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पोस्टमार्टम हाउस में महिला के शव की बेकद्री, अनगिनत कीड़े लगे
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मृतक वृद्धा का फाइल फोटो
- फोटो : REPORTERS
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झांसी। हमारे देश में देवियों की पूजा होती है। मां के चरणों में स्वर्ग बताया जाता है, लेकिन आज जो झांसी में हुआ, उसने सब को झकझोर दिया। जीते जी अपनों से ठुकराई गई महिला को लावारिस अवस्था में मौत मिली, लेकिन मरने के बाद भी उसे चैन नहीं मिला, उसकी पार्थिव देह के साथ पोस्टमार्टम विभाग ने जो लापरवाही की उसे सुनकर लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। सभी ने कहा, भगवान ऐसी मौत किसी को न दे। चार दिन तक पोस्टमार्टम हाउस में शव रखा रहा और उसमें अनगिनत कीड़े पड़ गए। लेकिन, ऐसी स्थिति में भी उम्मीद रोशनी की संस्था ने अंतिम संस्कार कराया।
हुआ यूं कि कानपुर चुंगी के पास बनी एलआईसी बिल्डिंग के नीचे एक वृद्धा लंबे समय से रहती थी। न तो उसका घर था और न ही परिवार के लोग थे। वह कहां से आई थी यह कोई नहीं जानता था। लंबे समय से वह बिल्डिंग के पास रहती थी। वृद्धा की देखरेख बैंक कर्मी सौरभ सोनी करते थे। चार दिन पहले अज्ञात कारणों के चलते अचानक वृृद्धा की मौत हो गई थी। सौरभ की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। लेकिन, वृद्धा की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। नियम के अनुसार तीन दिन के लिए शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया था।
तीन दिन के भीतर पोस्टमार्टम हाउस में शव के साथ जो अमानवीयता हुई उसे सुनकर लोेगों के रोंगटे खड़े हो गए। बताया गया है कि शव को पुराने पोस्टमार्टम हाउस के हॉल में खुले में रख दिया गया। तीन दिन के भीतर शरीर में लाखों कीड़े पड़ गए। शिनाख्त न होने के चलते बृहस्पतिवार की दोपहर शव का पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू हुई। इसी बीच पोस्टमार्टम से पहले बैंक कर्मी सौरभ पहुंचे।
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यहां शव की हालत देखकर उनकी भी रूह कांप गई। आलम यह था कि शव के पास से आ रही दुर्गंध से आसपास खड़ा होना दूभर था। इसके बाद किसी तरह पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी हुई। खबर पाकर उम्मीद रोशनी की संस्था की तरफ से कुशल श्रीवास्तव, सुरेंद्र खाती, संदीप कंचन, रवि खरे पहुंचे। इसके बाद शाम को बड़ागांव स्थित मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार कराया।
पोस्टमार्टम हास में क्या हुआ, यह मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा कुछ हुआ है तो जांच कराई जाएगी। अज्ञात शवों को पोस्टमार्टम फ्रीजर में रखा जाता है। तीन दिन में शिनाख्त न होेने के बाद ही पोस्टमार्टम किया जाता है। मामले का संज्ञान ले रहा हूं।
जीके निगम, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
पोस्टमार्टम हाउस में हुआ यह मामला बड़ा गंभीर है। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होना बेहद जरूरी है। सबसे पहले तो दोषियों पर एफआईआर दर्ज हो, इसके बाद जांच कर विभागीय कार्रवाई भी हो।
शरीफ उर्फ फरीद, अधिवक्ता
प्रकरण मेरे संज्ञान में आया है। इस मामले में कार्यवाही के लिए डीएम को पत्र लिखा जाएगा। मामला गंभीर है।
दिनेश कुमार पी, एसएसपी
जीते जी अपनों ने छोड़ा बेसहारा, मरने के बाद सिस्टम ने मारा
झांसी। वृद्धा की मौत के बाद उसके शव में कीड़े पड़ने के बाद सिस्टम भी सवालों के घेरे में है। अब सवाल उठता है कि यदि उसे अपने बेसहारा नहीं छोड़ते तो शायद आज वह जिंदा रहने के साथ ही सिस्टम का शिकार भी नहीं होती। वृद्धा के फोटो व वीडियो वायरल होने के बाद लोग भी सिस्टम को कोसने के साथ ही उस पर खूब सवाल उठा रहे हैं।
एनआईसी के पास रहने वाली वृद्धा करीब दो साल से अकेले रहती थी। वृद्धा को कोई नहीं जानता था। इसी बीच बैंककर्मी सौरभ उसका सहारा बने। एक दिन की मुलाकात के बाद वह वृद्धा के खाने पीने से लेकर हर इंतजाम कराते थे। इतना ही नहीं, सुबह बैंक आते समय उनका हालचाल लेना व जाते समय उनसे बात करना उनकी आदत बन चुका था। यदि वह बीमार भी होती थीं तब भी सौैरभ उनको दवा दिलाते थे। चार दिन पहले अचानक उनकी हालत बिगड़ी, उपचार कराने से पहले उनकी मौत हो चुकी थी। सौरभ ने पुलिस को बुलाकर खुद पोस्टमार्टम हाउस जाकर शव रखवाया था। उन्होेंने सपने में भी नहीं सोचा था कि तीन दिन बाद शव पहचानने के भी लायक नहीं रहेगा।
बृहस्पतिवार को जब वह वह पोस्टमार्टम कराने पहुंचे तो शव देखकर उनको चक्कर आ गए और पोस्टमार्टम हाउस पर ही उनकी हालत बिगड़ गई। उनको विश्वास ही नहीं हो रहा था कि शव किसका है। किसी तरह साहस दिखाते हुए सौैरभ ने उम्मीद रोशन की संस्था के पदाधिकारियों के साथ मिलकर अंतिम संस्कार किया। शुक्रवार सुबह पोस्टमार्टम हाउस की बेकद्री वाली फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट हुए। जिसे देखकर लोगों में गुस्सा नजर आया। लोगों ने जमकर सिस्टम को कोसा। दिन भर फोटो व वीडियो सोशल मीडिया में चर्चाओं में रहा।
पहले भी हो चुकी है लाशों की बेकद्री
पोस्टमार्टम हाऊस में लाशों की बेकद्री का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई बार शवों को चूहों ने कुतरा तो कभी कुत्तों ने नोंच डाला। इस तरह की कई मामले पोस्टमार्टम हाउस की सुर्खियां बने रहे। लेकिन, सिस्टम पर सीधे कार्रवाई न होने के कारण आज फिर वृद्धा का शव अमानवीयता का शिकार हो गया।
पोस्टमार्टम हाऊस में इस तरह अमानवीयता होगी, इसका अंदाजा मुझे नहीं था। मैं अब तक नहीं समझ पा रहा हूं कि उनके साथ ऐसा क्यों हुआ। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। ऐसा मामला फिर किसी के साथ न हो, इसको लेकर अधिकारी सख्त से सख्त कार्रवाई करें। - सौरभ सोनी, बैंककर्मी
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हुआ यूं कि कानपुर चुंगी के पास बनी एलआईसी बिल्डिंग के नीचे एक वृद्धा लंबे समय से रहती थी। न तो उसका घर था और न ही परिवार के लोग थे। वह कहां से आई थी यह कोई नहीं जानता था। लंबे समय से वह बिल्डिंग के पास रहती थी। वृद्धा की देखरेख बैंक कर्मी सौरभ सोनी करते थे। चार दिन पहले अज्ञात कारणों के चलते अचानक वृृद्धा की मौत हो गई थी। सौरभ की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। लेकिन, वृद्धा की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। नियम के अनुसार तीन दिन के लिए शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया था।
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तीन दिन के भीतर पोस्टमार्टम हाउस में शव के साथ जो अमानवीयता हुई उसे सुनकर लोेगों के रोंगटे खड़े हो गए। बताया गया है कि शव को पुराने पोस्टमार्टम हाउस के हॉल में खुले में रख दिया गया। तीन दिन के भीतर शरीर में लाखों कीड़े पड़ गए। शिनाख्त न होने के चलते बृहस्पतिवार की दोपहर शव का पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू हुई। इसी बीच पोस्टमार्टम से पहले बैंक कर्मी सौरभ पहुंचे।
