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बामौर के असिचिंत इलाकों तक पहुंचेगा पानी
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झांसी। गंभीर सूखे से जूझ रहे बामौर ब्लॉक के दो दर्जन से अधिक इलाकों भी सिचिंत हो सकते हैं। सिंचाई विभाग डिकौली गांव के पास मिले एक बड़े जलाशय को विकसित करने की कोशिश कर रहा है। तकनीकी टीम के यहां बेतवा नदी के अपस्ट्रीम धारा से करीब 12,500 क्यूसेक पानी निरंतर मिलने की पुष्टि के बाद इसके दूसरे तकनीकी पहलू खंगाले जा रहे हैं। अभियंताओं का कहना है कि इनकी पुष्टि होने पर नई नहर योजना आरंभ होने की संभावना बढ़ जाएगी।
जनपद में बामौर ब्लॉक के कई इलाके ड्राई जोन में आते हैं। यहां न सिर्फ भूजल स्तर काफी नीचे है बल्कि यहां के गांव नहरों के टेल प्वांइट पर स्थित हैं। इस वजह से पानी के लिए किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है। गर्मियों के दौरान यहां से गुजरने वाली बेतवा नदी भी करीब सूख जाती है। डिकौली तक इसमें नाममात्र का पानी बचता है। कुछ माह पहले डिकौली में पानी के विशाल जल स्रोत के बारे में मालूम चला लेकिन, अभियंताओं को पानी की निरंतरता को लेकर संशय था। इसकी पड़ताल के लिए लखनऊ से एक टीम बुलाई गई। उसने यहां करीब 12500 क्यूसिक पानी के निरंतर रिसाव की पुष्टि की है। इसकी पुष्टि के बाद अब इसे सिंचाई में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। अभियंताओं का कहना है जलाशय में निरंतर डिस्चार्ज मिलने से नई नहर योजना आरंभ हो सकेगी। इससे डिकौली समेत आसपास के दो दर्जन से अधिक गांव के असिंचित इलाकों को सिचिंत किया जा सकेगा। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती इसे आसपास के गांवों तक पहुंचाने के लिए ढांचा तैयार करने की है। इन सबको लेकर रास्ता तलाशने की कोशिश की जा रही है। कोरोना काल आरंभ हो जाने से यह काम काफी धीमा भी हो गया है। अधिशाषी अभियंता उमेश कुमार के मुताबिक निरंतर डिस्चार्ज मिलने से इन इलाकों तक पानी पहुंचने की उम्मीद पैदा हुई है। अभी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
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जनपद में बामौर ब्लॉक के कई इलाके ड्राई जोन में आते हैं। यहां न सिर्फ भूजल स्तर काफी नीचे है बल्कि यहां के गांव नहरों के टेल प्वांइट पर स्थित हैं। इस वजह से पानी के लिए किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है। गर्मियों के दौरान यहां से गुजरने वाली बेतवा नदी भी करीब सूख जाती है। डिकौली तक इसमें नाममात्र का पानी बचता है। कुछ माह पहले डिकौली में पानी के विशाल जल स्रोत के बारे में मालूम चला लेकिन, अभियंताओं को पानी की निरंतरता को लेकर संशय था। इसकी पड़ताल के लिए लखनऊ से एक टीम बुलाई गई। उसने यहां करीब 12500 क्यूसिक पानी के निरंतर रिसाव की पुष्टि की है। इसकी पुष्टि के बाद अब इसे सिंचाई में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। अभियंताओं का कहना है जलाशय में निरंतर डिस्चार्ज मिलने से नई नहर योजना आरंभ हो सकेगी। इससे डिकौली समेत आसपास के दो दर्जन से अधिक गांव के असिंचित इलाकों को सिचिंत किया जा सकेगा। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती इसे आसपास के गांवों तक पहुंचाने के लिए ढांचा तैयार करने की है। इन सबको लेकर रास्ता तलाशने की कोशिश की जा रही है। कोरोना काल आरंभ हो जाने से यह काम काफी धीमा भी हो गया है। अधिशाषी अभियंता उमेश कुमार के मुताबिक निरंतर डिस्चार्ज मिलने से इन इलाकों तक पानी पहुंचने की उम्मीद पैदा हुई है। अभी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
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