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बैंकों में दम तोड़ रहे बेरोजगारों के सपने
ब्यूरो
Updated Tue, 22 Dec 2015 12:31 AM IST
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झांसी। बेरोजगारों को स्वरोजगार प्रदान करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रहीं योजनाएं धरातल पर अपना असर नहीं दिखा पा रही हैं। इसका अंदाजा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) व मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना (सीएमजीआरवाई) को देखकर लगाया जा सकता है। स्थिति यह है कि वित्तीय वर्ष अपने अंतिम पड़ाव पर है, परंतु उक्त दोनों योजनाओं की लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति आधी भी नहीं है।
केंद्र सरकार द्वारा संचालित की जाने वाली पीएमईजीपी के तहत बेरोजगारों को स्वयं का रोजगार स्थापित करने के लिए पच्चीस लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। जबकि, सीएमजीआरवाई के तहत दस लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान है।
चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 में ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से जनपद में पीएमईजीपी के तहत 24 इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य है, लेकिन बैंकों द्वारा अब तक 10 ऋण ही स्वीकृत किए गए हैं। सीएमजीआरवाई की स्थिति और भी खराब है। इसके तहत लक्ष्य 26 के सापेक्ष महज छह ऋण ही स्वीकृत हो पाए हैं। उक्त योजनाओं की यह स्थिति तब है जब वित्तीय वर्ष समाप्त होने में केवल तीन माह ही शेष हैं।
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बैंकों ने लौटा दीं 34 फाइलें
झांसी। ऋण के लिए आवेदन करने वाले बेरोजगारों का पैनल द्वारा साक्षात्कार लिया जाता है। साक्षात्कार में विभागीय अधिकारियों के अलावा बैंकों के प्रतिनिधि के रूप में अग्रणी जिला प्रबंधक भी मौजूद रहते हैं। वह बेरोजगारों के आवेदन का परीक्षण कर स्वीकृति प्रदान करते हैं। तदुपरांत, यह आवेदन बैंक भेजे जाते हैं। बावजूद, बैंकों से पीएमईजीपी की 16 व सीएमजीआरवाई की 18 फाइलें लौटा दी गईं हैं। बैंकों की इस कार्यशैली से चयन समिति की उपयोगिता पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
‘बेरोजगारों को ऋण देने में बैंक हीलाहवाली कर रहे हैं। इससे केंद्र व प्रदेश सरकार की रोजगार योजनाएं जनपद में पिछड़ रही हैं।’
- द्वारिका प्रसाद, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी
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केंद्र सरकार द्वारा संचालित की जाने वाली पीएमईजीपी के तहत बेरोजगारों को स्वयं का रोजगार स्थापित करने के लिए पच्चीस लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। जबकि, सीएमजीआरवाई के तहत दस लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान है।
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चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 में ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से जनपद में पीएमईजीपी के तहत 24 इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य है, लेकिन बैंकों द्वारा अब तक 10 ऋण ही स्वीकृत किए गए हैं। सीएमजीआरवाई की स्थिति और भी खराब है। इसके तहत लक्ष्य 26 के सापेक्ष महज छह ऋण ही स्वीकृत हो पाए हैं। उक्त योजनाओं की यह स्थिति तब है जब वित्तीय वर्ष समाप्त होने में केवल तीन माह ही शेष हैं।
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बैंकों ने लौटा दीं 34 फाइलें
झांसी। ऋण के लिए आवेदन करने वाले बेरोजगारों का पैनल द्वारा साक्षात्कार लिया जाता है। साक्षात्कार में विभागीय अधिकारियों के अलावा बैंकों के प्रतिनिधि के रूप में अग्रणी जिला प्रबंधक भी मौजूद रहते हैं। वह बेरोजगारों के आवेदन का परीक्षण कर स्वीकृति प्रदान करते हैं। तदुपरांत, यह आवेदन बैंक भेजे जाते हैं। बावजूद, बैंकों से पीएमईजीपी की 16 व सीएमजीआरवाई की 18 फाइलें लौटा दी गईं हैं। बैंकों की इस कार्यशैली से चयन समिति की उपयोगिता पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
‘बेरोजगारों को ऋण देने में बैंक हीलाहवाली कर रहे हैं। इससे केंद्र व प्रदेश सरकार की रोजगार योजनाएं जनपद में पिछड़ रही हैं।’
- द्वारिका प्रसाद, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी