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उमा के नाम है सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड
Thu, 04 Apr 2019 07:46 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 04 Apr 2019 07:46 AM IST
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झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड भारतीय जनता पार्टी की कद्दावर नेता उमा भारती के नाम दर्ज है। उमा ने 16वीं लोकसभा चुनाव में एक लाख नब्बे हजार से अधिक वोट से जीत दर्ज की थी। यही नहीं, इस चुनाव में उमा को रिकॉर्ड पौने छह लाख वोट मिले थे। उमा से पहले सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड भारतीय लोकदल की सुशीला नैयर का था। 1977 में नैयर एक लाख तीस हजार से अधिक वोटों से जीती थीं।
सन् 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रघुनाथ विनायक धुलेकर ने 64,311 वोटों से जीत दर्ज की थी। धुलेकर को 83714 वोट मिले थे, जबकि रनर अप रहे सीपीआई के कंचन मुनी राम को महज 19403 मत प्राप्त हुए। 1957 के चुनाव में कांग्रेस की सुशीला नैयर जीत का दायरा और बढ़ाया। द्वितीय लोकसभा चुनाव में उन्होंने सीपीआई के चंदन सिंह को 71769 वोटों से हराया। 1962 में हुए तृतीय लोकसभा चुनाव में बहुत करीबी मुकाबला रहा। नैयर जीतीं जरूर लेकिन 11,090 वोटों से। इस चुनाव में उन्हें 89445, जबकि, सीपीआई के पन्ना लाल को 78355 वोट मिले। 1967 के चौथे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सुशीला नैयर और बीजेएस के आर खैरा में मुकाबला रहा। नैयर 37378 वोटों से फिर चुनाव जीत गईं। उन्हें 103073 और खैरा को 65695 वोट मिले। झांसी लोकसभा चुनाव में यह पहला मौका था, जब किसी प्रत्याशी को एक लाख या उससे अधिक वोट मिले हों।
सन् 1971 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस ने गोविंद दास रिछारिया को प्रत्याशी बनाया। उनका मुकाबला लगातार तीन चुनाव जीत चुकीं सुशीला नैयर से था। इस चुनाव में वे एनसीओ से प्रत्याशी थीं। इस चुनाव में गोविंद दास रिछारिया ने
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1,43,137 वोट पाकर 74571 मतों से जीत दर्ज की। जबकि, नैयर को 68,566 वोट मिले थे। 1977 के छठवें लोकसभा चुनाव में भारतीय लोकदल की प्रत्याशी सुशीला नैयर ने कांग्रेस के गोविंद दास रिछारिया को 1,30,485 वोटों से करारी शिकस्त दी। नैयर को 2,22,118 और रिछारिया को 91,633 मत प्राप्त हुए। इस चुनाव में एक साथ दो रिकॉर्ड बने। पहला झांसी लोकसभा सीट पर किसी प्रत्याशी को दो लाख या उससे अधिक वोट मिलना और दूसरा किसी नेता का एक लाख या उससे अधिक वोटों से जीतना।
1980 में सातवें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस (इंदिरा) के प्रत्याशी विश्वनाथ शर्मा ने सीपीआई के रमेश सिन्हा को 1,09,754 वोटों से पराजित किया। विश्वनाथ शर्मा को 1,91,672 और रमेश सिन्हा को 81,918 वोट मिले। 1984 में आठवें आम चुनाव में कांग्रेस के सुजान सिंह बुंदेला ने भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री को 1,15,923 वोटों से हराया। 1989 में नौवें आम चुनाव में भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री ने कांग्रेस के सुजान सिंह बुंदेला को 1,03,198 मतों के अंतर से शिकस्त दी। 1991 में 10वें लोकसभा चुनाव में भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री ने ओमप्रकाश रिछारिया को 82,071 वोटों से हराया। कांग्रेस ने ओमप्रकाश रिछारिया को मैदान में उतारा था, लेकिन समय पर कागजात दाखिल न करने पर उनको चुनाव चिह्न छाता मिला था।
1996 और 1998 में हुए 11वें और 12वें आम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र अग्निहोत्री ने समाजवादी पार्टी के हरगोविंद कुशवाहा को क्रमश: 29684 और 50368 मतों से हराया। 1999 में हुए 13वें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीस साल बाद फिर जीत का स्वाद चखा। कांग्रेस प्रत्याशी सुजान सिंह बुंदेला ने भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री को 82521 वोटों से हराया। 2004 में सपा के चंद्रपाल सिंह यादव ने 26,299 वोटों से बसपा के बाबू लाल कुशवाहा को शिकस्त दी। 2009 में कांग्रेस के प्रदीप जैन आदित्य ने 47670 वोटों से बसपा के रमेश कुमार शर्मा को हराया। 2014 में हुए 16वीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा ने उमा भारती को झांसी से प्रत्याशी बनाया। उमा को झांसी-ललितपुर की जनता ने भरपूर आशीर्वाद भी दिया। उमा को इस चुनाव में रिकॉर्ड 5,75,889 वोट मिले। जबकि, सपा के चंद्रपाल सिंह यादव 3,85,422 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। उमा ने इस चुनाव में शानदार 1,90,467 वोटों से जीत दर्ज की, जो कि झांसी संसदीय क्षेत्र से सबसे बड़ी जीत है।
