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बुंदेलखंड में पशुओं के लिए नहीं है पानी का इंतजाम

Fri, 15 Apr 2016 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 15 Apr 2016 01:57 AM IST
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water not available in bundelkhand for thrusty animals
no water - फोटो : demo pic
झांसी। सूखे की त्रासदी से जूझ रहे बुंदेलखंड में परेशानियां दिनों दिन बढ़ती जा रहीं हैं। आने वाले दिनों में पशुओं के लिए पानी का भीषण संकट सामने आने वाला है। इस बार दूसरे जल स्रोतों के जरिए तालाब-पोखर भरने को पानी की कमी दिखाई दे रही है। जिले में बमुश्किल चार-पांच दिन ही नहर चल सकेंगी अगर इस दौरान इन्हें नहीं भरा जा सका तो यह सूखे ही रह जाएंगे।
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बुंदेलखंड में गर्मी के शुरुआती दौर में ही गांव-गांव में अन्न व जल का संकट गहराया गया है। हैंडपंप व कुएं जवाब देने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पेयजल का मुश्किल से इंतजाम कर पा रहे हैं। स्थिति यह है कि पशुओं को भी केवल उतना ही पानी पिलाया जा रहा है, जितने में वह जीवित रहें। किसान पशुओं की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं। यह हालात तब हैं, जब गर्मी का प्रचंड वेग आना अभी बाकी है, जो मई से शुरू होकर मानसून के आने तक चलेगा। मनुष्यों की प्यास बुझाने के लिए अप्रैल माह के अंत से पेयजल टैंकर पहुंचाए जाने लगेंगे। लेकिन, पशुओं को तालाब-पोखरों का ही सहारा है, जिले में इनकी संख्या 286 है। इनमें से ज्यादातर में पानी खत्म हो चुका है। इन तालाबों को सिंचाई विभाग के बेतवा प्रखंड द्वारा 93 छोटी-बड़ी नहरों के माध्यम से भरा जाता है। इसके लिए पंद्रह मई से पंद्रह से बीस दिन तक नहरें चलाई जाती हैं। लेकिन, इस बार पशुओं के पेयजल का कोटा पहले ही खत्म हो चुका है। सूखे में सिंचाई के लिए खेतों को पानी देने के लिए पहले ही अतिरिक्त समय जनवरी तक नहरें चलाई जा चुकी हैं। ऐसे में सिंचाई विभाग मुश्किल से चार-पांच दिन ही नहरें चला पाएगा, वह भी पानी की उपलब्धता की स्थिति में। क्योंकि, तेज धूप की वजह से बचेखुचे पानी पर भी वाष्प बनकर उड़ने का खतरा मंडरा रहा है।
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सिंचाई विभाग बेतवा प्रखंड के अधिशासी अभियंता एम एल अग्रवाल ने बताया कि सिंचाई के लिए नहरें अतिरिक्त चलाए जाने से गर्मी में पशुओं के लिए बचाकर रखा जाना वाला पानी का कोटा खत्म हो गया है। रोस्टर के मुताबिक 15 मई से जैसे - तैसे चार-पांच दिन ही नहरें चलाई जा सकेंगी। लेकिन, वह भी पानी बचने की स्थिति में। क्योंकि, पानी तलहटी में है। तेज गर्मी की वजह से इसके वाष्प बनकर उड़ने का खतरा बना हुआ है। यह स्थिति किसानों को बताई जा चुकी है।
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पाताल में ढाई सौ फीट नीचे खोजा जा रहा पानी
झांसी। बारिश न होने की वजह से बुंदेलखंड में पाताली पानी बेहद नीचे खिसक चुका है। सामान्य दिनों में जहां अधिकतम 70 से 80 फ ीट की गहराई पर पानी मिल जाता था, वहीं अब यह कई स्थानों पर ढाई सौ फ ीट पर पहुंच गया है। जल निगम को जालौन जिले मेें हैंडपंप रीबोर के लिए ढ़ाई सौ फीट पर पानी मिल रहा है। जल निगम के मुख्य अभियंता राजेश मित्तल ने बताया कि इस बार हालात खराब है। जालौन में पानी के लिए ढाई सौ फुट तक बोर करना पड़ रहा है।


पैसा देने में सरकार कर रही कंजूसी
झांसी। सूखे से निपटने के लिए झांसी में 2.59 करोड़ रुपये की लागत से 446, जालौन में 2.31 करोड़ से 400 तथा ललितपुर जनपद में 3.71 करोड़ से 616 हैंडपंप रीबोर किए जाने हैं। लेकिन, इसके लिए अब जल निगम को धनराशि का आवंटन नहीं किया गया, जिससे निगम को उधारी पर काम शुरू करना पड़ा है। जल निगम के मुख्य अभियंता राजेंद्र मित्तल ने बताया कि तीनों जनपदों के लिए शासन ने 1.74 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की  है, परंतु यह अभी नहीं मिली है।
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