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100 बेड का ट्रामा सेंटर बनेगा, सीटी स्कैन मशीन से लेकर पैथोलॉजी तक अलग होगी
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जल्द ही सौ बेड का ट्रामा सेंटर बनेगा। यहां पर सीटी स्कैन, एक्सरे मशीन से लेकर पैथोलॉजी तक अलग होगी। इसके लिए शासन ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से प्रस्ताव मांग लिया है। जल्द ही बजट जारी होने की संभावना है।
अभी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ही ट्रामा सेंटर चल रहा है। जबकि, दोनों को अलग-अलग होना चाहिए। ऐसे में यहां पर बेड से लेकर ओटी तक की मारामारी मची रहती है। बेड की किल्लत हो जाने पर कई बार मरीजों को गैलरी में पलंग डालकर लिटाना पड़ता है। एक सप्ताह पहले ही शासन ने मेडिकल कॉलेज को 100 बेड के ट्रामा सेंटर का प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए हैं। कॉलेज प्रशासन ने प्रस्ताव तैयार भी करके भेज दिया। जिसमें कुछ संशोधन करके दोबारा भेजने को कहा गया। अब एक-दो दिन में इसे भेज दिया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही निर्माण को लेकर बजट जारी हो जाएगा। वहीं, ट्रामा सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश राजपूत ने बताया कि ट्रामा सेंटर में 20 बेड का आईसीयू बनेगा। ऑर्थोपेडिक, सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, न्यूरो सर्जरी समेत छह विभागों की मॉड्यूलर ओटी बनेगी। यहां पर अलग से ही सीटी स्कैन, एक्सरे मशीन होगी। पैथोलॉजी की जांच की सुविधा होगी।
ट्रामा के रोजाना आते हैं 50 मरीज
इमरजेंसी में ट्रामा के रोजाना 50 मरीज आते हैं। इनमें से आठ से दस मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ती है। नस कटने पर प्लास्टिक सर्जरी, स्पाइन और ब्रेन में चोट आने पर न्यूरो सर्जरी, हड्डी में टूटफूट होने पर ऑथोपेडिक विभाग के डॉक्टर ऑपरेशन करते हैं।
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अभी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ही ट्रामा सेंटर चल रहा है। जबकि, दोनों को अलग-अलग होना चाहिए। ऐसे में यहां पर बेड से लेकर ओटी तक की मारामारी मची रहती है। बेड की किल्लत हो जाने पर कई बार मरीजों को गैलरी में पलंग डालकर लिटाना पड़ता है। एक सप्ताह पहले ही शासन ने मेडिकल कॉलेज को 100 बेड के ट्रामा सेंटर का प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए हैं। कॉलेज प्रशासन ने प्रस्ताव तैयार भी करके भेज दिया। जिसमें कुछ संशोधन करके दोबारा भेजने को कहा गया। अब एक-दो दिन में इसे भेज दिया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही निर्माण को लेकर बजट जारी हो जाएगा। वहीं, ट्रामा सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश राजपूत ने बताया कि ट्रामा सेंटर में 20 बेड का आईसीयू बनेगा। ऑर्थोपेडिक, सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, न्यूरो सर्जरी समेत छह विभागों की मॉड्यूलर ओटी बनेगी। यहां पर अलग से ही सीटी स्कैन, एक्सरे मशीन होगी। पैथोलॉजी की जांच की सुविधा होगी।
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ट्रामा के रोजाना आते हैं 50 मरीज
इमरजेंसी में ट्रामा के रोजाना 50 मरीज आते हैं। इनमें से आठ से दस मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ती है। नस कटने पर प्लास्टिक सर्जरी, स्पाइन और ब्रेन में चोट आने पर न्यूरो सर्जरी, हड्डी में टूटफूट होने पर ऑथोपेडिक विभाग के डॉक्टर ऑपरेशन करते हैं।
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