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अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बने उदय और महामंत्री छोटेलाल बने
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जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव में महामंत्री चुने गए छोटेलाल वर्मा के साथ खुशी मनाते समर्थक। अमर उजा?
झांसी। जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव में अध्यक्ष पद पर उदय नारायण राजपूत ने 62 मतों से जीत हासिल की। जबकि, महामंत्री पद पर छोटेलाल वर्मा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 35 वोटों के अंतर से हराया। कोषाध्यक्ष पद पर अशोक कुमार पटैरिया और वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर अजय कुमार मिश्रा जीत हासिल करने में कामयाब रहे। अन्य पदों के वोटों की गिनती देर रात तक जारी रही। मतगणना के दौरान कड़ी-सुरक्षा व्यवस्था रही। कई थानों की पुलिस कचहरी परिसर में डेरा डाले रही।
जिला अधिवक्ता संघ के 20 पदों पर 65 प्रत्याशी मैदान में थे। चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा अध्यक्ष और महामंत्री पद को लेकर रही। अध्यक्ष पद पर चार प्रत्याशियों के बीच मुकाबला था। वोटों की गिनती के बाद जीत का सेहरा उदयनारायण राजपूत के सिर बंधा। उदय को 691 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी चंद्रशेखर शुक्ल को 629 वोट हासिल हुए। चौदह चक्रों में हुई मतगणना में दोनों के बीच कांटे की टक्कर बनी रही। लेकिन, अंत में उदय राजपूत जीत हासिल करने में कामयाब हुए। फरीद अहमद शरीफ को 78 और रामलखन बिलगैंया को 34 वोट मिले।
वहीं, महामंत्री पद पर छोटेलाल वर्मा और केपी श्रीवास्तव आमने-सामने के मुकाबले में रहे। मतगणना बाद जारी किए गए परिणाम में छोटेलाल के खाते में 602 वोट आए और केपी श्रीवास्तव को 567 वोट मिले। छोटेलाल ने केपी को 35 वोटों के अंतर से हराया। जबकि, रीतेश अग्रवाल को 227 वोटों से संतोष करना पड़ा।
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कोषाध्यक्ष पद पर अशोक कुमार पटैरिया ने 364 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने रामजी श्रीवास्तव को 44 मतों के अंतर से हराया। रामजी को 320 वोट मिले। इसके अलावा अमित कुमार साहू को 156, धीरेंद्र कुमार माहौर को 23, हरीश केसरिया को 247, प्रतिपाल सोनी को 39 और साधना सिंह को 272 वोट मिले।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर अजय कुमार मिश्रा ने शिवकेश दुबे को 30 वोटों के अंतर से हराया। अजय कुमार मिश्रा को 382, शिवकेश दुबे को 352, अरुण कुमार निगम को 300, बालकिशन कुशवाहा को 265 और लालता प्रसाद मच्छे को 123 वोट मिले।
कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर विकास यादव ने शंकर सिंह को 99 वोटों के अंतर से हराया। विकास को 586 और शंकर को 487 वोट मिले। इसी पद पर किस्मत आजमा रहे बृजेश कुमार को 187 और सुभाष चंद्र राय को 159 वोटों से संतोष करना पड़ा।
संयुक्त सचिव (प्रशासन) के पद पर अविनाश मिश्रा ने विनोद कुमार खरे को 159 वोटों के अंतर से हराया। अविनाश को 477 व विनोद को 318 वोट मिले। जबकि, लक्ष्मीकांत को 213, प्रीति अहिरवार को 121 और सुनील कुमार पटेल के हिस्से में 267 वोट आए।
