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महाराष्ट्र में नहीं मिल रहा यूपी के मजदूरों को खाना, गर्मी-भूख व प्यास से बेहाल

Thu, 28 May 2020 10:28 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 28 May 2020 10:28 AM IST
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UP laborers are not getting food in Maharashtra
फाइल फोटो - फोटो : PTI
महाराष्ट्र में उत्तर प्रदेश के मजदूरों के लिए खाने का इंतजाम न होने के कारण ट्रेन में सफर के दौरान वे भूख व प्यास से बेहाल रहते हैं। इन लोगों को रेलवे आठ से दस घंटे के अंतराल में एक पानी की बोतल के अलावा चिप्स, बिस्कुट या नमकीन चावल खाने को देता है, जो भूख, प्यास मिटाने के लिए पर्याप्त नहीं होते। इसलिए यह सफर उनके लिए मुसीबत भरा बना हुआ है।
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लॉकडाउन में महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण भारत के अलग- अलग शहरों में फंसे उत्तर प्रदेश के मजदूर व कामगारों को घर पहुंचाने के लिए एक मई से श्रमिक एक्सप्रेस गाड़ियों का संचालन किया जा रहा है। प्रतिदिन 25 से 30 श्रमिक ट्रेनें झांसी के रास्ते गोरखपुर, लखनऊ, ग्वालियर, आगरा की तरफ जा रही हैं। 
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अभी तक पांच सौ श्रमिक गाड़ियां गुजर चुकी हैं।  बुधवार को भी 54 ट्रेनें झांसी से होकर गुजरीं। मगर सबसे बुरा हाल महाराष्ट्र से आ रहे श्रमिकों का हो रहा है। महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे, औरंगाबाद आदि स्टेशनों से श्रमिकों को भेजा जा रहा है। 
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इन स्टेशनों से प्रवासी श्रमिकों के लिए खाने का इंतजाम नहीं किया जा रहा है। इस कारण वे भूखे, प्यासे सफर करने के लिए मजबूर रहते हैं। हालांकि, रेलवे हर यात्री पर सफर के दौरान तीस रुपये खर्च कर रहा है। 

इसमें हर आठ से दस घंटे के दौरान अलग-अलग स्टेशनों पर दस रुपये का बिस्किट पैकेट, दस रुपये का नमकीन पैकेट, एक पानी की बोतल या तीन सौ ग्राम नमकीन चावल, एक पानी की बोतल उपलब्ध करा रहा है। आधी से अधिक ट्रेनों में आईआरसीटीसी व बाकी में रेलवे उपलब्ध करा रहा है। 

मगर इनसे ट्रेन में सवार श्रमिक व कामगारों की भूख नहीं मिट रही है। भीषण गर्मी एक पानी की बोतल भी कुछ देर में खत्म हो जाती है। इस कारण श्रमिक सफर के दौरान बेहद परेशान हो रहे हैं। 

इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे बोर्ड की गाइड लाइन के हिसाब से ही श्रमिक ट्रेनों में खानपान की वस्तुओं का वितरण किया जा रहा है। यह व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क है

मैं मुंबई में प्राइवेट नौकरी करता था। मुंबई से ट्रेन चलने पर खाने को कुछ नहीं मिला। उम्मीद थी कि रास्ते में पैसे देकर खाना तो मिल ही जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भूख प्यास से बुरा हाल है। 
ठाकुर सिंह, अल्मोड़ा। 

मुंबई से मैं श्रमिक एक्सप्रेस में सवार होकर आ रहा हूं। ट्रेन गोरखपुर जा रही थी, इसलिए झांसी में उतरना पड़ा। ट्रेन में सफर के दौरान भूख, प्यास से बुरा हाल रहा। एक- एक पल काटना मुश्किल हो रहा था। 
देवेंद्र सिंह, हल्द्वानी। 

मैं मुंबई से बहराइच जा रहा हूं। मुंबई से ट्रेन में चढ़ते वक्त खाने को नहीं मिला। रास्ते में एक- दो जगह बिस्किट व चिप्स मिले। मगर उनसे भूख नहीं मिट सकी। सफर ने बेहाल कर दिया। 
सिराज अहमद, बहराइच। 

ट्रेन में परिवार के साथ सफर कर रहा था। मुंबई में मुश्किलों से सवार हो सके। खाने- पीने के लिए भी कुछ नहीं ले सके। इस कारण सफर बच्चों के साथ बेहद दुखदायक बना रहा।  
जुगनू, सिद्धार्थ नगर।
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