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Jhansi News: डिजिटल जमाने में बही-खातों में चल रहे मालखाने

Thu, 05 Jun 2025 01:52 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 05 Jun 2025 01:52 AM IST
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Warehouses running on ledgers in the digital age

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। तेजी से डिजिटल हो रही दुनिया में भी पुलिस के मालखाने बही-खातों में चल रहे हैं। इनका ब्यौरा आज तक डिजिटल नहीं हो सका, जबकि रोजाना कोर्ट में पुलिस को माल मुकदमाती पेश करना पड़ता है। माल मुकदमाती के ढेर लगने से कई बार कोर्ट में बतौर साक्ष्य पेश होने वाली वस्तुएं नहीं मिल पातीं। इससे पुलिसकर्मियों को फटकार तक खानी पड़ती है। इसके बावजूद थानों के मालखानों की दशा नहीं सुधर रही। मालखानों में 50 साल से वस्तुएं रखी हैं।



किसी भी थाने में मालखाना सबसे महत्वपूर्ण होता है। पुलिस जिस भी समान को जब्त करती है, वह यहीं रखा जाता है। इनकी बाकायदा सूची तैयार होती है। इसका एक रजिस्टर माल मुकदमाती बनता है, जहां सारे सामान को अंकित किया जाता है। इस पर केस नंबर के साथ कागज चस्पा होता है। संबंधित मामलों के निस्तारित न होने तक यह मुकदमाती माल कहलाते हैं। पुलिस सेवा नियमावली में थाने का प्रभारी अलग निरीक्षक होता है, जबकि थाने के मालखाने का प्रभारी हेड मुहर्रिर होता है। मालखाने के अंदर सुई से लेकर रखी हर वस्तु का हिसाब-किताब उसे रखना होता है।
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कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस को इसे वहां पेश करना होता है, लेकिन रोजाना बरामद होने वाली वस्तुओं के चलते मालखाने में इनका अंबार लग जाता है। ऐसे में रजिस्टर के सहारे खोज पाना आसान नहीं होता। कई बार पुलिस को समय पर मुकदमाती माल न पेश करने के चलते अदालत से फटकार खानी पड़ती है। फटकार के बाद भी जब मुकदमाती माल पेश नहीं होता तब मजबूरन अदालत आदेश करती है।
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