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झांसी की तुलसी बना रही अंतरराष्ट्रीय पहचान
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झांसी। अभी तक ग्राम पंचायत बंगरा में 448 किसान तुलसी की खेती कर रहे हैं। यहां रामा और श्यामा दो किस्म की तुलसी का उत्पादन होता है। सरकार द्वारा चलाई जा रही उद्यान विभाग की योजना एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत झांसी की तुलसी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए सरकार का भी विशेष जोर है। अभी झांसी में 500 हेक्टेयर भूमि पर खेती की जा रही है। जिसमें 500 टन पत्ती प्राप्त होती है। इससे तकरीबन 5 करोड़ का कारोबार होता है। यहां के किसानों से अंतरराष्ट्रीय कंपनियां पतंजलि और आर्गेनिक इंडिया खरीद करती हैं जो देश-विदेश में इस तुलसी से निर्मित उत्पादों को बेचती हैं।
प्रधानमंत्री लोकल फॉर वोकल पर बढ़ावा दे रहे हैं ऐसे में झांसी की तुलसी को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के विशेष जोर अजमाइश है चूंकि बुंदेलखंड में सीमित संसाधन हैं इसके बाद तुलसी उत्पादन को झांसी जनपद के किसान उत्पादन कर रहे हैं। अब किसानों को उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
ऐसे तैयार होती है फसल
जनपद के ग्राम पठाकरका, खिसनी, खिसनी बुजुर्ग, कनौरा, मगरवारा, चौकरी, सनौरा, गेराहा, स्यावरी, कोटरा, टोड़ीफतेहपुर गांव में तुलसी की खेती होती है। यहां फसलों से प्रति हेक्टेयर में एक टन उत्पाद होता है। जिसमें सिंचाई, बीज आदि मिलाकर 30 हजार रुपये लागत होती है। जिसमें एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर कमाई होती है। ऐसे में कुल 500 हेक्टेयर भूमि में खेती हो रही है। जिसका कुल मुनाफा पांच करोड़ और लागत महज डेढ़ करोड़ रुपये आती है। वहीं, इसको बढ़ाने के लिए किसानों को सब्सिडी दी जा रही है। जो प्रति हेक्टेयर 13180 रुपये और अधिकतम 10 लाख होती है। इस बार उद्यान विभाग किसानों को बीज भी देगा। खास बात यह है कि फसल साल में दो बार उगाई जा सकती है।
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ओडीओपी योजना में चुनी गई तुलसी
पीएमएफएमई (फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज) के उद्योग विभाग की ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) के तहत झांसी की तुलसी चुनी गई है। जिसमें प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जा रही है। यहां उत्पादन क्षमता बढ़ाने और किसानों को खेती के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जिससे अधिक से अधिक उत्पादन हो और देश ही नहीं विदेश तक में इसकी सप्लाई की जा सके।
ये बनते हैं उत्पाद
चाय, जूस, काढ़ा, अर्क इत्यादि बनाए जाते हैं। तुलसी में चमत्कारिक गुण होते हैं, इसके कई चमत्कारिक लाभ भी हैं।
उद्यान विभाग की ओडीओपी योजना के तहत तुलसी उत्पादन को चुना गया है। झांसी की तुलसी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए सरकार विशेष योजना चला रही है। यहां किसानों को उत्पादन के लिए सब्सिडी भी दे रही है। - विनय कुमार यादव, उपनिदेशक उद्यान
आयुष क्वाथ बनाने में हुआ खूब इस्तेमाल
झांसी। कोरोना काल में आयुष क्वाथ बनाने में तुलसी का खूब इस्तेमाल हुआ। बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केदारनाथ यादव ने बताया कि क्वाथ बनाने में चार पदार्थों का उपयोग होता है। एक क्वाथ बनाने में 50 फीसदी हिस्सा तो तुलसी का ही होता है।
प्राचार्य ने बताया कि तुलसी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार होती है। इसके अलावा बुखार, खांसी, जुकाम में भी फायदेमंद होती है। वेदों में तुलसी को सभी रोगों का विनाश करने वाली और अकाल मृत्यु को दूर करने वाले औषधि बताया गया है। तुलसी नाम इसलिए रखा गया है, क्योंकि इसकी तुलना किसी और से नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि एक जिला, एक उत्पाद में शामिल किए जाने के बाद अब किसान इसकी खेती करके अच्छी उपज कमा सकते हैं। खास बात ये है कि इसकी कम पानी में खेती की जा सकती है। यह किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है। एक बार तुलसी का पौधे लगाने पर चार महीने में अच्छी पत्तियां आने लगती हैं। एक पौधा सामान्यत: एक से दो साल तक चलता है। कोई-कोई ज्यादा भी चल जाता है।
