मात, संघर्ष के दम पर पाया मुकाम
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झांसी। डिजिटल दौर में महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। अपने हक के लिए महिलाएं जागरूक होने के साथ ही आगे बढ़ रही हैं। शिक्षा से लेकर पर्यटन, दुकान से फैक्टरी तक महिलाएं चला रही हैं। इसके जरिए वे पुरुषों के समान ही खुद को काबिल बनाने के साथ ही समाज में नई मिसाल कायम कर रही हैं। चुनौतियों और संघर्ष के साथ ही अपने मुकाम पर पहुंची कुछ ऐसी ही महिलाएं झांसी में भी हैं। जिन्होंने ऐसे क्षेत्रों में खुद के स्थापित किया जो केवल पुरुषों के लिए माने जाते थे। पढ़िए रिपोर्ट...
सीमेंट कंपनी बनाकर दिया रोजगार
शहर के बीएचईएल के पास रहने वाली सजनीता परवार ने सीमेंट कंपनी बनाकर एक नए क्षेत्र में कदम रखने के साथ ही लोगों को रोजगार दिया। वे बताती हैं कि उनके पति का ग्रेनाइट का एक्सपोर्ट का व्यापार था। लेकिन व्यापार ठीक न चलने पर उन्होंने साल 2001 में उन्होेंने हिस्कॉन नाम से सीमेंट कंपनी शुरू की। जहां सीमेंट उत्पाद पेवर ब्रिक्स, फ्लाई ऐश ब्रिक्स और टाइल्स बनाने शुरू किए। सीमेंट उत्पाद क्षेत्र में किसी महिला का प्रवेश करना उनके लिए चुनौती भरा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज उनके सीमेंट उत्पादों की कई जगह आपूर्ति होती है। इसके साथ ही इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम की वेंडर भी हैं। वे कहती हैं कि एक वक्त पर उनकी फैक्टरी में जहां 10-12 लोग काम करते थे आज वहीं 50 लोगों को रोजगार दिया हुआ है। पति के साथ मिलकर फैक्टरी देखती हैं। साथ ही घर भी संभालती हैं।
फूड इंडस्ट्री में पाया बेहतर मुकाम
शहर निवासी दीपशिखा ने भी फूड इंडस्ट्री में कदम रखकर बेहतर मुकाम पाया। दीपशिखा बताती हैं कि बचपन से ही वो कारोबारी बनना चाहती थीं। शादी के बाद साल 2008 में उन्होंने मसाले बनाने की फैक्टरी लगाई। शुरू में तो मसाले बनाने के काम में उनको स्थापित होने में दिक्कत आई, लेकिन आज उनका ब्रांड पूरे प्रदेश और अन्य जगहों पर धूम मचा रहा है। वे बताती हैं कि शुरू में पति कच्चा माल लाना आदि बाहर का काम संभालते थे। अब वे भी ऑर्डर की सप्लाई के बारे में व्यापारियों से बात करती हैं। आज मुरादाबाद, चंदौसी, कोटा, ललितपुर, झालावाड़ और कई जिलों में उनके मसाले बिक रहे हैं। वहीं लगभग 40 लोगों को रोजगार दे रखा है। पहले हाथ से मसाले पैक होते थे, अब मशीनों से पैकिंग की जाती है।
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आग ने सब कर दिया राख फिर उठ खड़ी हुईं शबीना
शहर के चित्रा चौराहे स्थित स्टार बेकरी को चलाने वाली शबीना बेगम ने भी समाज में महिलाओं को समान अधिकारों के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया है। शबीना बताती हैं कि उनकी बेकरी को पति संचालित किया करते थे। 28 दिसंबर 2014 को न्यू स्टार बेकरी में लगी आग में न सिर्फ सामान और उनकी दुनिया भी जल गई थी। हादसे में अपने पति और सास की मौत हो गई। बेकरी जैसा व्यापार और परिवार को संभालना उनके लिए चुनौती भरा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज शबीना बेगम ने बेकरी फिर से खड़ी कर ली है। शुरुआत में थोड़ी दिक्कत महसूस की, लेकिन आज उनकी बेकरी शहर में फेमस है। उनके यहां बने केक ललितपुर और ग्वालियर तक जाते हैं।
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नौ साल से ट्रेन दौड़ा रहीं प्रतिमा
ट्रेन में लोको पायलट बनकर भी महिलाओं ने पुरुष प्रधान समाज में समानता की मिसाल कायम की है। झांसी मंडल में करीब 13 महिलाएं बतौर लोको पायलट ट्रेन दौड़ा रही हैं। सीपरी बाजार निवासी प्रतिमा पाठक बतौर असिस्टेंट लोको पायलट नौ साल से ट्रेन दौड़ा रही हैं। वे बताती हैं कि नौ साल पहले महिला का लोको पायलट बनना सामाजिक लिहाज से चुनौती पूर्ण था। कभी पुरुष लोको पायलट के साथ भी जाना होता। शुरू में तो डर लगता था, लेकिन धीरे-धीरे हिम्मत आ गई। कई बार लोगों और जानवरों को ट्रेन के सामने कटते हुए देखा है। जिसके सपने रात में आते हैं। लोको पायलट की नौकरी में शेड्यूल तो होता नहीं है कभी दिन तो कभी रात में जाना पड़ता है। नौकरी के साथ परिवार की वजह से अपने बेटे की भी अच्छे से परवरिश कर पा रही हूं।
