{"_id":"5bfafa5dbdec2241b6287afe","slug":"when-complited-sipri-overbridge-work","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूछते- पूछते थक गए लोग, कब पूरा होगा काम?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूछते- पूछते थक गए लोग, कब पूरा होगा काम?
jhansi
Updated Mon, 26 Nov 2018 01:09 AM IST
विज्ञापन
सीपरी बाजार ओवरब्रिज
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीपरी बाजार ओवरब्रिज का निर्माण कब पूरा हो पाएगा? यह पूछते- पूछते लोग थक गए हैं? ब्रिज पर पिछले पांच साल से काम चल रहा है। जबकि, इसे तीन साल में पूरा हो जाना चाहिए था। काम खिंचता जा रहा है। काम की गति से लगता है कि ब्रिज निर्माण का काम और लंबा खिंच सकता है। इससे लोगों को जल्द राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
यातायात समस्या के समाधान के लिए 27 सितंबर 2012 को झांसी आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सीपरी बाजार में रेलवे ट्रैक के ऊपर ओवरब्रिज का निर्माण कराने की स्वीकृति दी थी। ब्रिज निर्माण के लिए 86.39 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की गई थी। ब्रिज 1202.37 मीटर लंबा और 10.5 मीटर चौड़ा बनाया जाना है। ब्रिज के दोनों ओर नीचे चार-चार मीटर की सर्विस लेन भी बनाई जानी है। यह कार्य रेलवे व उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को सौंपा गया।
जमीनी काम सेतु निगम ने पूरा कर लिया है और रेलवे को ट्रैक के ऊपर से गुजरने वाले ब्रिज के हिस्से का निर्माण कराना है। इस काम पर आने वाला व्यय प्रदेश सरकार ने रेलवे को दिया है। जून 2014 में उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने निर्माण कार्य शुरू किया। दिसंबर 2016 तक काम पूरा होना था। मगर, सितंबर 2016 तक सेतु निगम ही अपना काम पूरा कर सका। इससे समय गुजरने के साथ- साथ ब्रिज निर्माण की लागत भी बढ़ती गई।
विज्ञापन
अकेले रेलवे ने ही अपनी लागत में 37 करोड़ रुपये की वृद्धि कर दी। इसके बाद सितंबर 2016 में रेलवे ने अपने हिस्से के 122 मीटर का काम शुरू किया। रेलवे ने ओवरब्रिज निर्माण में 18 माह का लक्ष्य बनाया था। इस हिसाब से मई 2017 में रेलवे को अपना काम पूरा कर लेना चाहिए था। मगर, काम खिंचते-खिंचते 2018 भी गुजरने वाला है। इन हालात में ब्रिज का काम अभी भी अगले छह महीने में पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। इससे पब्लिक को जल्द राहत मिलने की भी उम्मीद नहीं है। सर्विस लाइन न बनने और पुल के नीचे अतिक्रमण के कारण लोगों का निकलना तक मुश्किल बना हुआ है।
एक नजर में
---------
- लागत लगभग 136.19 करोड़
- जून 2014 में शुरू हुआ
- मार्च 2016 में पूरा होना था काम
- अगस्त 2017 हुआ नया लक्ष्य
- अब नया लक्ष्य मार्च 2019 बनाया
- सड़क से रेलवे पुल की ऊंचाई 05 मीटर
- सड़क से ओवरब्रिज की ऊंचाई 14 मीटर
- रेलवे पुल से ओवरब्रिज की ऊंचाई नौ मीटर
जाम और धूल से निकलना हुआ मुश्किल
मुझे प्रतिदिन ऑफिस जाने के लिए सीपरी बाजार से गुजरना पड़ता है। पिछले पांच साल से में जाम और यहां उड़ने वाली धूल से जूझ रहा हूं। यहां से गुजरते वक्त सांस लेने तक में दिक्कत होती है।
अरविंद वर्मा, कर्मचारी।
ऑटो के लिए बनना चाहिए स्टैंड
सीपरी बाजार पुल के नीचे अतिक्रमण के कारण ऑटो चालकों के लिए खड़ा होना सबसे मुश्किल हो गया है। पुलिस उनको इधर- उधर ही करती रहती है। स्टैंड बनना जरूरी है।
शशांक गुरनानी, अध्यक्ष बुंदेलखंड टैक्स एसोसिएशन।
आधी दुकानदारी रह गई
