{"_id":"c21a6f973ba3ec1ae2ae0232dc9f0fc3","slug":"very-few-have-jobs-now-the-real-work-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बहुत कर ली आराम की नौकरी, अब असली काम करो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बहुत कर ली आराम की नौकरी, अब असली काम करो
ब्यूरो
Updated Mon, 14 Dec 2015 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। रेलवे कंट्रोल रूम व अन्य विभागों में वर्षों से जमे मेल ड्राइवरों को अब ट्रेन चलानी होगी। इन सभी कर्मचारियों को मुख्य लाइनों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जल्द ही यह ड्राइवर ट्रेनों को दौड़ाते नजर आएंगे। हालांकि, रेल यूनियनें इसे कोहरे के समय सुरक्षा से खिलवाड़ बता रही हैं।
झांसी रेलवे स्टेशन पर तैनात करीब डेढ़ दर्जन मेल चालक ट्रेन चलाने की जगह कंट्रोल रूम व अन्य विभागीय कार्यों में वर्षों से काम कर रहे हैं। इसे कर्मचारियों की कमी कहें या सिफारिश अथवा यूनियनों की हनक कि इनसे ट्रेन चलवाने की पहल किसी ने नहीं की।
यही कारण है कि जब यह कर्मचारी आफिस में काम पर लगाए गए थे, तब सहायक चालक थे और अब आफिस में काम करते-करते ही मेल चालक बन गए। इनमें अधिकांश कर्मचारी दस से पच्चीस साल से एक ही जगह जमे हैं। मगर, अब एक अफसर का आदेश उनके लिए भारी पड़ गया है। अफसर ने उक्त सभी कर्मचारियों को ट्रेन चलाने के आदेश दिए हैं। इन सभी कर्मचारियों को झांसी-दिल्ली, झांसी-भोपाल व झांसी-कानपुर मुख्य ट्रैक पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह से यह ड्राइवर ट्रेनों को दौड़ाते नजर आएंगे।
विज्ञापन
कहीं यह संरक्षा से खिलवाड़ तो नहीं
कोहरे के दौरान रेल संचालन में सबसे अधिक सतर्कता बरतनी पड़ती है। आम दिनों में रनिंग स्टाफ को झांसी से नई दिल्ली सवारी गाड़ी ले जाने में छह से आठ घंटे का समय लगता है। जबकि, कोहरे में यही दूरी तय करने में पंद्रह से अठारह घंटे लग जाते हैं। जिन कर्मचारियों ने सालों से ट्रेन नहीं चलाई, ऐसे में उन कर्मचारियों से ट्रेन चलवाना कहीं संरक्षा से खिलवाड़ तो नहीं है। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी गिरीश कंचन ने बताया कि सब कुछ नियम के अनुसार हो रहा है। ऐसे ड्राइवरों को पूर्ण प्रशिक्षित कर लाइन पर भेजा जाएगा।
यूनियन से विवाद का खामियाजा तो नहीं भुगत रहे कर्मी
कुछ माह पहले एक यूनियन के पदाधिकारियों का ट्रेन संचालन से जुड़े एक अफसर से विवाद हो गया था। चर्चा है कि वर्षों से कंट्रोल में जमे इन कर्मचारियों को इस विवाद का ही खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन
झांसी रेलवे स्टेशन पर तैनात करीब डेढ़ दर्जन मेल चालक ट्रेन चलाने की जगह कंट्रोल रूम व अन्य विभागीय कार्यों में वर्षों से काम कर रहे हैं। इसे कर्मचारियों की कमी कहें या सिफारिश अथवा यूनियनों की हनक कि इनसे ट्रेन चलवाने की पहल किसी ने नहीं की।
विज्ञापन
यही कारण है कि जब यह कर्मचारी आफिस में काम पर लगाए गए थे, तब सहायक चालक थे और अब आफिस में काम करते-करते ही मेल चालक बन गए। इनमें अधिकांश कर्मचारी दस से पच्चीस साल से एक ही जगह जमे हैं। मगर, अब एक अफसर का आदेश उनके लिए भारी पड़ गया है। अफसर ने उक्त सभी कर्मचारियों को ट्रेन चलाने के आदेश दिए हैं। इन सभी कर्मचारियों को झांसी-दिल्ली, झांसी-भोपाल व झांसी-कानपुर मुख्य ट्रैक पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह से यह ड्राइवर ट्रेनों को दौड़ाते नजर आएंगे।
विज्ञापन
कहीं यह संरक्षा से खिलवाड़ तो नहीं
कोहरे के दौरान रेल संचालन में सबसे अधिक सतर्कता बरतनी पड़ती है। आम दिनों में रनिंग स्टाफ को झांसी से नई दिल्ली सवारी गाड़ी ले जाने में छह से आठ घंटे का समय लगता है। जबकि, कोहरे में यही दूरी तय करने में पंद्रह से अठारह घंटे लग जाते हैं। जिन कर्मचारियों ने सालों से ट्रेन नहीं चलाई, ऐसे में उन कर्मचारियों से ट्रेन चलवाना कहीं संरक्षा से खिलवाड़ तो नहीं है। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी गिरीश कंचन ने बताया कि सब कुछ नियम के अनुसार हो रहा है। ऐसे ड्राइवरों को पूर्ण प्रशिक्षित कर लाइन पर भेजा जाएगा।
यूनियन से विवाद का खामियाजा तो नहीं भुगत रहे कर्मी
कुछ माह पहले एक यूनियन के पदाधिकारियों का ट्रेन संचालन से जुड़े एक अफसर से विवाद हो गया था। चर्चा है कि वर्षों से कंट्रोल में जमे इन कर्मचारियों को इस विवाद का ही खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।