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बैंक हड़ताल से दो सौ करोड़ से अधिक का लेनदेन प्रभावित
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भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर अपनी मांगो को लेकर प्रदर्शन करते बैंक कर्मचारी।
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झांसी। बैंककर्मियों की तीन दिनी राष्ट्रव्यापी हड़ताल के पहले दिन शुक्रवार को करीब दो सौ करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। हड़ताल के दौरान बैंककर्मियों ने सभा करके सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बैंककर्मियों ने सरकार पर वेतन समझौता लागू न कराने को लेकर मनमानी का आरोप लगाया।
बैंक हड़ताल के चलते तकरीबन सभी बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। किसी भी शाखा में काम काज नहीं निपटाया गया। निजी बैंक की शाखाएं कुछ देर के लिए खुलीं लेकिन, यूनियन नेताओं ने वहां पहुंचकर उनको बंद करा दिया। उधर, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले आंदोलित बैंककर्मियों ने यूएफबीयू परिसर में सभा की। संयोजक अशोक कुमार महावर ने कहा वेतन समझौता 2017 से लंबित है। काफी समय तक बैठक के बाद 30 जनवरी को साढ़े तेरह प्रतिशत बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया। कर्मचारियों ने इस पर रोष जताते हुए सरकार पर पूर्व की शर्तो को लागू न करने का आरोप लगाया। उपसंयोजक अनिल खत्री ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। जिला सचिव मान सिंह कुशवाहा ने कर्मचारियों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। सहसंयोजक ज्ञानेंद्र मोहन ने सरकार पर एनपीए को कम करने के लिए कॉर्पोरेट घरानों पर रोक लगाने की मांग की। अध्यक्ष जेपी किलेदार ने कहा बैंक की शाखाएं बढ़ाई जा रहीं लेकिन नियुक्तियां नहीं हो रहीं। इस दौरान कर्मचारियों ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए संकल्प लिया। सभा के दौरान सीपी सरावगी, राजेश सोनकर, बृजेंद्र श्रीवास्तव, वीरेंद्र कुशवाहा, अंकित सेठ, अजय कुशवाहा, प्रिया निगम, अंतरा घोष, निहारिका, अंजली, रतनलाल, रौनक जैन, रामानुज, वीरेंद्र, सुंदर राजन समेत अन्य उपस्थित रहे।
शाम तक खाली हो गए एटीएम
बैंक शाखाओं में कामकाज न होने की वजह से नकदी के लिए एटीएम बूथों पर दोपहर से ही लोगों की कतार दिखाई पड़ी। बीकेडी चौराहे पर सेंट्रल बैंक, पीएनबी, एसबीआई के एटीएम बूथ पर शाम तक ही पैसा निकाला जा सका। उसके बाद यहां नकदी खत्म हो गई। नकदी की तलाश में लोग पूरे दिन इधर-उधर भटकते रहे। कई लोगों ने मोबाइल से एटीएम की लोकेशन खोजी और वहां जाकर नकदी निकाली। हालांकि बैंक अधिकारियों का कहना है कि एटीएम नियमित अंतराल पर भरे जाएंगे।
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बैंक हड़ताल के चलते तकरीबन सभी बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। किसी भी शाखा में काम काज नहीं निपटाया गया। निजी बैंक की शाखाएं कुछ देर के लिए खुलीं लेकिन, यूनियन नेताओं ने वहां पहुंचकर उनको बंद करा दिया। उधर, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले आंदोलित बैंककर्मियों ने यूएफबीयू परिसर में सभा की। संयोजक अशोक कुमार महावर ने कहा वेतन समझौता 2017 से लंबित है। काफी समय तक बैठक के बाद 30 जनवरी को साढ़े तेरह प्रतिशत बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया। कर्मचारियों ने इस पर रोष जताते हुए सरकार पर पूर्व की शर्तो को लागू न करने का आरोप लगाया। उपसंयोजक अनिल खत्री ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। जिला सचिव मान सिंह कुशवाहा ने कर्मचारियों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। सहसंयोजक ज्ञानेंद्र मोहन ने सरकार पर एनपीए को कम करने के लिए कॉर्पोरेट घरानों पर रोक लगाने की मांग की। अध्यक्ष जेपी किलेदार ने कहा बैंक की शाखाएं बढ़ाई जा रहीं लेकिन नियुक्तियां नहीं हो रहीं। इस दौरान कर्मचारियों ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए संकल्प लिया। सभा के दौरान सीपी सरावगी, राजेश सोनकर, बृजेंद्र श्रीवास्तव, वीरेंद्र कुशवाहा, अंकित सेठ, अजय कुशवाहा, प्रिया निगम, अंतरा घोष, निहारिका, अंजली, रतनलाल, रौनक जैन, रामानुज, वीरेंद्र, सुंदर राजन समेत अन्य उपस्थित रहे।
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शाम तक खाली हो गए एटीएम
बैंक शाखाओं में कामकाज न होने की वजह से नकदी के लिए एटीएम बूथों पर दोपहर से ही लोगों की कतार दिखाई पड़ी। बीकेडी चौराहे पर सेंट्रल बैंक, पीएनबी, एसबीआई के एटीएम बूथ पर शाम तक ही पैसा निकाला जा सका। उसके बाद यहां नकदी खत्म हो गई। नकदी की तलाश में लोग पूरे दिन इधर-उधर भटकते रहे। कई लोगों ने मोबाइल से एटीएम की लोकेशन खोजी और वहां जाकर नकदी निकाली। हालांकि बैंक अधिकारियों का कहना है कि एटीएम नियमित अंतराल पर भरे जाएंगे।
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