संयुक्त सचिव (लाइब्रेरी) पद पर सूर्यप्रकाश राय ने चंद्रकुमार उपाध्याय को 145 वोटों के अंतर से हराया। सूर्यप्रकाश ने 460 और चंद्रकुमार ने 315 वोट हासिल किए। जबकि, अभिषेक निगम को 290 और यशोवर्धन बजाज को 295 वोटों से संतोष करना पड़ा।
संयुक्त सचिव (प्रकाशन) पद पर हिमांशु सक्सेना ने 494 पाकर जीत दर्ज की। उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जीत सिंह को 63 वोटों से हराया। 429 वोटर संकल्प भारती तीसरे स्थान पर रहे।
कार्यकारिणी के वरिष्ठ व कनिष्ठ सदस्यों के पदों पर वोटों की गिनती देर रात तक जारी रही।
चौथी बार अध्यक्ष बने उदय
झांसी। उदय नारायण राजपूत चौथी बार जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष चुने गए। जबकि, इससे पहले वे चार बार महामंत्री और दो बार वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। अधिवक्ता संघ के चुनाव में उन्हें एक बार ही हार का सामना करना पड़ा। चार साल पहले वे अध्यक्ष पद का चुनाव हार गए थे।
छोटेलाल ने पिछली हार को बदला जीत में
झांसी। जिला अधिवक्ता संघ के महामंत्री पद पर जीत हासिल करने वाले छोटेलाल वर्मा एक बार कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। पिछली बार उन्होंने महामंत्री पद पर किस्मत आजमाई थी। लेकिन, हार का सामना करना पड़ा था और वे दूसरे स्थान पर रहे थे। बावजूद, हिम्मत नहीं हारी और पिछली हार को इस बार जीत में बदलने में कामयाब रहे।
खूब उड़ा गुलाल, हुई आतिशबाजी
झांसी। मतगणना कचहरी परिसर में स्थित लाइब्रेरी हॉल में हुई। सुबह से ही कचहरी परिसर में मतगणना को लेकर गहमागहमी नजर आने लगी थी। अधिवक्ता हर चक्र पर नजर बनाए हुए थे। प्रत्याशी की जीत की घोषणा होते ही नारेबाजी शुरू हो जाती थी। जीत का प्रमाण लेकर बाहर निकलने वाले प्रत्याशी को समर्थक फूल मालाओं से लाद देते थे। इस दौरान खूब गुलाल उड़ा और जमकर आतिशबाजी हुई।
दोपहर में शुरू हो पाई मतगणना
झांसी। मतगणना की शुरुआत सुबह दस बजे से होनी थी। तय समय पर टीमें पहुंच भी गई थीं। लेकिन, मतपत्रों के बंडल बनाने में काफी समय लगा गया। वोटों की गिनती तकरीबन दो बजे से शुरू हो पाई। पहला परिणाम अध्यक्ष पद का शाम तकरीबन पांच बजे आया। मतों की गिनती देर रात तक जारी रही। आखिरी में कनिष्ठ और वरिष्ठ सदस्यों के वोट गिने गए।
किसी ने सभी को चुना, तो खाली मतपत्र भी मिले
झांसी। बुद्धिजीवी वर्ग से आने वाले अधिवक्ता भी वोट डालने में गलती कर गए। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि हर पद पर अवैध वोट पाए गए। अध्यक्ष पद पर 16, महामंत्री पर सात, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पर 13, कनिष्ठ उपाध्यक्ष पर 14, संयुक्त सचिव प्रशासन पर 24, कोषाध्यक्ष पर 19 अवैध, संयुक्त सचिव लाइब्रेरी पर 68 मत अवैध पाए गए। इनमें से किसी मतपत्र पर सभी प्रत्याशी के नाम आगे टिक कर दिया गया था, तो किसी में कोरा मतपत्र ही पेटी में डाल दिया गया था। इसी तरह की अन्य गलतियों पर मतपत्र अवैध घोषित किए गए।
ये जीत सभी अधिवक्ताओं की है। न्यायिक व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा। वकीलों के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा। जूनियर अधिवक्ताओं को कोर्ट में परेशानी न हो, इसकी व्यवस्था की जाएगी। वकीलों का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा।
