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ट्रेनों की बिगड़ी चाल, यात्री बेहाल

Tue, 02 Jan 2018 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूराो
अमर उजाला ब्यूराो Updated Tue, 02 Jan 2018 01:29 AM IST
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trains coming late
railway jhansi news - फोटो : demo
कोहरे और ठंड के कारण ट्रेनों की लेटलतीफी ने स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ बढ़ा दी है। यात्री प्रतीक्षालय ठसाठस हैं। ठंड में लोगों को रात खुले में बितानी पड़ रही है। आलम यह है कि शौचालय उपयोग के लिए लाइन लगानी पड़ रही है। स्टेशन पर खाने-पीने तक की परेशानी हो रही है।
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झांसी रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख स्टेशनों में शुमार है। यात्रियों को चारों दिशाओं की ओर यहां से ट्रेनें सुगमता से मिल जाती हैं। प्रतिदिन झांसी से बीना, भोपाल और इटारसी की औसतन ओर 65, ग्वालियर, आगरा व दिल्ली की ओर 68, कानपुर की तरफ 28 व इलाहाबाद की तरफ 12 गाड़ियां उपलब्ध हैं। औसतन झांसी से प्रतिदिन जनरल टिकट पर 18 हजार व आरक्षित टिकट पर पांच यात्री सफर करते हैं। पूरे बुंदेलखंड से लोग झांसी ट्रेन पकड़ने आते हैं। इतना ही नहीं प्रतिदिन दो से तीन हजार यात्री प्रतिदिन ट्रेन बदलने के लिए यहां उतरते हैं।
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दरअसल, आम दिनों में ट्रेनों का संचालन सामान्य बना रहने से भीड़ स्टेशन पर दिखाई नहीं पड़ती है। इन दिनों कोहरे ने यात्रियों के सफर को मुसीबत भरा बना दिया है। अधिकांश ट्रेनें एक से बारह घंटे तक की देरी से चल रही हैं। यात्रियों को घंटों स्टेशन पर गुजारने पड़ रहे हैं। रात में ठंड से बचने के लिए रिटायरिंग रूम, वेटिंग रूम, पैसेंजर हॉल, बुकिंग हॉल यात्रियों से भर जाते हैं। इन स्थानों की क्षमता कम होने से सैकड़ों यात्रियों को प्लेटफार्म व रेलवे परिसर में खुले में बैठकर गुजारना पड़ रहा है। स्टेशन पर अलाव का इंतजाम न होने से यात्रियों के लिए पल-पल गुजारना भारी रहता है। शौचालय तक में लाइन लग रही है। यात्री खाने को लेकर भी परेशान हो रहे हैं।
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छह घंटे देरी से रवाना हो सकी ताज
सोमवार को दिल्ली से झांसी आने वाली ताज एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से पांच घंटे देरी से आई। ट्रेन के आने का समय दोपहर दो बजे और जाने का तीन बजकर बीस मिनट है। ट्रेन के देरी से आने के कारण वापसी में यह गाड़ी रात नौ बजे रवाना हो सकी। चूंकि, बुंदेलखंड के यात्रियों के लिए यह गाड़ी बेहद सुविधाजनक मानी जाती हैं। इस कारण यात्रियों का ट्रेन के इंतजार में बुरा हाल रहा।  

 
ये गाड़ियां लेट
नई दिल्ली से हबीबगंज जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस साढ़े चार घंटे देरी से आई। वापसी में भी यह ट्रेन पांच घंटे लेट हो गई। इसी तरह अमृतसर से मुंबई जाने वाली पठानकोट एक्सप्रेस ग्यारह घंटे, निजामुद्दीन से अर्नाकुलम जाने वाली सवा तीन घंटे, अटारी जबलपुर एक्सप्रेस ग्यारह घंटे, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम एक्सप्रेस बारह घंटे, अमृतसर से नांदेड जाने वाली सचखंड एक्सप्रेस सात घंटे, यशवंतपुर संपर्क क्रांति छह घंटे, महाकौशल एक्सप्रेस चार घंटे, झेलम एक्सप्रेस सात घंटे, अमृतसर से बिलासपुर जाने वाली छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस बारह घंटे, फिरोजपुर से मुंबई जाने वाली पंजाब मेल सात घंटे समेत अधिकांश ट्रेनें देरी से आईं।
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