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जब किसी ने नहीं सुना तो ग्रामीणों ने नाले पर खुद ही बना लिया पुल

Sat, 05 Sep 2020 11:40 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2020 11:40 PM IST
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villagers construct bridge by their own
betwa river - फोटो : betwa river
पाली (ललितपुर)। पाली क्षेत्र के बालाबेहट की सहरिया बस्ती के ग्रामीणों ने वह कर दिखाया जो आज तक शासन- प्रशासन नहीं कर सका। सहरिया आदिवासियों की बस्ती नाले की तरफ है और उनके खेत नाले के दूसरी तरफ। बरसात के दिनों में उन्हें नाले के पानी में उतरकर खेतों तक जाना पड़ता था। उन्होंने सरकारी नुमाइंदों और जनप्रतिनिधियों से नाले पर पुल बनाने के लिए कई बार गुहार लगाई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। ऐसे में उन्होंने शासन-प्रशासन को आइना दिखाते हुए श्रमदान कर नाले पर एक अस्थायी पुल बनाया है, जिससे अब वे पानी में न उतरकर नाले के ऊपर बनाए गए अस्थायी पुल से खेतों से घर और घर से खेतों की ओर आ जा रहे हैं।
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बालाबेहट कस्बे से बाहर एक नाला बहता है। नाले के एक तरफ बस्ती है तो दूसरी तरफ ग्रामीणों के खेत हैं। बस्ती के लोगों को अपने खेतों पर काम करने और रात में फसलों की रखवाली करने के लिए नाले पर पुल न होने से दुश्वारियों का सामना करना पड़ता था। बरसात के दिनों में नाला जब उफान पर होता था तब ग्रामीणों को तैरकर नाला पार करना पड़ता था। इस समस्या से निजात पाने के लिए ग्रामीणों ने शासन और जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी कभी नहीं सुनी गई। थक हारकर उन्होंने समाधान निकाला और सरकारी नुमाइंदों को आइना दिखाते हुए श्रमदान कर बांस, लकड़ी और घास से नाले पर अस्थायी पुल बना दिया जिससे उन्हें अब बरसात के दिनों में नाला पार करने के लिए मुश्किल नहीं आएगी।
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खेतों पर काम करने जाने के लिए दिक्कत होती थी। श्रमदान कर लकड़ी का पुल बना लिया गया है, जिससे आवागमन में सहूलियत हो गई।
- सुमित कटारे
तमाम प्रयासों के बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो हमलोगों ने श्रमदान कर कच्चा पुल बनाने का निर्णय लिया, अब हमें पानी में उतरकर नाल पार नहीं करना पड़ता।
- ध्रुव रावत
शासन- प्रशासन क्या जनप्रतिनिधियों तक से गुहार लगाई गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई तो अपनी मुश्किल दूर करने के लिए आदिवासी बस्ती ने अस्थायी पुल तैयार कर लिया।
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- राजकुमार बासुदेव
प्रशासनिक अनदेखी से क्षुब्ध हो मैंने बस्ती के लोगों से मिलकर अस्थायी पुल की योजना बनाई। सभी ने समर्थन किया और श्रमदान कर पुल तैयार किया। आवागमन बेहतर होने से लोग खुश हैं।
- हीरालाल प्रजापति
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