- उदय नारायण राजपूत, अध्यक्ष - जिला अधिवक्ता संघ
ये जीत आम अधिवक्ता की है। पार्किंग, पेयजल जैसी जरूरी सुविधाएं वकीलों को कचहरी परिसर में दिलाई जाएंगी। मेडिकल व रेलवे में अलग से काउंटर खुलवाए जाएंगे। स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। बार-बैंच के बीच सामंजस्य बनाया जाएगा।
- छोटेलाल वर्मा, महामंत्री - जिला अधिवक्ता संघ
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जिला अधिवक्ता संघ के 20 पदों पर 65 प्रत्याशी मैदान में थे। चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा अध्यक्ष और महामंत्री पद को लेकर रही। अध्यक्ष पद पर चार प्रत्याशियों के बीच मुकाबला था। वोटों की गिनती के बाद जीत का सेहरा उदयनारायण राजपूत के सिर बंधा। उदय को 691 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी चंद्रशेखर शुक्ल को 629 वोट हासिल हुए। चौदह चक्रों में हुई मतगणना में दोनों के बीच कांटे की टक्कर बनी रही। लेकिन, अंत में उदय राजपूत जीत हासिल करने में कामयाब हुए। फरीद अहमद शरीफ को 78 और रामलखन बिलगैंया को 34 वोट मिले।
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वहीं, महामंत्री पद पर छोटेलाल वर्मा और केपी श्रीवास्तव आमने-सामने के मुकाबले में रहे। मतगणना बाद जारी किए गए परिणाम में छोटेलाल के खाते में 602 वोट आए और केपी श्रीवास्तव को 567 वोट मिले। छोटेलाल ने केपी को 35 वोटों के अंतर से हराया। जबकि, रीतेश अग्रवाल को 227 वोटों से संतोष करना पड़ा।
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कोषाध्यक्ष पद पर अशोक कुमार पटैरिया ने 364 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने रामजी श्रीवास्तव को 44 मतों के अंतर से हराया। रामजी को 320 वोट मिले। इसके अलावा अमित कुमार साहू को 156, धीरेंद्र कुमार माहौर को 23, हरीश केसरिया को 247, प्रतिपाल सोनी को 39 और साधना सिंह को 272 वोट मिले।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर अजय कुमार मिश्रा ने शिवकेश दुबे को 30 वोटों के अंतर से हराया। अजय कुमार मिश्रा को 382, शिवकेश दुबे को 352, अरुण कुमार निगम को 300, बालकिशन कुशवाहा को 265 और लालता प्रसाद मच्छे को 123 वोट मिले।
कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर विकास यादव ने शंकर सिंह को 99 वोटों के अंतर से हराया। विकास को 586 और शंकर को 487 वोट मिले। इसी पद पर किस्मत आजमा रहे बृजेश कुमार को 187 और सुभाष चंद्र राय को 159 वोटों से संतोष करना पड़ा।
संयुक्त सचिव (प्रशासन) के पद पर अविनाश मिश्रा ने विनोद कुमार खरे को 159 वोटों के अंतर से हराया। अविनाश को 477 व विनोद को 318 वोट मिले। जबकि, लक्ष्मीकांत को 213, प्रीति अहिरवार को 121 और सुनील कुमार पटेल के हिस्से में 267 वोट आए।
संयुक्त सचिव (लाइब्रेरी) पद पर सूर्यप्रकाश राय ने चंद्रकुमार उपाध्याय को 145 वोटों के अंतर से हराया। सूर्यप्रकाश ने 460 और चंद्रकुमार ने 315 वोट हासिल किए। जबकि, अभिषेक निगम को 290 और यशोवर्धन बजाज को 295 वोटों से संतोष करना पड़ा।
संयुक्त सचिव (प्रकाशन) पद पर हिमांशु सक्सेना ने 494 पाकर जीत दर्ज की। उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जीत सिंह को 63 वोटों से हराया। 429 वोटर संकल्प भारती तीसरे स्थान पर रहे।