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सन् 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रघुनाथ विनायक धुलेकर ने 64,311 वोटों से जीत दर्ज की थी। धुलेकर को 83714 वोट मिले थे, जबकि रनर अप रहे सीपीआई के कंचन मुनी राम को महज 19403 मत प्राप्त हुए। 1957 के चुनाव में कांग्रेस की सुशीला नैयर जीत का दायरा और बढ़ाया। द्वितीय लोकसभा चुनाव में उन्होंने सीपीआई के चंदन सिंह को 71769 वोटों से हराया। 1962 में हुए तृतीय लोकसभा चुनाव में बहुत करीबी मुकाबला रहा। नैयर जीतीं जरूर लेकिन 11,090 वोटों से। इस चुनाव में उन्हें 89445, जबकि, सीपीआई के पन्ना लाल को 78355 वोट मिले। 1967 के चौथे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सुशीला नैयर और बीजेएस के आर खैरा में मुकाबला रहा। नैयर 37378 वोटों से फिर चुनाव जीत गईं। उन्हें 103073 और खैरा को 65695 वोट मिले। झांसी लोकसभा चुनाव में यह पहला मौका था, जब किसी प्रत्याशी को एक लाख या उससे अधिक वोट मिले हों।
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सन् 1971 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस ने गोविंद दास रिछारिया को प्रत्याशी बनाया। उनका मुकाबला लगातार तीन चुनाव जीत चुकीं सुशीला नैयर से था। इस चुनाव में वे एनसीओ से प्रत्याशी थीं। इस चुनाव में गोविंद दास रिछारिया ने
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1,43,137 वोट पाकर 74571 मतों से जीत दर्ज की। जबकि, नैयर को 68,566 वोट मिले थे। 1977 के छठवें लोकसभा चुनाव में भारतीय लोकदल की प्रत्याशी सुशीला नैयर ने कांग्रेस के गोविंद दास रिछारिया को 1,30,485 वोटों से करारी शिकस्त दी। नैयर को 2,22,118 और रिछारिया को 91,633 मत प्राप्त हुए। इस चुनाव में एक साथ दो रिकॉर्ड बने। पहला झांसी लोकसभा सीट पर किसी प्रत्याशी को दो लाख या उससे अधिक वोट मिलना और दूसरा किसी नेता का एक लाख या उससे अधिक वोटों से जीतना।
1980 में सातवें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस (इंदिरा) के प्रत्याशी विश्वनाथ शर्मा ने सीपीआई के रमेश सिन्हा को 1,09,754 वोटों से पराजित किया। विश्वनाथ शर्मा को 1,91,672 और रमेश सिन्हा को 81,918 वोट मिले। 1984 में आठवें आम चुनाव में कांग्रेस के सुजान सिंह बुंदेला ने भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री को 1,15,923 वोटों से हराया। 1989 में नौवें आम चुनाव में भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री ने कांग्रेस के सुजान सिंह बुंदेला को 1,03,198 मतों के अंतर से शिकस्त दी। 1991 में 10वें लोकसभा चुनाव में भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री ने ओमप्रकाश रिछारिया को 82,071 वोटों से हराया। कांग्रेस ने ओमप्रकाश रिछारिया को मैदान में उतारा था, लेकिन समय पर कागजात दाखिल न करने पर उनको चुनाव चिह्न छाता मिला था।
1996 और 1998 में हुए 11वें और 12वें आम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र अग्निहोत्री ने समाजवादी पार्टी के हरगोविंद कुशवाहा को क्रमश: 29684 और 50368 मतों से हराया। 1999 में हुए 13वें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीस साल बाद फिर जीत का स्वाद चखा। कांग्रेस प्रत्याशी सुजान सिंह बुंदेला ने भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री को 82521 वोटों से हराया। 2004 में सपा के चंद्रपाल सिंह यादव ने 26,299 वोटों से बसपा के बाबू लाल कुशवाहा को शिकस्त दी। 2009 में कांग्रेस के प्रदीप जैन आदित्य ने 47670 वोटों से बसपा के रमेश कुमार शर्मा को हराया। 2014 में हुए 16वीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा ने उमा भारती को झांसी से प्रत्याशी बनाया। उमा को झांसी-ललितपुर की जनता ने भरपूर आशीर्वाद भी दिया। उमा को इस चुनाव में रिकॉर्ड 5,75,889 वोट मिले। जबकि, सपा के चंद्रपाल सिंह यादव 3,85,422 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। उमा ने इस चुनाव में शानदार 1,90,467 वोटों से जीत दर्ज की, जो कि झांसी संसदीय क्षेत्र से सबसे बड़ी जीत है।