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धोखा देने लगे हैंडपंप, बोरिंग का गिरने लगा जलस्तर
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करगुवां में पानी की समस्या।
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झांसी। मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में स्थित करगुवां समेत आसपास की सभी कॉलोनियों में अभी से जल संकट गहराना शुरू हो गया है। क्षेत्र के अधिकांश हैंडपंप हैं और बोरिंग का जलस्तर गिरने लगा है।
महानगर में 29 से अधिक जल संकटग्रस्त क्षेत्र हैं, जिनमें गर्मी की शुरुआत होते ही हैंडपंपों से पानी निकलना बंद होने लगता है। इनमें करगुवां भी शामिल है। इस क्षेत्र में पेयजल पाइपलाइन नहीं है। यहां की आबादी निजी बोरिंग और हैंडपंप पर निर्भर है। गर्मियों में हैंडपंप और बोरिंग साथ छोड़ देती हैं। इसके बाद इक्का-दुक्का चालू सरकारी हैंडपंप ही लोगों का सहारा बनते हैं। अभी से यहां के 20 में से 17 हैंडपंप सूख गए हैं। हैंडपंप जिनमें पानी निकल रहा है लोग उनसे ही किसी तरह काम चला रहे हैं।
क्षेत्र के अधिकांश हैंडपंप सूख गए हैं। एक व्यक्ति की बोरिंग चल रही है उसके यहां से पानी भरकर लाते हैं। वह भी गर्मी में सूख जाती है।
पुष्पा देवी।
अभी से हैंडपंपों ने सूखना शूरू कर दिया है। कुछ के हत्थे व अन्य उपकरण खराब हैं। ऐसी स्थिति में गर्मियों कैसे कटेगी? कुछ समझ नहीं आ रहा।
गुड्डू कुशवाहा।
मैं पानी की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री, महापौर और जल संस्थान तक में ई मेल और हेल्प लाइन नंबरों पर शिकायत कर चुकी हूं। लेकिन कहीं कुछ नहीं हुआ।
सुरेंद्र यादव।
गर्मियों में टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। जलसंस्थान से एक- दो टैंकर ही पानी क्षेत्र में आता है, जिसमें दो- चार डिब्बे पानी मिलना भी मुश्किल रहता है।
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लक्ष्मी देवी।
गर्मियों में पानी का टैंकर खरीद कर मंगाना पड़ता है। ज्यादा गर्मी पड़ने पर चार सौ का टैंकर सात सौ रुपये तक में खरीदना पड़ता है।
डॉ. जमुना प्रसाद पुरोहित।
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महानगर में 29 से अधिक जल संकटग्रस्त क्षेत्र हैं, जिनमें गर्मी की शुरुआत होते ही हैंडपंपों से पानी निकलना बंद होने लगता है। इनमें करगुवां भी शामिल है। इस क्षेत्र में पेयजल पाइपलाइन नहीं है। यहां की आबादी निजी बोरिंग और हैंडपंप पर निर्भर है। गर्मियों में हैंडपंप और बोरिंग साथ छोड़ देती हैं। इसके बाद इक्का-दुक्का चालू सरकारी हैंडपंप ही लोगों का सहारा बनते हैं। अभी से यहां के 20 में से 17 हैंडपंप सूख गए हैं। हैंडपंप जिनमें पानी निकल रहा है लोग उनसे ही किसी तरह काम चला रहे हैं।
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क्षेत्र के अधिकांश हैंडपंप सूख गए हैं। एक व्यक्ति की बोरिंग चल रही है उसके यहां से पानी भरकर लाते हैं। वह भी गर्मी में सूख जाती है।
पुष्पा देवी।
अभी से हैंडपंपों ने सूखना शूरू कर दिया है। कुछ के हत्थे व अन्य उपकरण खराब हैं। ऐसी स्थिति में गर्मियों कैसे कटेगी? कुछ समझ नहीं आ रहा।
गुड्डू कुशवाहा।
मैं पानी की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री, महापौर और जल संस्थान तक में ई मेल और हेल्प लाइन नंबरों पर शिकायत कर चुकी हूं। लेकिन कहीं कुछ नहीं हुआ।
सुरेंद्र यादव।
गर्मियों में टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। जलसंस्थान से एक- दो टैंकर ही पानी क्षेत्र में आता है, जिसमें दो- चार डिब्बे पानी मिलना भी मुश्किल रहता है।
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लक्ष्मी देवी।
गर्मियों में पानी का टैंकर खरीद कर मंगाना पड़ता है। ज्यादा गर्मी पड़ने पर चार सौ का टैंकर सात सौ रुपये तक में खरीदना पड़ता है।
डॉ. जमुना प्रसाद पुरोहित।