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बुंदेलखंड के ऐतिहासिक प्राचीन मंदिरों को संवारेगी योगी सरकार
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तलैया मुहल्ला स्थित सुरैयों का बाग में प्राचीन मंदिर जीर्ण शीर्ण व अतिक्रमण की चपेट में। अमर उजा?
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बुंदेलखंड के ऐतिहासिक प्राचीन मंदिरों को संवारेगी योगी सरकार, मांगी रिपोर्ट
सामजय नायक
झांसी। चित्रकूट में विकास कार्य की योजना बनाए जाने के बाद अब योगी सरकार बुंदेलखंड के प्राचीन जीर्णशीर्ण मंदिरों को भी संवारेगी। इसके लिए सरकार ने सन 1857 से पहले के निर्मित मंदिरों के बारे में पुरातत्व विभाग से जानकारी मांगी है। यह काम जिला प्रशासन के सहयोग से किया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि किस मंदिर में कितना काम किया जाना है, जिससे उसकी स्थिति में सुधार हो सके। इसके लिए शासन की ओर से बजट मुहैया कराया जाएगा।
बुंदेलखंड में प्राचीन मंदिरों की भरमार है। झांसी और आसपास के इलाकों में ही शैव, वैष्णव और शाक्त मत के क ई बेहद प्राचीन मंदिर हैं, जो छठवीं सदी से लेकर 18वीं सदी तक के दौरान बनाये गये हैं। इन मंदिरों की वास्तुकला और मूर्तिकला अद्भुत है। इसके अलावा गर्भगृह में बने चित्र अलग ही दिखाई देते हैं। लेकिन, संरक्षण के अभाव में इन पुरा स्थलों का अस्तित्व खतरे में है। कई मंदिर अतिक्रमण की चपेट में हैं। मंदिरों की भूमि का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। कमोबेश यही स्थिति बुंदेलखंड के जिलों में बनाए गए प्राचीन मंदिरों की है। ऐतिहासिक विरासत संवारे यह मंदिर समय के साथ जीर्णशीर्ण हो गए हैं।
लेकिन, अब प्रदेश शासन ने इनकी सुध लेनी शुरू कर दी है। पुरातत्व विभाग को निर्देशित किया है कि वह 1857 से पहले के निर्मित सभी मंदिरों के वर्तमान हाल की रिपोर्ट दे। प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एस के दुबे के अनुसार शासन को यह प्रारंभिक रिपोर्ट 30 अक्तूबर को भेजी जाएगी। अंतिम रिपोर्ट दिसंबर में भेजी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर मंदिरों का जीर्णोद्धार होगा।
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आम नागरिक भी दे सकते हैं सीधी सूचना
प्राचीन मंदिरों को कब्जों एवं अतिक्रमण से बचाने के लिए आम नागरिक अपनी सूचनायें फोटो व अन्य साक्ष्य सहित सीधे पुरातत्व विभाग को दे सकता है, जो शासन को भेजी जाएगी। इसके अलावा जिला प्रशासन 13 सदस्यीय कमेटी भी बनाएगा, जिसमें समाजसेवी, दूरदर्शन, आकाशवाणी के लोग भी शामिल होंगे। यह कमेटी पुरानी रामलीला, तीज त्योहारों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से संबंधित विवरण तथा लोक संस्कृति के बारे में भी जानकारी जुटाकर पुरातत्व विभाग के सहयोग से शासन को देगी।
जगह-जगह हैं जीर्णशीर्ण मंदिर
बुंदेलखंड में एक नहीं, अनेक मंदिरों का हाल खराब है। चिरगांव रमपुरा का राम जानकी मंदिर, दौन का शिव मंदिर, अमरा का मंदिर, ढिकौली के मंदिर, बांदा में नदी के पार के मंदिर, ललितपुर में मड़ावरा किले के मंदिर, जालौन में कोंच नगर में बने प्राचीन मंदिर हों या झांसी शहर में बने मंदिर, अधिकांश का हाल खराब है। इनमें शहर में सुरैयों का बाग, फूटा चौपड़ा स्थित गुसाइयों के शिव मंदिर, सूबेदार रघुनाथ राव नेवालकर द्वितीय द्वारा निर्मित रघुनाथ जी का मंदिर, फूटा चौपड़ा स्थित चतुर्मुख शिवलिंग मंदिर, मार्कण्डेय शिव मंदिर, सती मंदिर, केदारेश्वर महादेव मंदिर आदि शामिल हैं।
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सामजय नायक
झांसी। चित्रकूट में विकास कार्य की योजना बनाए जाने के बाद अब योगी सरकार बुंदेलखंड के प्राचीन जीर्णशीर्ण मंदिरों को भी संवारेगी। इसके लिए सरकार ने सन 1857 से पहले के निर्मित मंदिरों के बारे में पुरातत्व विभाग से जानकारी मांगी है। यह काम जिला प्रशासन के सहयोग से किया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि किस मंदिर में कितना काम किया जाना है, जिससे उसकी स्थिति में सुधार हो सके। इसके लिए शासन की ओर से बजट मुहैया कराया जाएगा।
बुंदेलखंड में प्राचीन मंदिरों की भरमार है। झांसी और आसपास के इलाकों में ही शैव, वैष्णव और शाक्त मत के क ई बेहद प्राचीन मंदिर हैं, जो छठवीं सदी से लेकर 18वीं सदी तक के दौरान बनाये गये हैं। इन मंदिरों की वास्तुकला और मूर्तिकला अद्भुत है। इसके अलावा गर्भगृह में बने चित्र अलग ही दिखाई देते हैं। लेकिन, संरक्षण के अभाव में इन पुरा स्थलों का अस्तित्व खतरे में है। कई मंदिर अतिक्रमण की चपेट में हैं। मंदिरों की भूमि का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। कमोबेश यही स्थिति बुंदेलखंड के जिलों में बनाए गए प्राचीन मंदिरों की है। ऐतिहासिक विरासत संवारे यह मंदिर समय के साथ जीर्णशीर्ण हो गए हैं।
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लेकिन, अब प्रदेश शासन ने इनकी सुध लेनी शुरू कर दी है। पुरातत्व विभाग को निर्देशित किया है कि वह 1857 से पहले के निर्मित सभी मंदिरों के वर्तमान हाल की रिपोर्ट दे। प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एस के दुबे के अनुसार शासन को यह प्रारंभिक रिपोर्ट 30 अक्तूबर को भेजी जाएगी। अंतिम रिपोर्ट दिसंबर में भेजी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर मंदिरों का जीर्णोद्धार होगा।
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आम नागरिक भी दे सकते हैं सीधी सूचना
प्राचीन मंदिरों को कब्जों एवं अतिक्रमण से बचाने के लिए आम नागरिक अपनी सूचनायें फोटो व अन्य साक्ष्य सहित सीधे पुरातत्व विभाग को दे सकता है, जो शासन को भेजी जाएगी। इसके अलावा जिला प्रशासन 13 सदस्यीय कमेटी भी बनाएगा, जिसमें समाजसेवी, दूरदर्शन, आकाशवाणी के लोग भी शामिल होंगे। यह कमेटी पुरानी रामलीला, तीज त्योहारों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से संबंधित विवरण तथा लोक संस्कृति के बारे में भी जानकारी जुटाकर पुरातत्व विभाग के सहयोग से शासन को देगी।
जगह-जगह हैं जीर्णशीर्ण मंदिर
बुंदेलखंड में एक नहीं, अनेक मंदिरों का हाल खराब है। चिरगांव रमपुरा का राम जानकी मंदिर, दौन का शिव मंदिर, अमरा का मंदिर, ढिकौली के मंदिर, बांदा में नदी के पार के मंदिर, ललितपुर में मड़ावरा किले के मंदिर, जालौन में कोंच नगर में बने प्राचीन मंदिर हों या झांसी शहर में बने मंदिर, अधिकांश का हाल खराब है। इनमें शहर में सुरैयों का बाग, फूटा चौपड़ा स्थित गुसाइयों के शिव मंदिर, सूबेदार रघुनाथ राव नेवालकर द्वितीय द्वारा निर्मित रघुनाथ जी का मंदिर, फूटा चौपड़ा स्थित चतुर्मुख शिवलिंग मंदिर, मार्कण्डेय शिव मंदिर, सती मंदिर, केदारेश्वर महादेव मंदिर आदि शामिल हैं।