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मानदेय में 20 फीसदी के साथ मिलेगी सांकेतिक वृद्धि
ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jan 2016 01:36 AM IST
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झांसी। बीयू में स्ववित्त पोषित योजना के तहत कार्यरत नॉन टीचिंग स्टाफ के मानदेय में संशोधन कर दिया गया है, जिसके अनुसार मानदेय में 20 फीसदी के साथ सांकेतिक वृद्धि की गई है।
सोमवार को वित्त समिति की बैठक में नॉन टीचिंग स्टाफ को लिपिक व चतुर्थ श्रेणी वर्ग में विभाजित करते हुए सांकेतिक वृद्धि तय की गई। इस हिसाब से लिपिक वर्ग को नियुक्ति की तारीख से 100 रुपए सलाना तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को 80 रुपए सालाना की सांकेतिक वृद्धि की गई है।
वहीं, मूल मानेदय में 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी को बरकरार रखा गया है। इसके आलावा पूर्व में निर्धारित टीचिंग स्टाफ के मानदेय में 15 फीसदी वृद्धि, शिक्षकों के मानदेय में 39300 रुपए की, विभिन्न वर्गों (लिपिक) के मानदेय में 16000 से 22000 की एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के मानदेय में 14000 रुपए न्यूनतम मानदेय के आदेश को यथावत रखा गया है।
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बैठक में कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे, कुलसचिव पीएन प्रसाद व वित्त अधिकारी धर्मपाल आदि मौजूद रहे। गौरतलब है कि नॉनटीचिंग स्टाफ में वरिष्ठता तय नहीं थी, जिस कारण सांकेतिक वृद्धि की गई है।
वार्षिक से बदलकर की सांकेतिक वृद्धि
पूर्व में तय फॉर्मेट में नॉनटीचिंग स्टाफ के मानदेय में नियुक्ति की तारीख से वार्षिक वृद्धि जोड़ दी गई थी, जब इसकी जानकारी तत्कालीन वीसी प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय को हुई तो उन्होंने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए खारिज कर दिया था।
नए वीसी प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कार्यभार संभालने के बाद तत्कालीन वीसी की आपत्ति पर कमेटी को मानेदय का नया फार्मेट तैयार करने का आदेश दिया, जिसके तहत सोमवार को वित्त कमेटी की हुई बैठक में संशोधित कार्यक्रम पर मोहर लग गई।
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सोमवार को वित्त समिति की बैठक में नॉन टीचिंग स्टाफ को लिपिक व चतुर्थ श्रेणी वर्ग में विभाजित करते हुए सांकेतिक वृद्धि तय की गई। इस हिसाब से लिपिक वर्ग को नियुक्ति की तारीख से 100 रुपए सलाना तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को 80 रुपए सालाना की सांकेतिक वृद्धि की गई है।
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वहीं, मूल मानेदय में 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी को बरकरार रखा गया है। इसके आलावा पूर्व में निर्धारित टीचिंग स्टाफ के मानदेय में 15 फीसदी वृद्धि, शिक्षकों के मानदेय में 39300 रुपए की, विभिन्न वर्गों (लिपिक) के मानदेय में 16000 से 22000 की एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के मानदेय में 14000 रुपए न्यूनतम मानदेय के आदेश को यथावत रखा गया है।
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बैठक में कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे, कुलसचिव पीएन प्रसाद व वित्त अधिकारी धर्मपाल आदि मौजूद रहे। गौरतलब है कि नॉनटीचिंग स्टाफ में वरिष्ठता तय नहीं थी, जिस कारण सांकेतिक वृद्धि की गई है।
वार्षिक से बदलकर की सांकेतिक वृद्धि
पूर्व में तय फॉर्मेट में नॉनटीचिंग स्टाफ के मानदेय में नियुक्ति की तारीख से वार्षिक वृद्धि जोड़ दी गई थी, जब इसकी जानकारी तत्कालीन वीसी प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय को हुई तो उन्होंने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए खारिज कर दिया था।
नए वीसी प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कार्यभार संभालने के बाद तत्कालीन वीसी की आपत्ति पर कमेटी को मानेदय का नया फार्मेट तैयार करने का आदेश दिया, जिसके तहत सोमवार को वित्त कमेटी की हुई बैठक में संशोधित कार्यक्रम पर मोहर लग गई।