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Jhansi: झांसी के केतन की कप्तानी में भारत फिर बना एशियाई चैंपियन, 18 गोल से बने टॉप स्कोरर
Mon, 27 Jul 2026 02:29 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Mon, 27 Jul 2026 02:29 AM IST
सार
ओमान के मस्कट में आयोजित एफआईएच यूथ हॉकी फाइव्स एशियन चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मुकाबला नहीं गंवाया और फाइनल में पाकिस्तान को 3-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया।
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मस्कट में आयोजित एफआईएच यूथ हॉकी फाइव्स एशियन चैंपियनशिप में में केतन।
- फोटो : स्वयं
विस्तार
मेजर ध्यानचंद की कर्मभूमि झांसी ने देश को एक और सितारा दिया है। बड़ा बाजार निवासी 15 वर्षीय केतन कुशवाहा ने अपनी कप्तानी और शानदार खेल से भारतीय हॉकी को नई ऊंचाई दी है। ओमान के मस्कट में आयोजित एफआईएच यूथ हॉकी फाइव्स एशियन चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मुकाबला नहीं गंवाया और फाइनल में पाकिस्तान को 3-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े नायक कप्तान केतन रहे। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 18 गोल दागकर न केवल टॉप स्कोरर बनने का गौरव हासिल किया, बल्कि ''मैन ऑफ द चैंपियनशिप'' का पुरस्कार भी अपने नाम किया। फाइनल में भी उन्होंने अहम गोल कर जीत की नींव मजबूत की।
केतन की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह उनकी कप्तानी में भारत की लगातार दूसरी एशियाई स्वर्णिम सफलता है। इससे पहले भी उन्होंने भारतीय टीम को एशिया कप का खिताब दिलाया था। अब उनकी अगुआई में भारत ने एफआईएच यूथ हॉकी फाइव्स विश्व कप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। केतन की सफलता केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि झांसी और बुंदेलखंड के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। केतन का कहना है कि टीम की एकजुटता, कोच और सपोर्ट स्टाफ का मार्गदर्शन तथा खिलाड़ियों का अनुशासन इस जीत की सबसे बड़ी ताकत रहा। उनका मानना है कि यदि खिलाड़ी पूरी ईमानदारी और समर्पण से मेहनत करें तो वे अपने परिवार, प्रदेश और देश का नाम दुनिया में रोशन कर सकते हैं।
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केतन की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह उनकी कप्तानी में भारत की लगातार दूसरी एशियाई स्वर्णिम सफलता है। इससे पहले भी उन्होंने भारतीय टीम को एशिया कप का खिताब दिलाया था। अब उनकी अगुआई में भारत ने एफआईएच यूथ हॉकी फाइव्स विश्व कप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। केतन की सफलता केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि झांसी और बुंदेलखंड के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। केतन का कहना है कि टीम की एकजुटता, कोच और सपोर्ट स्टाफ का मार्गदर्शन तथा खिलाड़ियों का अनुशासन इस जीत की सबसे बड़ी ताकत रहा। उनका मानना है कि यदि खिलाड़ी पूरी ईमानदारी और समर्पण से मेहनत करें तो वे अपने परिवार, प्रदेश और देश का नाम दुनिया में रोशन कर सकते हैं।
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