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अपनों के बीच भी सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं

Thu, 27 Apr 2017 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 27 Apr 2017 12:43 AM IST
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Women are not safe even among themselves
women - फोटो : demo
घर की दहलीज के भीतर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। वह अपनों के बीच घरेलू हिंसा का शिकार हैं। इसका अंदाजा जिला महिला संरक्षण अधिकारी के यहां आने वाले घरेलू हिंसा के आंकड़ों को देखकर लगाया जा सकता है, जो साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं। साल के चार महीनों में ही यहां घरेलू हिंसा के 66 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।  
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घर के बाहर महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार ने हाल ही में एंटी रोमियो दल का गठन किया है। जबकि, घर के भीतर महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम लागू है। बावजूद, इसके महिलाओं के साथ घर में होने वाली हिंसा के मामलों में कमी नहीं आई है। जिला महिला संरक्षण अधिकारी के यहां साल 2015 में घरेलू हिंसा के 220 मामले दर्ज किए गए थे। साल 2016 में इनकी संख्या बढ़कर 229 पर पहुंच गई थी। साल 2017 के तीन महीनों में 66 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें ज्यादातर मामले में ससुराल में होने वाले उत्पीड़न के हैं। लेकिन, कुछ ऐसे मामले में भी हैं, जिनमें घर की बेटी अपने पिता और भाइयों के हाथों हिंसा की शिकार हुई है।
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यह है घरेलू हिंसा
केवल शारीरिक उत्पीड़न ही घरेलू हिंसा नहीं है, बल्कि उनके प्रति मौखिक रूप से अपशब्दों का प्रयोग करना, मानसिक रूप से प्रताड़ित करना, आर्थिक नुकसान पहुंचाना भी घरेलू हिंसा के दायरे में है।
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यहां करें शिकायत
घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं इसकी शिकायत महिला थाने या नजदीकी थाने, न्यायालय या कलेक्ट्रेट स्थित जिला महिला संरक्षण (जिला प्रोबेशन अधिकारी) कार्यालय में कर सकती हैं।

यह होती है कार्रवाई
जिला महिला संरक्षण अधिकारी राजीव शर्मा ने बताया कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत एक साल की सजा या बीस हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। दोनों भी हो सकते हैं। इतना ही नहीं, मामले का मुकदमा आईपीसी की धाराओं में भी दर्ज किया जा सकता है। इसमें पीड़िता की गोपनीयता को पूरा ख्याल रखा जाता है। 

देह व्यापार कराना चाहते थे ससुराली
सीपरी बाजार क्षेत्र की एक युवती की शादी 2016 में झांसी से समीम मध्यप्रदेश के एक जिले में हुई थी। पिता ने इकलौती लड़की की शादी पर तकरीबन दस लाख रुपये खर्च किए थे। लड़की के ससुराल में पहुंचने के बाद कुछ दिनों तक तो सब कुछ ठीक चलता रहा, लेकिन बाद में मालूम हुआ कि ससुराल के लोग देह व्यापार में लिप्त हैं। घर की महिलाएं भी इस धंधे में हैं। उसे भी देह व्यापार के लिए प्रेरित किया जाने लगा। किसी तरह बचकर लड़की अपने घर वापस लौटी और शिकायत जिला महिला संरक्षण अधिकारी से की।

ससुर की गलत हो गई नजर
शहर क्षेत्र में रहने वाली एक लड़की की शादी पिछले साल एक अच्छे परिवार में हुई थी। पति एक कंपनी में बाहर जॉब करता है। जबकि, ससुर व ससुराल के अन्य लोग झांसी में ही रहते हैं। शादी के बाद उसे पति के साथ न भेजकर ससुराल में ही रखा गया। कुछ समय बाद लड़की को अहसास हुआ कि उसके ससुर की उस पर गलत नजर है। वह उसके कमरे में ताक- झांक करता है। पति से शिकायत करने पर वह उसके ही खिलाफ हो गया। ससुराल के अन्य लोग भी विरोध में आ गए और उत्पीड़न करने लगे। लड़की अपने मायके आकर रहने लगी और शिकायत जिला महिला संरक्षण अधिकारी से की है।

अब चुपचाप नहीं सहती महिलाएं
पहले और अब की महिलाओं की स्थिति में एक बड़ा परिवर्तन आया है। पहले महिलाएं घर की चारदीवारी के भीतर सब कुछ चुपचाप सहन करती रहती थीं, लेकिन अब उत्पीड़न के खिलाफ वह आवाज उठाने लगी हैं। वह न्यायालय और पुलिस का सहारा लेने से भी पीछे नहीं हटतीं और उन्हें कानून की भी पूरी मदद मिलती है।

- रजनी जैन, एडवोकेट

हिंसा का मनोदशा पर भी असर
अस्पताल में आए दिन उत्पीड़न की शिकार महिलाएं आती हैं। इससे उन्हें शारीरिक के साथ मानसिक चोट भी पहुंचती है। मनोदशा बिगड़ जाती है। कई बार तो यह देखने में भी आया है कि लड़की को जन्म देने पर उसके पति और ससुराल के अन्य लोग महिला को अस्पताल में ही भगवान भरोसे छोड़कर भाग खड़े हुए।  
- डा. छवि सहगल, असिस्टेंट प्रोफेसर - महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज
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