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रेंजरों की कमी से जूझ रहा वन विभाग, कैसे हो वनों की निगरानी
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झांसी। सालों से वन विभाग में क्षेत्रीय वन अधिकारियों (रेंजरों) की कमी है। मंडल में वन विभाग के रेंजरों के 23 पद सृजित हैं। लेकिन सिर्फ 13 ही रेंजरों से विभाग द्वारा वनों की निगरानी कराना पड़ रही है।
मंडल में झांसी में 304.05, जालौन में 581.29 व ललितपुर में 247.21 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में जंगल फैला हुआ है। इन जंगलों में विलायती बबूल, करधई, बबूल, रेवजा, खेर, सलई, शीशम व सागौन के अनगिनत पेड़ लगे हुए हैं। यह सभी पेड़ काफी मूल्यवान माने जाते हैं। इन पेड़ों की निगरानी व वन्य जीवों की सुरक्षा का जिम्मा वन विभाग के कंधों पर ही होता है। विभाग द्वारा पेड़ों व वन्य जीवों की सुरक्षा की जिम्मेंदारी रेंजरों को दी गई है। जिसके चलते रेजरों को वनों की सुरक्षा की मुख्य धुरी को माना जाता है। लेकिन सालों से रेंजरों की कमी होने के कारण जंगलों में लगे बेशकीमती पेड़ों की सुरक्षा में सेंध लगने का खतरा हर समय लगा रहता है।
इस संबंध में वन संरक्षक एके सिंह ने बताया कि रेंजरों की कमी को शासन को अवगत करा दिया गया है। वनों की सुरक्षा के लिए रेंजरों के साथ ही डिप्टी रेंजरों व अन्य कर्मचारियों को लगाया गया है। वहीं समय-समय पर अधिकारियों द्वारा वनों की जांच भी की जाती है।
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मंडल में झांसी में 304.05, जालौन में 581.29 व ललितपुर में 247.21 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में जंगल फैला हुआ है। इन जंगलों में विलायती बबूल, करधई, बबूल, रेवजा, खेर, सलई, शीशम व सागौन के अनगिनत पेड़ लगे हुए हैं। यह सभी पेड़ काफी मूल्यवान माने जाते हैं। इन पेड़ों की निगरानी व वन्य जीवों की सुरक्षा का जिम्मा वन विभाग के कंधों पर ही होता है। विभाग द्वारा पेड़ों व वन्य जीवों की सुरक्षा की जिम्मेंदारी रेंजरों को दी गई है। जिसके चलते रेजरों को वनों की सुरक्षा की मुख्य धुरी को माना जाता है। लेकिन सालों से रेंजरों की कमी होने के कारण जंगलों में लगे बेशकीमती पेड़ों की सुरक्षा में सेंध लगने का खतरा हर समय लगा रहता है।
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इस संबंध में वन संरक्षक एके सिंह ने बताया कि रेंजरों की कमी को शासन को अवगत करा दिया गया है। वनों की सुरक्षा के लिए रेंजरों के साथ ही डिप्टी रेंजरों व अन्य कर्मचारियों को लगाया गया है। वहीं समय-समय पर अधिकारियों द्वारा वनों की जांच भी की जाती है।
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