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त्रिकोणीय सीरीज में दिखेगी ‘झांसी एक्सप्रेस’

Mon, 26 Mar 2018 01:14 AM IST
amarujala
amarujala Updated Mon, 26 Mar 2018 01:14 AM IST
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trcodiy serej me dikhegi jhansi express
cricket, jhansi news - फोटो : demo
जिले के एक छोटे गांव जरयाई से निकल कर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी बने आलराउंडर हुकुम सिंह एक अप्रैल से कोल्हापुर, मुंबई और रुद्रपुर में अपने खेल का प्रदर्शन करेंगे। भारत-बांग्लादेश और नेपाल के बीच होने वाली व्हीलचेयर क्रिकेट टीम में वह अपना खेल दिखाएंगे। ट्रायल में उनकी धुआंधार पारी और गेंदबाजी को देखने के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें झांसी एक्सप्रेस नाम दिया है।
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चिरगांव के जरयाई निवासी 33 वर्षीय हुकुम सिंह ने नौ मार्च को आगरा में डिस्एबेल्ड स्पोटिंग सोसाइटी में क्रिकेट का ट्रायल दिया। ट्रायल में व्हीलचेयर पर बैठकर उन्होंने बल्लेबाजी में पहले चौके-छक्के लगाकर चयनकर्ताओं को मुरीद बना दिया। अगले दिन गेंदबाजी में भी बेहतर प्रदर्शन किया। पेसर होने के कारण उन्हें कई विकेट भी मिले। चयनकर्ताओं ने खिलाड़ी के इस अंदाज को देखकर झांसी एक्सप्रेस का नाम देने के साथ ही उन्हें त्रिकोणीय सीरीज खेलने के लिए चयनित कर लिया गया। 10 अप्रैल तक चलने वाली सीरीज अलग-अलग जगहों पर होगी।
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एक से चार अप्रैल तक भारत-नेपाल-बांग्लादेश की टीमें कोल्हापुर और मुंबई के स्टेडियम में भिडे़ंगीं। इसके बाद सात से दस अप्रैल तक रुद्रपुर स्थित स्टेडियम में त्रिकोणीय सीरीज खेली जाएगी।
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आगरा में भारतीय टीम के लिए होने वाले ट्रायल में अन्य प्रदेशों से तकरीबन 250 खिलाड़ी पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि चयन के लिए वह सालों से सुबह-शाम दोनों समय कड़ा प्रशिक्षण अपने दोस्तों के साथ करते थे। उसी का नतीजा है कि भारतीय टीम में उन्हें जगह मिली।

जमीन पर बैठ कर सीखा क्रिकेट
सात-आठ साल की उम्र से ही उन्हें क्रिकेट खेलने का जुनून रहा। गांव के दोस्तों के साथ उन्होंने जमीन पर बैठकर खेल खेला। इसके बाद जगत गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय चित्रकूट की ओर से कई मैच खेले। अब तक का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 169 रनों की पारी रही। उन्होंने यह स्कोर 56 गेंदों में 16 छक्के और 8 चौके की बदौलत बनाया था।

एमए इकनोमिक्स में गोल्ड
बीएड, पीजीडीआईटी और एमए इकनामिक्स जैसे विषयों में सर्वोच्च अंक के साथ संस्थान के टॉपर छात्र रहे। उन्हें एमए इकनॉमिक्स में 83 प्रतिशत अंक करने पर राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। हाल में वह दतिया में दिव्यांग आवासीय विद्यालय में संविदा पर तैनात होकर बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं।


सरकार की ओर से नहीं मिली मदद
हुकुम सिंह को भारतीय टीम में चयन होने की एक ओर खुशी है तो दूसरी ओर सरकार से कोई मदद न मिलने से निराशा भी है। उन्होंने कहा कि सरकार की इस उदासीनता के कारण उन जैसे न जाने कितने और खिलाड़ी हैं जो प्रोत्साहन न मिलने के कारण अपने हुनर का प्रदर्शन करने में असमर्थ हैं।
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