{"_id":"5ed559718ebc3e909665110e","slug":"vocal-for-local-jhansi-news-jhs1680594136","type":"story","status":"publish","title_hn":"विदेशी ब्रांड को टक्कर दे रहे बुंदेलों द्वारा बनाए गए मास्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेशी ब्रांड को टक्कर दे रहे बुंदेलों द्वारा बनाए गए मास्क
विज्ञापन
सीपरी बाजार में रंग बिरंगे माक्स बनाते दर्जी अनिल साहू व एक बच्ची के लिए माक्स पसंद करती महिला।
झांसी। कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के कारण जहां तमाम कारोबार ठप हुए, झांसी वालों ने उम्मीद नहीं हारी। वक्त की मांग समझते हुए बड़ी तादाद में मास्क बनाना शुरू कर दिया। बेहतर गुणवत्ता वाले मास्क का अधिक उत्पादन होने से एक ओर स्थानीय लोगों को रोजगार मिला वहीं, क्षेत्रवासियों को अपनी रक्षा के लिए सस्ते और अच्छे मास्क मिले। इससे महंगे मास्क बनाने वाली नामचीन विदेशी कंपनियों की मॉनोपॉली टूटी। बाजार में टिके रहने के लिए मजबूरन उन्हें भी कीमत कम करनी पड़ीं। 200 रुपये वाला जो एन 95 मास्क बाजार में बमुश्किल मिल रहा था उसका मूल्य अब 40 रुपये रह गया है। वहीं, 40 रुपये तक में मिलने वाले मास्क अब थोक में तीन रुपये के हिसाब से उपलब्ध हैं। जिले भर में कोरोना संक्रमण काल के दौरान करीब तीन लाख से अधिक मास्क तैयार किए गए।झांसी में बन रहे मास्क की मांग जिले तक ही सीमित नहीं है, बुंदेलखंड के अन्य जिलों में भी इनकी आपूर्ति हो रही है।
----------
केस एक
लहरगिर्द में बुटीक चलाने वाली कीर्ति सोनी का काम भी लॉकडाउन के दौरान ठप हो गया था। ऐसे में उन्होंने मास्क बनाने शुरू कर दिए। अब तक एक हजार से अधिक मास्क बना चुकी हैं। बुंदेलखंड की कई संस्थाओं ने उनसे मास्क लेकर वितरित किए हैं। वे कहती हैं कि मास्क का काम अच्छा चल रहा है। मेहनत कम लगती है और सही दाम मिल जाते हैं।
---------
केस दो
हरिकिशन डिग्री कॉलेज रोड पर टेलरिंग का काम करने वाले लक्ष्मण भी इन दिनों मास्क सिल रहे हैं। अब तक तीन हजार मास्क सिल चुके हैं। वे बताते हैं कि 10 रुपये का एक मास्क देते हैं। अगर कोई जरूरतमंद होता है, तो उसे मुफ्त में दे देते हैं। इन दिनों झांसी के मास्क बुंदेलखंड भर में बिक रहे हैं।
विज्ञापन
----------
केस तीन
सीपरी बाजार निवासी अनिल साहू साड़ी में फाल लगाने और पीको काम करते थे। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने मास्क बनाने का काम शुरू कर दिया। अब तक चार हजार मास्क बना चुके हैं। जिसे वे 20 रुपये से 30 रुपये तक बेच रहे हैं। उनके मास्क लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
----------------
स्वयं सहायता समूह भी बना रहे मास्क
जिले में मास्क की मांग बढ़ी तो स्वंय सहायता समूहों को भी मास्क बनाने का काम मिला। जिले में अब तक 117 स्वंय सहायता समूहों की 243 महिलाएं 75 हजार मास्क बना चुकी हैं। इन मास्क को जिले के तमाम विभागों के साथ कई औद्योगिक संस्थानों में दिया गया है। स्वयं सहायता समूहों को 25 हजार मास्क बनाने का भी आर्डर मिला है। वहीं जेल मेें 4200 और पुलिस लाइन में छह हजार मास्क बनाकर वितरित कराए गए। वहीं ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान आरसेटी ने 7450 मास्क बनवाए हैं।
--------
बाजार में अब काफी सस्ते मास्क उपलब्ध हैं। थ्री लेयर मास्क थोक में तीन रुपये में मिल रहा है। इसके अलावा एन 95 मास्क की कीमतों में भी काफी गिरावट आई है। साथ ही सैनिटाइजर की दरों में भी काफी गिरावट आई है। 48 रुपये में 200 एमएल, 98 में 500 एमएल और 700 रुपये में पांच लीटर सैनिटाइजर मिल रहा है। पीपीई किट की दरों भी 50 फीसद तक गिरावट हुई है।
पीयूषनायक, थोक दवा विक्रेता
---------
मास्क की कीमतों में अब गिरावट आई है। लोग स्थानीय तौर पर सिले गए मास्क को अधिक खरीद रहे हैं। स्थानीय तौर पर मास्क अधिक बनाए जाने लगे हैं। दुकान पर जिले के तमाम जगहों से मास्क बनकर आ रहे हैं। एन 95 मास्क 40 रुपये का मिल रहा है। सैनिटाइजर के दाम भी घट गए हैं।
नितिन मोदी, थोक दवा विक्रेता
विज्ञापन
----------
केस एक
लहरगिर्द में बुटीक चलाने वाली कीर्ति सोनी का काम भी लॉकडाउन के दौरान ठप हो गया था। ऐसे में उन्होंने मास्क बनाने शुरू कर दिए। अब तक एक हजार से अधिक मास्क बना चुकी हैं। बुंदेलखंड की कई संस्थाओं ने उनसे मास्क लेकर वितरित किए हैं। वे कहती हैं कि मास्क का काम अच्छा चल रहा है। मेहनत कम लगती है और सही दाम मिल जाते हैं।
विज्ञापन
---------
केस दो
हरिकिशन डिग्री कॉलेज रोड पर टेलरिंग का काम करने वाले लक्ष्मण भी इन दिनों मास्क सिल रहे हैं। अब तक तीन हजार मास्क सिल चुके हैं। वे बताते हैं कि 10 रुपये का एक मास्क देते हैं। अगर कोई जरूरतमंद होता है, तो उसे मुफ्त में दे देते हैं। इन दिनों झांसी के मास्क बुंदेलखंड भर में बिक रहे हैं।
विज्ञापन
----------
केस तीन
सीपरी बाजार निवासी अनिल साहू साड़ी में फाल लगाने और पीको काम करते थे। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने मास्क बनाने का काम शुरू कर दिया। अब तक चार हजार मास्क बना चुके हैं। जिसे वे 20 रुपये से 30 रुपये तक बेच रहे हैं। उनके मास्क लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
----------------
स्वयं सहायता समूह भी बना रहे मास्क
जिले में मास्क की मांग बढ़ी तो स्वंय सहायता समूहों को भी मास्क बनाने का काम मिला। जिले में अब तक 117 स्वंय सहायता समूहों की 243 महिलाएं 75 हजार मास्क बना चुकी हैं। इन मास्क को जिले के तमाम विभागों के साथ कई औद्योगिक संस्थानों में दिया गया है। स्वयं सहायता समूहों को 25 हजार मास्क बनाने का भी आर्डर मिला है। वहीं जेल मेें 4200 और पुलिस लाइन में छह हजार मास्क बनाकर वितरित कराए गए। वहीं ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान आरसेटी ने 7450 मास्क बनवाए हैं।
--------
बाजार में अब काफी सस्ते मास्क उपलब्ध हैं। थ्री लेयर मास्क थोक में तीन रुपये में मिल रहा है। इसके अलावा एन 95 मास्क की कीमतों में भी काफी गिरावट आई है। साथ ही सैनिटाइजर की दरों में भी काफी गिरावट आई है। 48 रुपये में 200 एमएल, 98 में 500 एमएल और 700 रुपये में पांच लीटर सैनिटाइजर मिल रहा है। पीपीई किट की दरों भी 50 फीसद तक गिरावट हुई है।
पीयूषनायक, थोक दवा विक्रेता
---------
मास्क की कीमतों में अब गिरावट आई है। लोग स्थानीय तौर पर सिले गए मास्क को अधिक खरीद रहे हैं। स्थानीय तौर पर मास्क अधिक बनाए जाने लगे हैं। दुकान पर जिले के तमाम जगहों से मास्क बनकर आ रहे हैं। एन 95 मास्क 40 रुपये का मिल रहा है। सैनिटाइजर के दाम भी घट गए हैं।
नितिन मोदी, थोक दवा विक्रेता