कार्यकारिणी के वरिष्ठ व कनिष्ठ सदस्यों के पदों पर वोटों की गिनती देर रात तक जारी रही।
चौथी बार अध्यक्ष बने उदय
झांसी। उदय नारायण राजपूत चौथी बार जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष चुने गए। जबकि, इससे पहले वे चार बार महामंत्री और दो बार वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। अधिवक्ता संघ के चुनाव में उन्हें एक बार ही हार का सामना करना पड़ा। चार साल पहले वे अध्यक्ष पद का चुनाव हार गए थे।
छोटेलाल ने पिछली हार को बदला जीत में
झांसी। जिला अधिवक्ता संघ के महामंत्री पद पर जीत हासिल करने वाले छोटेलाल वर्मा एक बार कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। पिछली बार उन्होंने महामंत्री पद पर किस्मत आजमाई थी। लेकिन, हार का सामना करना पड़ा था और वे दूसरे स्थान पर रहे थे। बावजूद, हिम्मत नहीं हारी और पिछली हार को इस बार जीत में बदलने में कामयाब रहे।
खूब उड़ा गुलाल, हुई आतिशबाजी
झांसी। मतगणना कचहरी परिसर में स्थित लाइब्रेरी हॉल में हुई। सुबह से ही कचहरी परिसर में मतगणना को लेकर गहमागहमी नजर आने लगी थी। अधिवक्ता हर चक्र पर नजर बनाए हुए थे। प्रत्याशी की जीत की घोषणा होते ही नारेबाजी शुरू हो जाती थी। जीत का प्रमाण लेकर बाहर निकलने वाले प्रत्याशी को समर्थक फूल मालाओं से लाद देते थे। इस दौरान खूब गुलाल उड़ा और जमकर आतिशबाजी हुई।
दोपहर में शुरू हो पाई मतगणना
झांसी। मतगणना की शुरुआत सुबह दस बजे से होनी थी। तय समय पर टीमें पहुंच भी गई थीं। लेकिन, मतपत्रों के बंडल बनाने में काफी समय लगा गया। वोटों की गिनती तकरीबन दो बजे से शुरू हो पाई। पहला परिणाम अध्यक्ष पद का शाम तकरीबन पांच बजे आया। मतों की गिनती देर रात तक जारी रही। आखिरी में कनिष्ठ और वरिष्ठ सदस्यों के वोट गिने गए।
किसी ने सभी को चुना, तो खाली मतपत्र भी मिले
झांसी। बुद्धिजीवी वर्ग से आने वाले अधिवक्ता भी वोट डालने में गलती कर गए। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि हर पद पर अवैध वोट पाए गए। अध्यक्ष पद पर 16, महामंत्री पर सात, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पर 13, कनिष्ठ उपाध्यक्ष पर 14, संयुक्त सचिव प्रशासन पर 24, कोषाध्यक्ष पर 19 अवैध, संयुक्त सचिव लाइब्रेरी पर 68 मत अवैध पाए गए। इनमें से किसी मतपत्र पर सभी प्रत्याशी के नाम आगे टिक कर दिया गया था, तो किसी में कोरा मतपत्र ही पेटी में डाल दिया गया था। इसी तरह की अन्य गलतियों पर मतपत्र अवैध घोषित किए गए।
ये जीत सभी अधिवक्ताओं की है। न्यायिक व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा। वकीलों के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा। जूनियर अधिवक्ताओं को कोर्ट में परेशानी न हो, इसकी व्यवस्था की जाएगी। वकीलों का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा।
- उदय नारायण राजपूत, अध्यक्ष - जिला अधिवक्ता संघ
ये जीत आम अधिवक्ता की है। पार्किंग, पेयजल जैसी जरूरी सुविधाएं वकीलों को कचहरी परिसर में दिलाई जाएंगी। मेडिकल व रेलवे में अलग से काउंटर खुलवाए जाएंगे। स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। बार-बैंच के बीच सामंजस्य बनाया जाएगा।
- छोटेलाल वर्मा, महामंत्री - जिला अधिवक्ता संघ