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सीमेंट कंपनी बनाकर दिया रोजगार
शहर के बीएचईएल के पास रहने वाली सजनीता परवार ने सीमेंट कंपनी बनाकर एक नए क्षेत्र में कदम रखने के साथ ही लोगों को रोजगार दिया। वे बताती हैं कि उनके पति का ग्रेनाइट का एक्सपोर्ट का व्यापार था। लेकिन व्यापार ठीक न चलने पर उन्होंने साल 2001 में उन्होेंने हिस्कॉन नाम से सीमेंट कंपनी शुरू की। जहां सीमेंट उत्पाद पेवर ब्रिक्स, फ्लाई ऐश ब्रिक्स और टाइल्स बनाने शुरू किए। सीमेंट उत्पाद क्षेत्र में किसी महिला का प्रवेश करना उनके लिए चुनौती भरा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज उनके सीमेंट उत्पादों की कई जगह आपूर्ति होती है। इसके साथ ही इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम की वेंडर भी हैं। वे कहती हैं कि एक वक्त पर उनकी फैक्टरी में जहां 10-12 लोग काम करते थे आज वहीं 50 लोगों को रोजगार दिया हुआ है। पति के साथ मिलकर फैक्टरी देखती हैं। साथ ही घर भी संभालती हैं।
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फूड इंडस्ट्री में पाया बेहतर मुकाम
शहर निवासी दीपशिखा ने भी फूड इंडस्ट्री में कदम रखकर बेहतर मुकाम पाया। दीपशिखा बताती हैं कि बचपन से ही वो कारोबारी बनना चाहती थीं। शादी के बाद साल 2008 में उन्होंने मसाले बनाने की फैक्टरी लगाई। शुरू में तो मसाले बनाने के काम में उनको स्थापित होने में दिक्कत आई, लेकिन आज उनका ब्रांड पूरे प्रदेश और अन्य जगहों पर धूम मचा रहा है। वे बताती हैं कि शुरू में पति कच्चा माल लाना आदि बाहर का काम संभालते थे। अब वे भी ऑर्डर की सप्लाई के बारे में व्यापारियों से बात करती हैं। आज मुरादाबाद, चंदौसी, कोटा, ललितपुर, झालावाड़ और कई जिलों में उनके मसाले बिक रहे हैं। वहीं लगभग 40 लोगों को रोजगार दे रखा है। पहले हाथ से मसाले पैक होते थे, अब मशीनों से पैकिंग की जाती है।
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आग ने सब कर दिया राख फिर उठ खड़ी हुईं शबीना
शहर के चित्रा चौराहे स्थित स्टार बेकरी को चलाने वाली शबीना बेगम ने भी समाज में महिलाओं को समान अधिकारों के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया है। शबीना बताती हैं कि उनकी बेकरी को पति संचालित किया करते थे। 28 दिसंबर 2014 को न्यू स्टार बेकरी में लगी आग में न सिर्फ सामान और उनकी दुनिया भी जल गई थी। हादसे में अपने पति और सास की मौत हो गई। बेकरी जैसा व्यापार और परिवार को संभालना उनके लिए चुनौती भरा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज शबीना बेगम ने बेकरी फिर से खड़ी कर ली है। शुरुआत में थोड़ी दिक्कत महसूस की, लेकिन आज उनकी बेकरी शहर में फेमस है। उनके यहां बने केक ललितपुर और ग्वालियर तक जाते हैं।
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नौ साल से ट्रेन दौड़ा रहीं प्रतिमा
ट्रेन में लोको पायलट बनकर भी महिलाओं ने पुरुष प्रधान समाज में समानता की मिसाल कायम की है। झांसी मंडल में करीब 13 महिलाएं बतौर लोको पायलट ट्रेन दौड़ा रही हैं। सीपरी बाजार निवासी प्रतिमा पाठक बतौर असिस्टेंट लोको पायलट नौ साल से ट्रेन दौड़ा रही हैं। वे बताती हैं कि नौ साल पहले महिला का लोको पायलट बनना सामाजिक लिहाज से चुनौती पूर्ण था। कभी पुरुष लोको पायलट के साथ भी जाना होता। शुरू में तो डर लगता था, लेकिन धीरे-धीरे हिम्मत आ गई। कई बार लोगों और जानवरों को ट्रेन के सामने कटते हुए देखा है। जिसके सपने रात में आते हैं। लोको पायलट की नौकरी में शेड्यूल तो होता नहीं है कभी दिन तो कभी रात में जाना पड़ता है। नौकरी के साथ परिवार की वजह से अपने बेटे की भी अच्छे से परवरिश कर पा रही हूं।