{"_id":"62b60715d94e864946580fe1","slug":"where-there-used-to-be-a-fight-for-studies-today-the-classes-are-empty-jhansi-news-jhs223502120","type":"story","status":"publish","title_hn":"जहां कभी पढ़ने के लिए होती थी मारामारी, आज वहां कक्षाएं पड़ी खाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जहां कभी पढ़ने के लिए होती थी मारामारी, आज वहां कक्षाएं पड़ी खाली
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। एक वक्त था जब अपने शहर के राजकीय इंटर कॉलेज का अलग ही नाम था। कॉलेज के शिक्षक से लेकर छात्र और शिक्षण व्यवस्था पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बनती थी। आलम यह था कि यहां पढ़ने के लिए विद्यार्थ्यों में मारामारी का आलम रहता था। प्रवेश के लिए सिफारिशें और परीक्षा को लेकर अलग ही माहौल बनता था। विद्यार्थी भी कॉलेज में प्रवेश मिलने और पढ़ने के बाद खुद को गौरवान्वित महसूस करते। अब 100 साल बाद देश-प्रदेश को काबिल अफसर, राजनेता, डॉक्टर, इंजीनियर देने वाला कॉलेज बदहाली का शिकार है। यहां अब कक्षाओं में शोरगुल नहीं बल्कि सन्नाटा रहता है। शिक्षकों की कमी और शिक्षण व्यवस्था की बदहाली इस कॉलेज के लिए अभिशाप बन रही है।
राजकीय इंटर कॉलेज जिले का सबसे बड़ा और पुराना स्कूल है। एक समय तक इस स्कूल में प्रवेश पाने के लिए प्रवेश परीक्षा देनी पड़ती थी। वहां आज की स्थिति यह है कि स्कूल में विद्यार्थी कम होते जा रहे हैं। पिछले लगभग छह सालों से यहां अंग्रेजी माध्यम में भी कक्षाएं चल रही हैं, लेकिन फिर भी प्रवेश में इजाफा नहीं है। मौजूदा समय में यहां 1247 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जबकि यह आंकड़ा दो हजार से पार होता था। चर्चा में है कि स्कूल में पढ़ाई से ज्यादा कार्यक्रम होते रहते हैं, जिसमें स्कूल का अधिकांश स्टाफ व्यस्त रहता है। कुछ शिक्षकाें ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई शिक्षक हफ्तों तक स्कूल में पढ़ाने तक नहीं आते। वहीं जीआईसी प्रधानाचार्य पीके मौर्या का कहना है कि यहां गणित, विज्ञान, वाणिज्य, हिंदी जैसे विषयों के प्रवक्ता नहीं है। हालांकि वे अंग्रेजी माध्यम होने के बाद नामांकन बढ़ने का दावा कर रहे हैं।
---------------
अध्यापकों की स्थिति
पद स्वीकृत पद नियुक्त
सहा. अध्यापक 49 27
वरिष्ठ प्रवक्ता 27 14
-----------
स्टेडियम बन रहा
राजकीय इंटर कॉलेज अब पढ़ाई के साथ कार्यक्रम स्थल और सार्वजनिक स्थल बनकर रह गया है। यहां मौजूदा समय में स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। जबकि ओपन जिम होने से शहर के लोग सुबह-शाम यहां पर टहलने पहुंचते हैं। पूरे दिन ग्राउंड पर क्रिकेट मैच होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
राजकीय इंटर कॉलेज जिले का सबसे बड़ा और पुराना स्कूल है। एक समय तक इस स्कूल में प्रवेश पाने के लिए प्रवेश परीक्षा देनी पड़ती थी। वहां आज की स्थिति यह है कि स्कूल में विद्यार्थी कम होते जा रहे हैं। पिछले लगभग छह सालों से यहां अंग्रेजी माध्यम में भी कक्षाएं चल रही हैं, लेकिन फिर भी प्रवेश में इजाफा नहीं है। मौजूदा समय में यहां 1247 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जबकि यह आंकड़ा दो हजार से पार होता था। चर्चा में है कि स्कूल में पढ़ाई से ज्यादा कार्यक्रम होते रहते हैं, जिसमें स्कूल का अधिकांश स्टाफ व्यस्त रहता है। कुछ शिक्षकाें ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई शिक्षक हफ्तों तक स्कूल में पढ़ाने तक नहीं आते। वहीं जीआईसी प्रधानाचार्य पीके मौर्या का कहना है कि यहां गणित, विज्ञान, वाणिज्य, हिंदी जैसे विषयों के प्रवक्ता नहीं है। हालांकि वे अंग्रेजी माध्यम होने के बाद नामांकन बढ़ने का दावा कर रहे हैं।
विज्ञापन
---------------
अध्यापकों की स्थिति
पद स्वीकृत पद नियुक्त
सहा. अध्यापक 49 27
वरिष्ठ प्रवक्ता 27 14
-----------
स्टेडियम बन रहा
राजकीय इंटर कॉलेज अब पढ़ाई के साथ कार्यक्रम स्थल और सार्वजनिक स्थल बनकर रह गया है। यहां मौजूदा समय में स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। जबकि ओपन जिम होने से शहर के लोग सुबह-शाम यहां पर टहलने पहुंचते हैं। पूरे दिन ग्राउंड पर क्रिकेट मैच होता है।
विज्ञापन