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प्रधानमंत्री लोकल फॉर वोकल पर बढ़ावा दे रहे हैं ऐसे में झांसी की तुलसी को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के विशेष जोर अजमाइश है चूंकि बुंदेलखंड में सीमित संसाधन हैं इसके बाद तुलसी उत्पादन को झांसी जनपद के किसान उत्पादन कर रहे हैं। अब किसानों को उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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ऐसे तैयार होती है फसल
जनपद के ग्राम पठाकरका, खिसनी, खिसनी बुजुर्ग, कनौरा, मगरवारा, चौकरी, सनौरा, गेराहा, स्यावरी, कोटरा, टोड़ीफतेहपुर गांव में तुलसी की खेती होती है। यहां फसलों से प्रति हेक्टेयर में एक टन उत्पाद होता है। जिसमें सिंचाई, बीज आदि मिलाकर 30 हजार रुपये लागत होती है। जिसमें एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर कमाई होती है। ऐसे में कुल 500 हेक्टेयर भूमि में खेती हो रही है। जिसका कुल मुनाफा पांच करोड़ और लागत महज डेढ़ करोड़ रुपये आती है। वहीं, इसको बढ़ाने के लिए किसानों को सब्सिडी दी जा रही है। जो प्रति हेक्टेयर 13180 रुपये और अधिकतम 10 लाख होती है। इस बार उद्यान विभाग किसानों को बीज भी देगा। खास बात यह है कि फसल साल में दो बार उगाई जा सकती है।
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ओडीओपी योजना में चुनी गई तुलसी
पीएमएफएमई (फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज) के उद्योग विभाग की ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) के तहत झांसी की तुलसी चुनी गई है। जिसमें प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जा रही है। यहां उत्पादन क्षमता बढ़ाने और किसानों को खेती के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जिससे अधिक से अधिक उत्पादन हो और देश ही नहीं विदेश तक में इसकी सप्लाई की जा सके।
ये बनते हैं उत्पाद
चाय, जूस, काढ़ा, अर्क इत्यादि बनाए जाते हैं। तुलसी में चमत्कारिक गुण होते हैं, इसके कई चमत्कारिक लाभ भी हैं।
उद्यान विभाग की ओडीओपी योजना के तहत तुलसी उत्पादन को चुना गया है। झांसी की तुलसी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए सरकार विशेष योजना चला रही है। यहां किसानों को उत्पादन के लिए सब्सिडी भी दे रही है। - विनय कुमार यादव, उपनिदेशक उद्यान
आयुष क्वाथ बनाने में हुआ खूब इस्तेमाल
झांसी। कोरोना काल में आयुष क्वाथ बनाने में तुलसी का खूब इस्तेमाल हुआ। बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केदारनाथ यादव ने बताया कि क्वाथ बनाने में चार पदार्थों का उपयोग होता है। एक क्वाथ बनाने में 50 फीसदी हिस्सा तो तुलसी का ही होता है।
प्राचार्य ने बताया कि तुलसी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार होती है। इसके अलावा बुखार, खांसी, जुकाम में भी फायदेमंद होती है। वेदों में तुलसी को सभी रोगों का विनाश करने वाली और अकाल मृत्यु को दूर करने वाले औषधि बताया गया है। तुलसी नाम इसलिए रखा गया है, क्योंकि इसकी तुलना किसी और से नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि एक जिला, एक उत्पाद में शामिल किए जाने के बाद अब किसान इसकी खेती करके अच्छी उपज कमा सकते हैं। खास बात ये है कि इसकी कम पानी में खेती की जा सकती है। यह किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है। एक बार तुलसी का पौधे लगाने पर चार महीने में अच्छी पत्तियां आने लगती हैं। एक पौधा सामान्यत: एक से दो साल तक चलता है। कोई-कोई ज्यादा भी चल जाता है।