दिनभर वाहनों की रेलमपेल और शोरगुल रहने से ग्राहक सीपरी बाजार में खरीदारी करने से बचने लगे हैं। जब से ओवरब्रिज बनना शुरू हुआ है मेरी दुकानदारी आधी रह गई है।
संजीव चड्डा, व्यापारी।
अतिक्रमण नहीं हट रहा
नगर निगम ने कई बार पुल के नीचे से अतिक्रमण हटाया, लेकिन वह दोबारा लग जाता है। आज निकलने तक जगह नहीं है। अगर अतिक्रमण हट जाए तो स्थिति सामान्य हो सकती है।
अंशुमन ओझा, दवा विक्रेता।
विज्ञापन
यातायात समस्या के समाधान के लिए 27 सितंबर 2012 को झांसी आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सीपरी बाजार में रेलवे ट्रैक के ऊपर ओवरब्रिज का निर्माण कराने की स्वीकृति दी थी। ब्रिज निर्माण के लिए 86.39 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की गई थी। ब्रिज 1202.37 मीटर लंबा और 10.5 मीटर चौड़ा बनाया जाना है। ब्रिज के दोनों ओर नीचे चार-चार मीटर की सर्विस लेन भी बनाई जानी है। यह कार्य रेलवे व उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को सौंपा गया।
विज्ञापन
जमीनी काम सेतु निगम ने पूरा कर लिया है और रेलवे को ट्रैक के ऊपर से गुजरने वाले ब्रिज के हिस्से का निर्माण कराना है। इस काम पर आने वाला व्यय प्रदेश सरकार ने रेलवे को दिया है। जून 2014 में उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने निर्माण कार्य शुरू किया। दिसंबर 2016 तक काम पूरा होना था। मगर, सितंबर 2016 तक सेतु निगम ही अपना काम पूरा कर सका। इससे समय गुजरने के साथ- साथ ब्रिज निर्माण की लागत भी बढ़ती गई।
विज्ञापन
अकेले रेलवे ने ही अपनी लागत में 37 करोड़ रुपये की वृद्धि कर दी। इसके बाद सितंबर 2016 में रेलवे ने अपने हिस्से के 122 मीटर का काम शुरू किया। रेलवे ने ओवरब्रिज निर्माण में 18 माह का लक्ष्य बनाया था। इस हिसाब से मई 2017 में रेलवे को अपना काम पूरा कर लेना चाहिए था। मगर, काम खिंचते-खिंचते 2018 भी गुजरने वाला है। इन हालात में ब्रिज का काम अभी भी अगले छह महीने में पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। इससे पब्लिक को जल्द राहत मिलने की भी उम्मीद नहीं है। सर्विस लाइन न बनने और पुल के नीचे अतिक्रमण के कारण लोगों का निकलना तक मुश्किल बना हुआ है।
एक नजर में
---------
- लागत लगभग 136.19 करोड़
- जून 2014 में शुरू हुआ
- मार्च 2016 में पूरा होना था काम
- अगस्त 2017 हुआ नया लक्ष्य
- अब नया लक्ष्य मार्च 2019 बनाया
- सड़क से रेलवे पुल की ऊंचाई 05 मीटर
- सड़क से ओवरब्रिज की ऊंचाई 14 मीटर
- रेलवे पुल से ओवरब्रिज की ऊंचाई नौ मीटर
जाम और धूल से निकलना हुआ मुश्किल
मुझे प्रतिदिन ऑफिस जाने के लिए सीपरी बाजार से गुजरना पड़ता है। पिछले पांच साल से में जाम और यहां उड़ने वाली धूल से जूझ रहा हूं। यहां से गुजरते वक्त सांस लेने तक में दिक्कत होती है।
अरविंद वर्मा, कर्मचारी।
ऑटो के लिए बनना चाहिए स्टैंड
सीपरी बाजार पुल के नीचे अतिक्रमण के कारण ऑटो चालकों के लिए खड़ा होना सबसे मुश्किल हो गया है। पुलिस उनको इधर- उधर ही करती रहती है। स्टैंड बनना जरूरी है।
शशांक गुरनानी, अध्यक्ष बुंदेलखंड टैक्स एसोसिएशन।
आधी दुकानदारी रह गई
दिनभर वाहनों की रेलमपेल और शोरगुल रहने से ग्राहक सीपरी बाजार में खरीदारी करने से बचने लगे हैं। जब से ओवरब्रिज बनना शुरू हुआ है मेरी दुकानदारी आधी रह गई है।
संजीव चड्डा, व्यापारी।
अतिक्रमण नहीं हट रहा
नगर निगम ने कई बार पुल के नीचे से अतिक्रमण हटाया, लेकिन वह दोबारा लग जाता है। आज निकलने तक जगह नहीं है। अगर अतिक्रमण हट जाए तो स्थिति सामान्य हो सकती है।
अंशुमन ओझा, दवा विक्रेता।