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यहां शव की हालत देखकर उनकी भी रूह कांप गई। आलम यह था कि शव के पास से आ रही दुर्गंध से आसपास खड़ा होना दूभर था। इसके बाद किसी तरह पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी हुई। खबर पाकर उम्मीद रोशनी की संस्था की तरफ से कुशल श्रीवास्तव, सुरेंद्र खाती, संदीप कंचन, रवि खरे पहुंचे। इसके बाद शाम को बड़ागांव स्थित मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार कराया।
पोस्टमार्टम हास में क्या हुआ, यह मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा कुछ हुआ है तो जांच कराई जाएगी। अज्ञात शवों को पोस्टमार्टम फ्रीजर में रखा जाता है। तीन दिन में शिनाख्त न होेने के बाद ही पोस्टमार्टम किया जाता है। मामले का संज्ञान ले रहा हूं।
जीके निगम, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
पोस्टमार्टम हाउस में हुआ यह मामला बड़ा गंभीर है। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होना बेहद जरूरी है। सबसे पहले तो दोषियों पर एफआईआर दर्ज हो, इसके बाद जांच कर विभागीय कार्रवाई भी हो।
शरीफ उर्फ फरीद, अधिवक्ता
प्रकरण मेरे संज्ञान में आया है। इस मामले में कार्यवाही के लिए डीएम को पत्र लिखा जाएगा। मामला गंभीर है।
दिनेश कुमार पी, एसएसपी
जीते जी अपनों ने छोड़ा बेसहारा, मरने के बाद सिस्टम ने मारा
झांसी। वृद्धा की मौत के बाद उसके शव में कीड़े पड़ने के बाद सिस्टम भी सवालों के घेरे में है। अब सवाल उठता है कि यदि उसे अपने बेसहारा नहीं छोड़ते तो शायद आज वह जिंदा रहने के साथ ही सिस्टम का शिकार भी नहीं होती। वृद्धा के फोटो व वीडियो वायरल होने के बाद लोग भी सिस्टम को कोसने के साथ ही उस पर खूब सवाल उठा रहे हैं।
एनआईसी के पास रहने वाली वृद्धा करीब दो साल से अकेले रहती थी। वृद्धा को कोई नहीं जानता था। इसी बीच बैंककर्मी सौरभ उसका सहारा बने। एक दिन की मुलाकात के बाद वह वृद्धा के खाने पीने से लेकर हर इंतजाम कराते थे। इतना ही नहीं, सुबह बैंक आते समय उनका हालचाल लेना व जाते समय उनसे बात करना उनकी आदत बन चुका था। यदि वह बीमार भी होती थीं तब भी सौैरभ उनको दवा दिलाते थे। चार दिन पहले अचानक उनकी हालत बिगड़ी, उपचार कराने से पहले उनकी मौत हो चुकी थी। सौरभ ने पुलिस को बुलाकर खुद पोस्टमार्टम हाउस जाकर शव रखवाया था। उन्होेंने सपने में भी नहीं सोचा था कि तीन दिन बाद शव पहचानने के भी लायक नहीं रहेगा।
बृहस्पतिवार को जब वह वह पोस्टमार्टम कराने पहुंचे तो शव देखकर उनको चक्कर आ गए और पोस्टमार्टम हाउस पर ही उनकी हालत बिगड़ गई। उनको विश्वास ही नहीं हो रहा था कि शव किसका है। किसी तरह साहस दिखाते हुए सौैरभ ने उम्मीद रोशन की संस्था के पदाधिकारियों के साथ मिलकर अंतिम संस्कार किया। शुक्रवार सुबह पोस्टमार्टम हाउस की बेकद्री वाली फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट हुए। जिसे देखकर लोगों में गुस्सा नजर आया। लोगों ने जमकर सिस्टम को कोसा। दिन भर फोटो व वीडियो सोशल मीडिया में चर्चाओं में रहा।
पहले भी हो चुकी है लाशों की बेकद्री
पोस्टमार्टम हाऊस में लाशों की बेकद्री का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई बार शवों को चूहों ने कुतरा तो कभी कुत्तों ने नोंच डाला। इस तरह की कई मामले पोस्टमार्टम हाउस की सुर्खियां बने रहे। लेकिन, सिस्टम पर सीधे कार्रवाई न होने के कारण आज फिर वृद्धा का शव अमानवीयता का शिकार हो गया।
पोस्टमार्टम हाऊस में इस तरह अमानवीयता होगी, इसका अंदाजा मुझे नहीं था। मैं अब तक नहीं समझ पा रहा हूं कि उनके साथ ऐसा क्यों हुआ। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। ऐसा मामला फिर किसी के साथ न हो, इसको लेकर अधिकारी सख्त से सख्त कार्रवाई करें। - सौरभ सोनी, बैंककर्मी