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फटी सीटें, जाम शीशे व उखड़ा फर्श
ब्यूरो
Updated Wed, 09 Dec 2015 01:27 AM IST
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झांसी। फटी सीटें, खिड़की पर जाम नीले, पीले, हरे रंगे से अधपुते शीशे, गायब फर्स्ट एड बॉक्स, उखड़ा फर्श, यह हाल है रोडवेज बसों का। जर्जर इन बसों में यात्रा करने के लिए यात्री मजबूर हैं।
झांसी परिक्षेत्र के रोडवेज के बेडे़ में 159 बसें हैं। यह बसें समथर, गुरसरांय, उरई, जालौन, कोंच के अलावा दूरस्थ मार्गों पर प्रतिदिन दौड़ती हैं। इन बसों में प्रतिदिन दैनिक यात्री एवं अन्य यात्री हजारों की संख्या में सफर करते हैं। रोडवेज को प्रतिदिन लाखों रुपये की आय होती है, लेकिन यात्रियों को रोडवेज की बसों में सफर का वह आनंद नहीं मिल पाता है, जिसके वह हकदार होते हैं।
ओवरलोडिंग, फर्स्ट एंड बाक्स का अभाव, बाक्स है तो चिकित्सकीय सामग्री का अभाव, शिकायत कहा करें नंबरों का स्पष्ट अंकन नहीं, नियमित सफाई न होना ऐसी कई समस्याएं हैं, जिन्हें वर्षों से यात्री झेलते आ रहे हैं। गुरसरांय के लिए रोडवेज बस में सवार कमलाकांत अड़जरिया के मुताबिक ग्रामीण अंचलों के लिए संचालित रोडवेज बसों में सीटें फटी ही रहती हैं। ओवरलोडिंग की समस्या तो आम है। कुछ हादसा हो जाए तो प्राथमिक चिकित्सा सामग्री भी बस में ढूंढे नहीं मिलती है।
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वहीं उरई जा रहे भूपेंद्र ने बताया कि सरकारी बस में पान व गुटका के पीक आम है। बस की बॉड़ी, फर्श एवं पायदान की चादर भी उखड़ी रहती हैं। शीशे भी नहीं खुलते। मजबूरी में बसों में यात्रा करनी पड़ती है। रोडवेज बस के चालकों का कहना है कि अधिकांश बसों में नियमित सफाई किए जाने का प्रावधान है, लेकिन वह नहीं होती है। ऐेसे में यात्री बदबू के बीच सफर करते हैं।
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झांसी परिक्षेत्र के रोडवेज के बेडे़ में 159 बसें हैं। यह बसें समथर, गुरसरांय, उरई, जालौन, कोंच के अलावा दूरस्थ मार्गों पर प्रतिदिन दौड़ती हैं। इन बसों में प्रतिदिन दैनिक यात्री एवं अन्य यात्री हजारों की संख्या में सफर करते हैं। रोडवेज को प्रतिदिन लाखों रुपये की आय होती है, लेकिन यात्रियों को रोडवेज की बसों में सफर का वह आनंद नहीं मिल पाता है, जिसके वह हकदार होते हैं।
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ओवरलोडिंग, फर्स्ट एंड बाक्स का अभाव, बाक्स है तो चिकित्सकीय सामग्री का अभाव, शिकायत कहा करें नंबरों का स्पष्ट अंकन नहीं, नियमित सफाई न होना ऐसी कई समस्याएं हैं, जिन्हें वर्षों से यात्री झेलते आ रहे हैं। गुरसरांय के लिए रोडवेज बस में सवार कमलाकांत अड़जरिया के मुताबिक ग्रामीण अंचलों के लिए संचालित रोडवेज बसों में सीटें फटी ही रहती हैं। ओवरलोडिंग की समस्या तो आम है। कुछ हादसा हो जाए तो प्राथमिक चिकित्सा सामग्री भी बस में ढूंढे नहीं मिलती है।
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वहीं उरई जा रहे भूपेंद्र ने बताया कि सरकारी बस में पान व गुटका के पीक आम है। बस की बॉड़ी, फर्श एवं पायदान की चादर भी उखड़ी रहती हैं। शीशे भी नहीं खुलते। मजबूरी में बसों में यात्रा करनी पड़ती है। रोडवेज बस के चालकों का कहना है कि अधिकांश बसों में नियमित सफाई किए जाने का प्रावधान है, लेकिन वह नहीं होती है। ऐेसे में यात्री बदबू के बीच सफर करते हैं।