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सुरक्षा के लिए जरूरी है वैक्सीन, लगवाएं सुरक्षा की पूर्ण गारंटी पाएं
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झांसी। कोरोना ड्यूटी के दौरान फ्रंट लाइन वॉरियर ने खूब मेहनत की। खुद की जान जोखिम में डालकर वो अपने सेवाएं देते रहे मगर जब कोरोना की वैक्सीन लगवाने का समय आया तो उन्होंने पैर पीछे खींच लिए। बताया गया कि पिछले दो दिनों में लगभग 50 फीसदी ही फ्रंट लाइन वर्कर्स ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई है। जबकि, वैक्सीन ही कोरोना से बचाव के लिए सुरक्षा की पूर्ण गारंटी है।
11 फरवरी को झांसी में 13 सत्र स्थल पर कोरोना की वैक्सीन लगाई गई थी। इसमें सीएचसी बामौर में 95 फीसदी, सीएचसी बंगरा में 94 प्रतिशत, सीएचसी मोंठ में 90, कमिश्नरी में 84 और कलेक्ट्रेट में 83 प्रतिशत अधिकारियों, कर्मचारियों ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई थी। सबसे कम पैरामेडिकल कॉलेज में 31 प्रतिशत, नगर निगम शेल्टर होम पिछोर में 37 और नगर निगम शेल्टर होम डढ़ियापुरा में 40 प्रतिशत को कोरोना की वैक्सीन लगी थी। कुल मिलाकर 3669 में से 2014 अधिकारियों, कर्मचारियों ने वैक्सीन लगवाई, जो कि लक्ष्य के सापेक्ष 55 प्रतिशत है। 12 फरवरी को भी कोरोना टीकाकरण के लिए 13 सत्र स्थल बनाए गए। पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में सर्वाधिक 70 फीसदी, जबकि, पीएसी राजगढ़ में सबसे कम 26.94 प्रतिशत अधिकारियों, कर्मचारियों ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई। इस दिन 4379 लक्ष्य के सापेक्ष 1914 लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगी, जो कि लक्ष्य का 43.71 प्रतिशत है। वहीं, दोनों दिवसों की बात करें तो 49.35 प्रतिशत लाभार्थियों ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई। जबकि, कोरोना अभी भी खत्म नहीं हुआ है। वायरस लगातार किसी न किसी व्यक्ति को संक्रमित कर रहा है। ऐसे में वैक्सीन ही संक्रमण से बचाव का एकमात्र उपाए है।
दूसरी डोज लगवाने के दो सप्ताह बाद बनती एंटीबॉडी
विशेषज्ञों के मुताबिक पहली या फिर दूसरी डोज लगने के तुरंत बाद एंटीबॉडी नहीं बनती है। पहली वैक्सीन लगने के बाद वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बनने की प्रक्रिया में लगभग 42-43 दिन लग जाते हैं। दूसरी डोज के दो सप्ताह बाद ही एंटीबॉडी बनती है। फिर यदि आप किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में भी आ जाते हैं तो भी कोई दिक्कत नहीं होगी।
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11 फरवरी को झांसी में 13 सत्र स्थल पर कोरोना की वैक्सीन लगाई गई थी। इसमें सीएचसी बामौर में 95 फीसदी, सीएचसी बंगरा में 94 प्रतिशत, सीएचसी मोंठ में 90, कमिश्नरी में 84 और कलेक्ट्रेट में 83 प्रतिशत अधिकारियों, कर्मचारियों ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई थी। सबसे कम पैरामेडिकल कॉलेज में 31 प्रतिशत, नगर निगम शेल्टर होम पिछोर में 37 और नगर निगम शेल्टर होम डढ़ियापुरा में 40 प्रतिशत को कोरोना की वैक्सीन लगी थी। कुल मिलाकर 3669 में से 2014 अधिकारियों, कर्मचारियों ने वैक्सीन लगवाई, जो कि लक्ष्य के सापेक्ष 55 प्रतिशत है। 12 फरवरी को भी कोरोना टीकाकरण के लिए 13 सत्र स्थल बनाए गए। पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में सर्वाधिक 70 फीसदी, जबकि, पीएसी राजगढ़ में सबसे कम 26.94 प्रतिशत अधिकारियों, कर्मचारियों ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई। इस दिन 4379 लक्ष्य के सापेक्ष 1914 लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगी, जो कि लक्ष्य का 43.71 प्रतिशत है। वहीं, दोनों दिवसों की बात करें तो 49.35 प्रतिशत लाभार्थियों ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई। जबकि, कोरोना अभी भी खत्म नहीं हुआ है। वायरस लगातार किसी न किसी व्यक्ति को संक्रमित कर रहा है। ऐसे में वैक्सीन ही संक्रमण से बचाव का एकमात्र उपाए है।
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दूसरी डोज लगवाने के दो सप्ताह बाद बनती एंटीबॉडी
विशेषज्ञों के मुताबिक पहली या फिर दूसरी डोज लगने के तुरंत बाद एंटीबॉडी नहीं बनती है। पहली वैक्सीन लगने के बाद वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बनने की प्रक्रिया में लगभग 42-43 दिन लग जाते हैं। दूसरी डोज के दो सप्ताह बाद ही एंटीबॉडी बनती है। फिर यदि आप किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में भी आ जाते हैं तो भी कोई दिक्कत नहीं होगी।
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